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Showing posts from August, 2025

सनातन धर्म और हम

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हमारे सनातनी पूर्वजों द्वारा निर्मित पाषण कलाकृतियों को भरपूर निहार कर अपनी आँखों को बन्द करें और उनके समर्पण, त्याग और बलिदान को स्मरण करते हुए विश्लेषण करें। आपको सनातन संस्कृति की महानता के समक्ष सम्पूर्ण विश्व के प्रसाधन तुच्छ प्रतीत होंगे। इन्हें सहेजना संवरण करना राजसत्ता और सनातनियों का परम् कर्तव्य था। किन्तु "लहरू-गैंग" ने मुर्दा आततायी मुगलों के कब्रों के रखरखाव के लिए जितना धन नष्ट व व्यय किया उसका दशांश भी इन धरोहरों पर करता तो सम्पूर्ण विश्व में सनातन संस्कृति का डंका बजता। परन्तु यह सनातन धर्म के मन्दिर रहे हैं इसलिए "(लहरू-गैंग) ने अपने विद्वेष के लिए 'सिकुलरिज्म' का षड्यंत्र रचा और इसे अन्धकार में धकेल दिया। होयसल नरेश वीर बल्लाल द्वितीय के काल ११९६ ई. में  अमृतेश्वर दण्डनायक के द्वारा इस अतुलनीय मन्दिर का निर्माण किया गया। श्री अमृतेश्वर मन्दिर चिकमंगलूर, कर्नाटक। श्री अमृतेश्वर मन्दिर भगवान शिव को समर्पित है। अमृतेश्वर मन्दिर, अमृतपुर गाँव, चिकमंगलूर जनपद में स्थित है। इस मन्दिर में अनुपम शिवलिङ्ग स्थापित हैं। इस मन्दिर में स्थापित नन्दी को देखक...

सनातन धर्म और हम

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मानव जीवन के लिए सूर्यदेव का स्थान अतुलनीय है। सूर्यदेव की ऊर्जा से ही यह सम्पूर्ण सृष्टि पोषण प्राप्त करता है। सूर्यदेव से ऊर्जा का स्थानांतरण सागर में, सागर से मेघों में, मेघों से वृष्टि में, वृष्टि से धरा में, धरा से पेड़ पौधों में, पेड़ पौधों से फल व अन्न में यही ऊर्जा संचित होती है। फल व अन्न से सभी जीव-जंतुओं में यही संचित ऊर्जा पोषण करने का कार्य करता है। इसीलिए सूर्यदेव की आराधना प्राचीन काल से सनातन धर्म की परम्परा रही है। सूर्यदेव की आराधना के लिए सनातनियों ने वैभवशाली भव्य मन्दिरों का निर्माण किए। उदाहरण स्वरूप कश्मीर का मार्तण्ड मन्दिर, कोणार्क, ओडिशा का सूर्य मन्दिर, देव, औरंगाबाद, बिहार का सूर्य मन्दिर, ग्वालियर, मध्यप्रदेश का सूर्य मन्दिर, इत्यादि। इनमें से कई मन्दिर विधर्मी म्लेच्छ रेगिस्तानी पशुओं के द्वारा ध्वस्त व विखंडित होने के कारण भग्नावशेष के रूप में ही हैं। इन्हीं सूर्यदेवता का एक अद्भुत सौंदर्यपूर्ण मन्दिर श्री सूर्य मन्दिर झालरापाटन, राजस्थान है। नौवीं शताब्दी में, भुमिज शैली में निर्मित यह सूर्य मन्दिर सनातन वस्तुशिल्प व स्थापत्य कला का अद्वितीय आदर्श प्रतिकृत...

