सनातन धर्म और हम
हमारे सनातनी पूर्वजों द्वारा निर्मित पाषण कलाकृतियों को भरपूर निहार कर अपनी आँखों को बन्द करें और उनके समर्पण, त्याग और बलिदान को स्मरण करते हुए विश्लेषण करें। आपको सनातन संस्कृति की महानता के समक्ष सम्पूर्ण विश्व के प्रसाधन तुच्छ प्रतीत होंगे। इन्हें सहेजना संवरण करना राजसत्ता और सनातनियों का परम् कर्तव्य था। किन्तु "लहरू-गैंग" ने मुर्दा आततायी मुगलों के कब्रों के रखरखाव के लिए जितना धन नष्ट व व्यय किया उसका दशांश भी इन धरोहरों पर करता तो सम्पूर्ण विश्व में सनातन संस्कृति का डंका बजता। परन्तु यह सनातन धर्म के मन्दिर रहे हैं इसलिए "(लहरू-गैंग) ने अपने विद्वेष के लिए 'सिकुलरिज्म' का षड्यंत्र रचा और इसे अन्धकार में धकेल दिया। होयसल नरेश वीर बल्लाल द्वितीय के काल ११९६ ई. में अमृतेश्वर दण्डनायक के द्वारा इस अतुलनीय मन्दिर का निर्माण किया गया। श्री अमृतेश्वर मन्दिर चिकमंगलूर, कर्नाटक। श्री अमृतेश्वर मन्दिर भगवान शिव को समर्पित है। अमृतेश्वर मन्दिर, अमृतपुर गाँव, चिकमंगलूर जनपद में स्थित है। इस मन्दिर में अनुपम शिवलिङ्ग स्थापित हैं। इस मन्दिर में स्थापित नन्दी को देखक...