सनातन धर्म और हम
वो कैसी चमत्कारी विद्या रही होंगी जो पाषण को भी मोम के सदृश्य कोमल बनाकर उसपर कला का सृजन किया जाता था.????
इस शिल्प विद्या में पारंगत होने हेतु कितना परिश्रम, एकाग्रता और समय दिए गए होंगे.????
किनका प्रेरणा रहा होगा जिनसे प्रेरित होकर उन्होंने ऐसा अप्रतिम सृजन किए होंगे.????
क्या सनातनी पूर्वजों के इन विरासतों को हम उचित सम्मान दे पाए हैं.???
श्री सुब्रमण्यम स्वामी अपने वाहन मयूर संग नाग-बन्ध पर विराजमान, निर्मित हैं। (चित्र - साभार)
श्री रामतीर्थ मन्दिर, गोकर्ण, उत्तर कानारा, कर्नाटक।
प्रभु मुरुगन के मुखमण्डल से लेकर उनके वस्त्र-आभूषणों तक, मोर से लेकर नाग-द्वय तक के निर्माण में जो निपुणता दृश्यमान होता है यह पाषाण शिल्प कला का सर्वोच्च शिखर ही है।
यह सम्पूर्ण निर्माण एक अखण्ड पाषण शिला पर किया गया है।
इन्हें देखकर अपने सनातनी पूर्वजों पर गौरवान्वित हैं।
गौरवशाली सनातन धरोहर...!!
जय सनातन धर्म 🙏🚩
जय श्री षण्मुख स्कन्द 🙏🌺
जय महाकाल 🙏🔱🚩
Comments
Post a Comment