सनातन धर्म और हम

ये अद्वितीय, अद्भुत शिवलिङ्गम हैं जो अपने आप में विशिष्टता समेटे हुए हैं।

इस शिवलिङ्ग पर एक हंस और एक वराह उकीर्ण हैं।

शिखर पर नागछत्र बने हुए हैं।

इस अनुपम शिवलिङ्ग को लिङ्गोद्भव के रूप में जाना जाता है।

यह शिवलिङ्ग पुराण में एक प्रचलित कथा पर निर्मित हैं।

एक बार श्री विष्णु और श्री ब्रह्मदेव में "श्रेष्ठता" को लेकर विवाद उत्तपन हो गया।

उसी समय एक दिव्य ज्योतिर्मय स्तम्भ प्रकट हुए जिनसे सतत अग्नि उत्पन्न हो रहे थे।

उन दोनों देव को यह आदेश प्राप्ति हुई कि जो भी इस दिव्य ज्योति स्तम्भ के "आदि" या "अंत" को ज्ञात कर लेंगे वे ही सर्वश्रेष्ठ घोषित होंगे।

श्री ब्रह्मदेव हंस के रूप में आकाश की ओर और श्री विष्णु वराह के रूप में पाताल की ओर प्रस्थान किये।

परन्तु दोनों ही इस दिव्य ज्योति स्तम्भ के आदि-अंत का पता नहीं कर पाए।

और अन्ततः दोनों ही हारकर देवाधिदेव महादेव के समक्ष नतमस्तक हो गए।

देवाधिदेव महादेव दोनों को ही अपने-अपने क्षेत्र में समान रूप से श्रेष्ठ घोषित किए और विवाद का इतिश्री हुआ।

यह लिङ्गोद्भव शिव विग्रह श्री त्रिशुण्ड गणपति मन्दिर में स्थापित हैं।

श्री त्रिशुण्ड गणपति मन्दिर १७५४ ई. में निर्मित, पुणे, महाराष्ट्र में स्थित हैं।

महान सनातन धरोहर...!!

जय सनातन धर्म🙏🚩

जय महाकाल 🙏🔱🚩
#प्रेमझा

Comments

Popular posts from this blog

सनातन धर्म और हम

सनातन धर्म और हम

सनातन धर्म और हम