सनातन धर्म और हम

आर्यावर्त में अखण्ड पाषाण शिला से निर्मित यह सम्भवतः सबसे विराट 'ऐश्वर्य गणपति" का विग्रह हैं।

किन्तु अतिप्राचीन होने के उपरांत भी यह आज भी एक मन्दिर की प्रतीक्षा में हैं।
(चित्र-साभार)

यह सहस्रों वर्षों से खुले आकाश के नीचे प्रकृति के झंझावातों को सह रहे हैं।

स्थानीय निवासियों की मानें तो कभी चुनाव के समय cm ने मन्दिर निर्माण का आश्वासन दिया था। परन्तु कहावत है न कि 'रात गई बात गई" और काम निकलने के पश्चात कौन किसी को जानता है।

यह ऐश्वर्य गणपति जी हैदराबाद से लगभग ११० कि.मी. की दूरी पर एक अल्प ज्ञात गाँव एवञ्च (अवंच) में स्थापित हैं।

ऎसी मान्यता है कि इनका निर्माण चालुक्यों ने ग्यारहवीं शताब्दी में करवाया था।

यह ऐश्वर्य गणपति की प्रतिमा पच्चीस फीट ऊँची है।

यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश के सबसे विशाल ऐश्वर्य गणपति जी के बारे में अधिकांश सनातनी लोगों को ज्ञात नहीं है।

दुर्लभ सनातन धरोहर...!!

जय सनातन धर्म🙏🚩

जय विघ्नहर्ता विनायक गणपति जी 🙏🌺

जय महाकाल 🙏🔱🚩
#प्रेमझा

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