सनातन धर्म और हम
जिन्होंने भारतवर्ष के सनातन संस्कृति के अद्भुत मन्दिरों का भ्रमण कर दर्शन ही नहीं किया उनके लिए भारतीय वास्तुकला ताजमहल से प्रारम्भ हो कुतुबमीनार पर समाप्त हो जाता है।
ये चित्र चेन्नाकेशवा मन्दिर, कर्नाटक के हैं।
इस में नर्तकियों की जीवंत मूर्तियों की भाव भंगिमाओं को देख मुग्ध हो जायेंगे।
ये हैं सनातन पूर्वजों द्वारा निर्मित अकल्पनीय शिल्प।
शिल्पकार के निपुणता और परिश्रम के बारे में सोचकर ही अचंभित हो जायेंगे।
क्या यह निर्माण केवल छेनी हथौड़ी से सम्भव है???
विधर्मी आक्रांताओं ने इस रहस्यमयी सनातन कला को मृत कर दिया।
इस मूर्तियों से आप मोनालिसा की तुलना करें और निर्णय लें कि कौन सी कलाकृति अतुलनीय है।
वमियों कांगियों ने वैभवशाली सनातन धरोहरों की सत्यता छुपाने के निकृष्टतम पाप किया है।
अतुलनीय सनातन धरोहर...!!!
जय सनातन धर्म🙏🚩
जय महाकाल 🙏🔱🚩
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