सनातन धर्म और हम
श्री लिङ्गराज मन्दिर देवाधिदेव महादेव को समर्पित है।
श्री लिङ्गराज मन्दिर में एक वृहताकार शिवलिङ्ग स्थपित हैं (परिधि में)।
अब इतना प्राचीन होने पर शिवलिङ्ग पर कुछ आंस (Nick) बन गया है। यह मन्दिर सातवीं शताब्दी का बना हुआ है।
श्री लिङ्गराज मन्दिर भुवनेश्वर, ओडिशा में स्थित हैं।
यह मन्दिर कला निपुणता, सम्पूर्णता और समरूपता का आदर्श प्रतिमूर्ति है।
Zoom करके देखें...!! दोनों ओर बने कलाकृतियों, लघु मूर्तियों में कोई अंतर नहीं ढूंढ पाएँगे।
अब अपने मस्तिष्क पर थोड़ा जोर लगाकर सोचें कि जब उस समय SI मापन प्रणाली विकसित नहीं हुई थी तो कैसे इतना सटीक माप किया गया है जिससे दोनों ही ओर के संरचनाओं में एक जरा सा भी अंतर नहीं है.??
क्या इससे यह प्रमाणित नहीं होता कि हमारा वैदिक ज्योतिष शास्त्र का मापन और गणना प्रणाली किसी भी अन्य कथित विकसित प्रणालियों से श्रेष्ठ रहा है.??
बस आवश्यकता है कि हम हर बात में पाश्चात्य देशों के प्रमाणपत्र को ढूंढना छोड़ दें.!!
अतुलनीय सनातन धरोहर..!!
जय सनातन धर्म🙏🚩
जय महाकाल🙏🔱🚩
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