सनातन धर्म और हम

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एक अद्वितीय, अद्भुत शिवलिङ्गम जिसका जलाभिषेक प्राचीन काल से वर्तमान समय में भी प्राकृतिक जलधारा स्वतः करती आ रही हैं। श्री शिवलिङ्गम, गोमुख कुण्ड, चित्तौड़गढ़ किला, राजस्थान। गोमुख कुण्ड चित्तौड़गढ़ के अनेक प्राकृतिक जलधाराओं में से एक है। इस जलधारा के प्रवाह का मुख गऊ माता के मुख के सदृश्य है अतः इसे गोमुख कहा जाता है। यहाँ जलधारा प्राचीन काल से अनवरत प्रवाहित हो रही है और आज तक लोगों/विज्ञानियों के लिए इसका स्रोत अज्ञात ही है। (चित्र-साभार) यह एक रहस्य ही है जो आज तक कोई नहीं सुलझा पाया है कि इस जलधारा का उद्गम स्थल कहाँ है, यह कहाँ से होकर आ रही है। जलधारा एक कुण्ड में गिरती है। इसी कुण्ड में यह अप्रतिम शिवलिङ्गम स्थापित हैं, जिनका अनवरत रुद्राभिषेक होता रहता रहा है। ॐ नमः परम् शिवाय 🚩 अद्भुत सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म और हम

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देव, दानव, यक्ष, गन्धर्व, नाग, किन्नर, असुर, मानव सबों ने देवाधिदेव महादेव के शरणागत हो भक्ति भाव से इन्हें प्रसन्न कर अपने अभीष्ट को प्राप्त किया है। भगवान शिव की जिसने भी भक्ति की उन्हें वरदान देने में प्रभु ने कभी कमी नहीं किए, चाहे वर मांगने वाले की मंशा सृजन हो या विनाश कोई अंतर नहीं किए। तभी तो इन्हें औघड़दानी कहा जाता है। ये सदैव अपने भक्तों को पाप, शाप, व संताप से मुक्ति दिलाए हैं। इसलिए इनके भक्तों ने इनके विग्रह को अपने सुविधा अनुसार सभी स्थानों पर स्थापित किए हुए हैं। परमपिता परमेश्वर भगवान शिव का दुर्लभतम विग्रह और शिवलिङ्गम सुदूर सघन वन के मध्य स्थापित है। यह अनुपम विग्रह कलहट्टी झरना (निकट), कलाठिगिरी, चिकमंगलूर जनपद, कर्नाटक में स्थापित है।(चित्र-साभार) भगवान शिव के विग्रह के शिल्पकला की निपुणता और प्रवीणता आश्चर्यचकित करते हैं। नागनाथ, रुद्राक्ष, भगवान की जटा, उंगलियों आदि को कितने उत्कृष्टता और स्पष्टता से निर्मित किया गया है। यहाँ का दृश्य कितना दिव्य और दुर्लभ है। इस शान्त निरवता में भी एक अलौकिक ऊर्जा का प्रवाह स्पष्ट अनुभव किया जा सकता है। अप्रतिम सनातन धरोहर....!! ...

सनातन धर्म और हम

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यह शिवलिङ्गम किसी सामान्य मन्दिर के शिवलिङ्गम नहीं हैं। इस शिवलिङ्गम का इतिहास त्रेतायुग से सम्बद्ध हैं। इस शिवलिङ्गम की स्थापना स्वयं मर्यादापुरुषोत्तम भगवान श्री राम के हाथों हुआ है। कहा जाता है कि गुरु महर्षि वशिष्ठ ने सूर्यवंश के यश, कीर्ति और गौरव के उत्तरोत्तर वृद्धि हेतु यह सुझाव दिए थे कि श्री राम अपने हाथों शिवलिङ्गम की स्थापना और पूजन अर्चना करें। महर्षि वशिष्ठ के सुझाव अनुरूप ही भगवान श्री राम ने इस शिवलिङ्गम की स्थापना किये और देवाधिदेव महादेव के अनुग्रह के लिए पूजन अर्चना किए। इस शिवलिङ्गम के मन्दिर का निर्माण बहुत समय पश्चात छठी शताब्दी में किया गया है। यह शिव मन्दिर मिर्जापुर (उत्तरप्रदेश) से ८ की.मी. दूर शिवपुर गाँव में स्थापित हैं। शिव भक्तों के लिए यह एक महत्वपूर्ण पवित्र स्थल है जहाँ से उनके मनोकामना पूर्ण होते हैं। वैभवशाली ऐतिहासिक सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म और हम

