सनातन धर्म और हम

वामियों और मैकाले वायरस से संक्रमित कथित शिक्षाविदों की निर्लज्जतापूर्वक की गई धृष्ठता देखिए....

जिनके देश में प्रथम विद्यालय ही १८११ ई. में प्रारम्भ हुआ हो उसे औद्योगिक क्रांति का श्रेय दिया जाता है।

और हमारे गौरवपूर्ण सनातन संस्कृति का यह आदर्श उदाहरण देखिए....

जब आधा विश्व वर्णमाला ही सीख रहा था उस समय से बहुत-बहुत पहले, सहस्रों वर्ष पूर्व ही हमारे सनातनी शिल्पकारों ने पहियों पर चलने वाले मन्दिरों और भवनों का सफलतापूर्वक निर्माण सम्पन्न कर चुके थे।

अद्भुत कलाकृतियों से युक्त इस श्री वल्लुवर कोट्टम मन्दिर, चेन्नई, तमिलनाडु  को देखें.!!
(चित्र-साभार)

यह मन्दिर उस काल में बना है जब विश्व के अधिकांश लोगों को वास्तुशिल्प का "ककहरा" भी ज्ञात नहीं था।

वामियों द्वारा लिखित कथित असत्य इतिहास को पढ़कर जिस हीनभावना और अपराधबोध से ग्रसित हो गए हैं, उसे त्यागने का यही उपयुक्त समय है।

अपने सनातन संस्कृति परम्परा पर गर्व करें और पुनः वही कीर्ति पताका लहराने के लिए प्रयत्नशील होइए।

गौरवशाली सनातन धरोहर...!!

जय सनातन धर्म🙏🚩

जय महाकाल🙏🔱🚩
#प्रेमझा

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