सनातन धर्म और हम
श्री राम इस देश के जन - जन के आदर्श रहे हैं।
श्री राम इस देश के कण - कण में रचे - बसे हैं।
मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का यशोगान चहुँ ओर होता रहा है।
आईए बात करते हैं श्री राम जी के वनवास अवधि समाप्ति के उपरांत अयोध्या लौटने की।
संलग्न चित्र....
यह कूप कोई सामान्य कूआँ नहीं है।
यह कूप अपने में त्रेतायुग और मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचन्द्र जी, माता वैदेही जानकी के स्मृति चिन्हों को समेटे हुए हैं।
यह अपने आप में आश्चर्यजनक विशिष्टता का संगम धारण किए हुए है।
समुद्र के अन्दर स्थित होने पर भी इस कूप में का जल मीठा है (sweet water)।
(समुद्र के लवणीय (खारे) पानी में मध्य मृदु जल मिलना असम्भव है।)
यह त्रयंबकेश्वर (द्वादश ज्योतिर्लिंग वाला नहीं) प्रभु शिव मन्दिर संस्थानम में स्थित है।
यह विल्लुण्डी तीर्थम कहलाता है।
Villoondi Theertham, Thangachimadam, Tamilnadu. (चित्र - साभार)
ऐसी मान्यता है कि रावण से सीता जी को मुक्त कराकर श्री राम जी यहीं इस देवाधिदेव महादेव के शिवलिङ्गम का पूजन किए थे।
पूजन सम्पूर्ण होने के उपरांत जनकसुता सीता जी को प्यास लगने पर श्री राम ने अपने तूणीर से वाण ले समुद्र भेदन कर मृदु जल निकाले थे।
इसी जल से भगवती वैदेही अपनी प्यास बुझाई थी।
वैसे विल्लुण्डी का अर्थ "तीर से छेदा हुआ" होता है।
यह है महान सनातन धरोहर..!!
जय सनातन धर्म🙏🚩
भागवती वैदेही मैथिली सीता जी की जय 🙏🌺
मर्यादा पुरुषोत्तम राजा रामचंद्र जी की जय 🙏🚩
जय महाकाल 🙏🔱🚩
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