सनातन धर्म और हम
आर्यावर्त के मन्दिरों, भवनों, राजप्रासादों, धर्मस्थलों को देखकर यह लगता है कि विश्व के "वंडर्स/wonders" का निर्णय वास्तविक प्रतिष्ठानों को देखकर नहीं अपितु किसी "वातानुकूलित कोठरी" में बैठकर किया गया है, तभी तो बस एक तेजोमहालय ही इसमें स्थान बना पाया।
अकल्पनीय वास्तुशिल्प का निर्माण क्या होता है यह आज भी विश्व को सनातन धर्म से ही सीखना पड़ेगा।
इस छवि में निर्मित मन्दिर को ध्यान से देखें और सोचें कि जिस स्थान पर मनुष्य का पहुँचना भी दुःसह है वहाँ इतने भव्य मन्दिर का निर्माण सनातनी पूर्वजों ने किस प्रकार किए होंगे.!!
यह श्री संजीवराय पेरुमल मन्दिर, एरुमापट्टी प्रखंड, नमक्कल जनपद, तमिलनाडु में स्थित हैं।
यह सिरागिरी पहाड़ी पर भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित मन्दिर है।
इस अकल्पनीय मन्दिर का निर्माण सत्रहवीं शताब्दी में हुआ है।
इस मन्दिर के निर्माण का श्रेय मदुरै साम्राज्य के नायक राजवंश के शासकों को है जिन्होंने अपने आराध्य देव भक्ति में ऐसा अद्वितीय मन्दिर का निर्माण करवाए।
नमन है उन सनातनी पूर्वजों को जिन्होंने इस अद्भुत मन्दिर का निर्माण किया है।
अतुलनीय सनातन धरोहर...!!
जय सनातन धर्म 🙏🚩
जय श्रीमन्नारायण🙏🌺
जय महाकाल 🙏🌺🚩
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