सनातन धर्म और हम
इस सृष्टि की रचना में "योग/युग्म/संगम" का विशिष्ट एवं महत्वपूर्ण भूमिका है।
संगम के बिना तो सृष्टि की कल्पना भी नहीं किया जा सकता है।
नया जीवन "शुक्राणु एवं अंडाणु" के संगम से ही जन्म लेता है।
अब इस सब की जानकारी के लिए X-Ray, Ultrasonogram, आदि आधुनिक विधि उपलब्ध है।
परंतु कल्पना करें दो सहस्राब्दी पूर्व के सनातनी पूर्वजों को इसकी सटीक सूचना किस प्रौद्योगिकी/ तकनीक ने दिया होगा.??
कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है न.??
गर्व करें कि उन सनातनी पूर्वजों ने अपने तपश्चर्य से अंतर्चक्षु को इतना जागृत कर लिया था कि उन्हें किसी भी घटना को सहजता से देखने की दृष्टि प्राप्त हो गया था।
वे इस दिव्य दृष्टि से भविष्य में भी झाँक सकते थे।
इसी बात का प्रत्यक्ष प्रमाण आप श्री वाडाकुनाथ स्वामी मन्दिर की भीत पर ऊकीर्ण पाषाण भित्ति चित्रों में देख सकते हैं।
श्री वाडाकुनाथ स्वामी मन्दिर, त्रिश्शुर, केरल।
इस भित्ति चित्रों में शुक्राणु, अंडाणु, निषेचन, अंबिलिकल कार्ड, भ्रूण विकास की सभी अवस्थाओं को जीवंत रूप में चित्रित किया गया है।(सभी चित्र -साभार)
अपने मस्तिष्क पर जोर दे कर विचार करें कि यह सभी तथ्य बिना आधुनिक युग के तकनीक के यदि उस प्राचीन काल में संभव था तो हमारे ऋषि मुनि कितने बड़े शोधकर्ता/अनुसंधानकर्ता विज्ञानी थे.!
इसी लिए मैं सदा कहता रहा हूँ कि विराट (धर्म) की जाँच क्षुद्र (विज्ञान) से करने का प्रयास एक मानसिक विक्षिप्तता के अतिरिक्त और कुछ नहीं है।
अपना ध्यान केन्द्रित करें और प्रयास करें कि पुनः उसी दिव्य दृष्टि वाले ज्ञान अवस्था में पहूँचें.!!
यह केवल और केवल अखंड धर्मनिष्ठ हो कर ही प्राप्त किया जा सकता है, सिकूलर जीव बनकर नहीं.!
अवश्य ही चिंतन करें.!!
अकल्पनीय सनातन धरोहर...!!
जय सनातन धर्म 🙏🚩
जय महाकाल 🙏🌹🚩
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