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परमपिता भोलेनाथ के भक्ति की अगन जब जल उठती है फिर औघड़दानी के भक्त आनन्द में उन्मत्त हो अपने आराध्य देव का पूजन अर्चन करने हेतु कहीं भी बैठ सकते हैं। वो थल हो या जल.!! मैदान हो या मरुस्थल.!! कन्दरा हो या पर्वत.!! कोई अन्तर नहीं पड़ता.!! बस एक महादेव की राग.!!! यह परमपिता देवाधिदेव महादेव का अद्वितीय, अतुलनीय स्वयम्भू शिवलिङ्गम सघन वन में स्थापित है.!! श्री सुंदर महालिङ्गम, सथूरागिरी पहाड़ी, मदुरई के निकट, तमिलनाडु। (चित्र - साभार) भगवान शिव अपने दिव्य प्रकाश से सघन वन को भी आलोकित कर रहे हैं। यहाँ का प्राकृतिक सौंदर्य भक्तों को सम्मोहित कर मन्त्रमुग्ध कर दे रहे हैं। शिव भक्त यहाँ भी अपने प्रभु से मिलने, उनका पूजन करने, इनका आशीर्वाद प्राप्त करने बढ़े ही भक्ति भाव से आते हैं। अनुपम सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म और हम

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किसी भी वास्तुशिल्प के निर्माण का प्रथम चरण उसकी परिकल्पना ही होती है। आधुनिक आर्किटेक्ट उसे ही आधुनिक तकनीक का उपयोग कर ग्राफिक्स का रूप देते हैं। जिसे मूर्तिकार/कलाकार/श्रमिक अपने हाथों/यंत्रों/प्रयासों से मूर्त रूप प्रदान करते हैं। संलग्न छवियों को ज़ूम करके देखें.!! (चित्र - साभार) अब विचार करें कि जिन सनातनी वास्तुकारों ने इसकी परिकल्पना की होगी उनकी कल्पनाशीलता किस उच्चतम स्तर की होगी.!! इस परिकल्पना को साकार करने हेतु जो आवश्यक गणना/माप/साधन उपलब्ध करवाने का जो कार्य होगा वह कितना दुरूह होगा.!! परन्तु बिना किसी आधुनिक तकनीक और आधुनिक यंत्रों के हमारे सनातनी पूर्वजों ने यह कार्य सफलतापूर्वक संपन्न किया और इसे छोड़ गए विश्व समक्ष अपने उत्कृष्ट कल्पनाशीलता और कार्य सम्पादन के प्रमाण के रूप में.!! कोई माने या नहीं माने किन्तु उन्होंने जो भी निर्माण किया वह अतुलनीय है, अद्वितीय है। धन्य है वे सनातनी शिल्पकार जिनकी रचना सहस्रों वर्षों के पश्चात आज भी गर्व से खड़ा है। यह कला आज इसलिए विलुप्त हो गया है क्योंकि हमारे गुरुकुल परम्परा को ध्वस्त समाप्त कर दिया गया। मन्दिर एंडोमेंट एक्ट को निरस...

सनातन धर्म और हम

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यह एक अप्रतिम अनुपम शिवलिङ्ग है। श्री सोमेश्वर महादेव मन्दिर, चालुक्य वास्तुकला में निर्मित एक अनमोल मन्दिर हैं। श्री सोमेश्वर महादेव मन्दिर का निर्माण १०७० ई. से ११२६ ई. के मध्य चालुक्य वंश के राजाओं द्वारा किया गया है। यह अद्वितीय शिवलिङ्ग श्री सोमेश्वर महादेव मन्दिर में स्थापित है। इस अद्भुत शिवलिङ्ग का जललहरी (अरघा) वृत्ताकार नहीं होकर वर्गाकार है। श्री सोमेश्वर महादेव मन्दिर, कोलानुपक, यादगारी जनपद, तेलंगाना राज्य में स्थित है। यह मन्दिर स्थानीय शिवभक्तों में बहुत लोकप्रिय है। शिवरात्रि को इस मन्दिर में विशेष पूजन अर्चन किया जाता है। वैभवशाली सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा