सनातन धर्म और हम
सम्पूर्ण विश्व में भाँति-भाँति के रँग-रूप, आकर-प्रकार के शिवलिङ्ग प्राप्य हैं।
किन्तु, यह दुर्लभतम शिवलिङ्ग अपने आप में अनूठा और अप्रतिम हैं।
(चित्र-साभार)
इस अद्भुत शिवलिङ्ग में नन्दी महाराज व कूर्म (कच्छप/कछुआ) संयुक्त रूप में निर्मित हैं।
यह अतिप्राचीन भगवान देवाधिदेव महादेव को समर्पित श्री गङ्गेश्वर महादेव मन्दिर में स्थापित हैं।
श्री गङ्गेश्वर महादेव मन्दिर, गङ्गवा ग्राम, दांता तालुका, बनासकांठा जनपद गुजरात में स्थित हैं।
शिवलिङ्ग में स्पष्ट रूप में नन्दी महाराज व कूर्म दृश्यमान हैं।
मन्दिर भग्न स्थिति में ही है। मन्दिर के शिखर भी खण्डित हैं।
मात्र गर्भगृह सुरक्षित है जहाँ यह अनुपम शिवलिङ्ग स्थापित हैं।
इस मन्दिर की भव्यता का गर्भगृह को देखकर कोई भी अनुमान लगा सकता है कि अपने गौरवपूर्ण अतीत में यह मन्दिर कितना भव्य रहा होगा.!!
इस मन्दिर के गर्भगृह के एक भीत पर श्रीमन्नारायण के दशावतार उकीर्ण हैं।
इनमें मत्स्यावतार, कूर्मावतार, वाराहावतार, नरसिंहावतार, वामनावतार, श्री परशुराम अवतार, श्री राम अवतार, श्री बलभद्र अवतार तथा श्री कृष्ण अवतार हैं। आश्चर्यजनक रूप से इनमें श्री कल्कि अवतार भी उकीर्ण हैं।
प्राचीन काल में यह मन्दिर अवश्य ही शैव परम्परा के उच्चतम केन्द्र रहे होंगे।
आज इस अतुलनीय सनातन धरोहर को सुरक्षित रखने की अतीव आवश्यकता है।
अतुलनीय सनातन धरोहर...!!
जय सनातन धर्म🙏🚩
ॐ नमः परम् शिवाय 🚩
जय महाकाल 🙏🔱🚩
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