सनातन धर्म और हम
हमारे धर्म-शास्त्र, पुराण, रामायण, महाभारत कोई काल्पनिक कथाओं के संग्रह नहीं हैं।
ये हमारे गौरवशाली सनातन इतिहास के प्रामाणिक ग्रन्थ हैं।
चित्र में दिख रही पत्तियाँ "पाण्डव की बाती" के नाम से जाना जाता है।
इसका नाम "CALICARPA TOMENTOSA" है।
(चित्र-साभार)
मान्यता है कि जब पाण्डव कौरवों के द्वारा "द्यूत-क्रीड़ा" में छल से पराजित कर दिए गए और अपने पण के अनुसार बारह वर्षों का वनवास और एक वर्ष का अज्ञातवास पूरा करने के लिए वन क्षेत्रों में रहते थे तो उन्होंने इस पत्तों को ही प्रकाश के लिए जलाकर उपयोग किया करते थे।
इन पत्तियों की विशिष्टता है कि इसके नोक पर थोड़ा तेल लगा कर इसे जलाने पर यह दीपक की बाती के सदृश्य ही जलता रहता है।
ऐसा कहा जाता है कि आदिकाल में पाण्डवों ने इसे वन में प्रकाश के लिए उपयोग किया था इसीलिए इसे "पाण्डवों की बाती" के नाम से ही जानते हैं।
सनातन संस्कृति के प्रमाण तो सर्वत्र व्याप्त है, बस देखने के लिए सनातन की दृष्टि चाहिए।
जय सनातन धर्म🙏🚩
जय महाकाल🙏🔱🚩
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