सनातन धर्म और हम
श्री राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे।
सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने॥
कण कण में राम समाया......
जब इ^लाम का जन्म भी नहीं हुआ था, और यह धरा सनातन संस्कृति से पुष्पित पल्लवित थी।
इंडोनेशिया के बाली द्वीप पर अयुंग नदी के तट पर कंदराओं में राम कथा (रामायण) सनातनी पूर्वजों के हाथों से अपनी पूर्ण सजीवता से उकीर्ण है।
इस सम्पूर्ण रामायण को उकेरने में लगे श्रम व समय का अनुमान लगाएँ...!!
बस इतना ही विचार कीजिए कि उन सनातनी पूर्वजों में सनातन धर्म के प्रति जो आस्था व समर्पण भाव था क्या उतना आज हम सभी अपने जीवन में उतार पाए हैं.??
सदा ध्यान रखें "धर्म ही समृद्धि का मूल है"..!!
धर्म नहीं तो हम नहीं.!!
धर्म विहीन देश का महत्व, सार्थकता, उपयोगिता ही क्या.!!
पुनः अखण्ड धर्मनिष्ठ होना ही सभी समस्याओं का अचूक औषधि है, निदान है, निराकरण है।
लौटें सनातन धर्म/संस्कृति की ओर.!!
गौरवान्वित सनातन धरोहर...!!
जय सनातन धर्म🙏🚩
जय श्री राम🙏🌺
जय महाकाल 🙏🌺🚩
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