सनातन धर्म और हम
आधुनिक उन्नत लेज़र तकनीक से सुसज्जित समग्र विश्व के शिल्पकारों को एक चुनौती है कि.....
"क्या वे इन आभूषणों की अनुकृति निर्माण कर सकते हैं.??"
ध्यान रहे.!! ये सम्पूर्ण निर्माण एक ही शिला खण्ड से किया गया है।
ऐसा निर्माण सदैव उच्च स्तरीय निपुणता, समर्पण, सहनशीलता, और अपने आराध्य देव के लिए अनन्य आस्था व भक्ति से ही सम्भव है।
ऐसा प्रतीत होता है कि पत्थरों को काटकर नहीं अपितु पिघला कर इन आभूषणों को गढ़ा गया है।
Zoom करके सूक्ष्मतर कलाकृतियों को देखें..!!
इस द्वारपालक के मुखाकृति और आँखों के भाव को देखें.!! कितना जीवन्त चित्रण किया गया है।
आह्लादित.!! अविभूत.!!
उन सनातनी शिल्पकार व वास्तुकार के सम्मान में मस्तक स्वमेव नत हो जाता है।
होयसलेश्व मन्दिर, हलेबीदु, कर्नाटक।
(चित्र - साभार)
इसे निहारिए और रोमांच में खो जाइए.....!!!
अकल्पनीय सनातन धरोहर...!!
जय सनातन धर्म🙏🚩
जय महाकाल🙏🔱🚩
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