सनातन धर्म और हम
समस्त विश्व के शिल्पकला का उच्चतम सीमा जहाँ समाप्त हो जाता है,
वहाँ से वैदिक सनातन संस्कृति का शिल्पकला आरम्भ होता है।
सनातन संस्कृति के पाषण शिल्पकला का एक दुर्लभतम उदाहरण....
Zoom करके देखें...!!
यह अतुलनीय कृति लकड़ियों तक पर उकीर्ण करना असंभव है किन्तु सनातनी पूर्वजों ने इसे ग्रेनाइट पर उकीर्ण कर दिए हैं।
नर्तक नर्तकियों के लघु मूर्तियाँ उनके वाद्ययंत्रों से सुशोभित हैं।
जाल, बेलबूटों को विशेष रूप से देखें.!!
इतना जीवन्त निर्माण समकालीन किसी अन्य देशों में क्या कोई दिखा सकते हैं.???
यह मत भूलें ये निर्माण सहस्रों वर्ष पूर्व किए गए हैं।
इसके उपरांत भी "लहरू-गैंग" के लिए आर्यावर्त सपेरों का देश रहा है।
श्री चेन्नाकेशवा मन्दिर, कर्नाटक।
(चित्र - साभार)
चेन्नाकेशवा मन्दिर भगवान श्री हरि नारायण विष्णु जी को समर्पित हैं।
अतुलनीय सनातन धरोहर...!!
जय सनातन धर्म🙏🚩
जय श्रीमन्नारायण 🙏🌺
जय महाकाल 🙏🔱🚩
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