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Showing posts from December, 2023

सनातन धर्म

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सभी आधुनिक शिक्षा में प्रयुक्त पाठ्य पुस्तकों में यही लिखा है कि 'औद्योगिक क्रांति' यूरोप में हुआ था और अधिकांश यांत्रिकी सेवा उसी की देन है। वहीं जब बात नवाचार और अन्वेषण की करें तो सबसे अधिक 'पेटेंट' अमेरिका के नाम पर है। इसके अतिरिक्त यह भी कहा जाता है कि अंतरिक्ष से संबंधित यांत्रिकी एवं तकनीकी का विकास उन्नीसवीं शताब्दी में अमेरिका/रूस के नाम से ही है। अब एक बार संलग्न चित्र पर ध्यान दें......!!!! ये अंतरिक्ष यात्री आर्यावर्त के मन्दिरों में कई सहस्र वर्ष पूर्व बने हुए हैं। (चित्र - साभार) अब आप विचार करें कि जैसा आर्यावर्त के मन्दिरों में निर्मित मूर्तियों को दिखाई देता है ठीक वैसा ही अंतरिक्ष उपकरण आधुनिक युग में विज्ञान ने कैसे और क्यों बनाया.?? आश्चर्य चकित हो गए हैं ना.!?! वास्तविकता में हमारे सनातनी मन्दिर मात्र आस्था पूजन का धर्मिक स्थल नहीं रहा है। अपितु शिक्षा, पठन पाठन, ज्ञान विज्ञान, शोध अनुसंधान का सर्वोच्च संस्थान और केन्द्र रहा है। ये भिन्न बात है कालांतर में विदेशी आक्रांताओं के आक्रमण और पराधीनता के कारण यह व्यवस्था पूर्ण रूप से ध्वस्त हो कर रह गया।...

सनातन धर्म

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यह कैसा रहस्य है जो सम्पूर्ण विश्व में फैला हुआ है.??? क्या यह आदि काल के सनातनी द्वारा निर्मित कोई तांत्रिक साधना स्थल है.??? इसकी संरचना विश्व भर में एक जैसी ही क्यों है.??? क्या यह मानव निर्मित है या कोई परग्रही जीव इसे प्राचीन काल में बना कर छोड़ दिया है.??? ये कुछ अबूझ पहेली है जिसका वर्णन मिलता नहीं है.!!! (चित्र - साभार) जय सनातन धर्म 🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म

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हम सनातनी के लिए मन्दिर में अपने आराध्य देव का दर्शन भी भक्ति का एक महत्वपूर्ण भाग है। बहुतों को आपने यह कहते हुए सुना होगा कि "इतने वर्षों से मन्दिर जा रहा हूं और मेरा मनोरथ पूर्ण नहीं हुआ।" ऐसा क्यों होता है?? आइए चिंतन करें.!! गहरे तल पर विचार करें तो यह पाएंगे कि अधिकांशतः हम जब आराध्य देव के समक्ष उपस्थित होते हैं तो दो ही काम करते हैं-- १. असंतोष के उद्गार प्रगट (Putting a complaint list) करते हैं। या २. क्रय पत्रिका (Putting a shopping list) प्रस्तुत करते हैं। अर्थात... (१) यह कहते हैं कि मुझे अच्छा घर नहीं दिया, अच्छा आय, अच्छी भार्या, संस्कारी बच्चे, अच्छा सुख साधन उपलब्ध नहीं कराए, आदि आदि.! या फिर... (२) मुझे बहुराष्ट्रीय कंपनी में CEO बना दें, मुझे चुनाव जिताकर सबसे बड़ा नेता बना दें, मुझे सबसे बड़ा सत्ता पद दें, मुझे सबसे बड़ा प्रशासनिक अधिकारी बना दें, मुझे मनाली में भवन दें, लिमोजिन दें, मेरे बच्चों को विदेशों में सेटल करें, आदि आदि.! आराध्य देव/देवी परम् पिता और जगतमाता हैं। इन दोनों परिस्थिति को अपने ऊपर लागू कर के सोचें। यदि आप माता पिता हैं और आपके बच्चे जब...

सनातन धर्म

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कथित स्वतंत्रता प्राप्ति के साथ ही हमारे शिक्षा व्यवस्था में ही चूक रहा है कि हमारे पाठ्यक्रम में हमारे सनातनी विरासत को सम्मिलित/समाहित नहीं किया गया। वामियों, लिब्राण्डों, कांगियों ने जैसा कल्पित कहानी इतिहास के पुस्तकों में पढ़ाया, हमने उसे ही प्रामाणिक मान लिया। और इन सनातन द्रोही गैंग ने कहा कि विधर्मी म्लेच्छों के आर्यावर्त में आक्रमण कर आने से पूर्व यहाँ एक "सूई" भी नहीं बनता था। उस द्रोही गैंग से प्रश्न है कि यह भी बताओ कि इस शिला-सुन्दरी के समान कोई निर्माण समकालीन विधर्मी म्लेच्छों के देश में एक भी है क्या.?? यदि नहीं है तो उसने ऐसा निर्माण अपने देश में क्यों नहीं किया.?? कभी एकांत में अवश्य ही चिंतन करें कि क्या कोई दस्यू गैंग जो समृद्धि को लूटने ही आया हो वह कोई सकारात्मक निर्माण कर सकता है क्या?? ये सनातनी शिल्पकार के कला निपुण हाथों का चमत्कार है जो यह पाषण शिला भी जीवन्त हो मधुर स्वर-लहरियों को सहस्रों वर्ष उपरान्त आज भी सुना रहा है। यह शिला-सुन्दरी चोल शासकों द्वारा निर्मित मन्दिर में स्थित है जिसे विजयनगर साम्राज्य के काल में निर्मित किया गया है। ध्यान रखें, व...

सनातन धर्म

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दुर्भाग्य का स्मारक...........!?! (फतेहपुर सीकरी) फतेहपुर सीकरी का यह विशाल किला "सकरवार क्षत्रिय राजाओं" का था। बर्बर म्लेच्छ विधर्मी आक्रांता बाबर के हमलों से षड्यंत्र द्वारा पराजित होने के पश्चात ये पूर्व की ओर प्रस्थान कर गए। आज भी बड़ी संख्या में बिहार के विभिन्न स्थानों पर सकरवार राजपूत व भूमिहार पाये जाते हैं। यहाँ सनातन की कलाकृतियों का अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है। जो विधर्मी केवल विध्वंस जानता है, उन मुगलों ने अधिकार करने के पश्चात उसमें कुछ निर्माण तो नहीं किया अपितु जो देवी देवताओं की मूर्तियाँ थीं सब नष्ट कर दिया। किले के अंदर मस्जिद, मजार का निर्माण जो किया गया है उसमें अंतर आज भी स्पष्ट दिखाई देता है। कई स्थानों पर श्री हनुमान जी का चित्र अब भी मिलता है ध्यान से देखने पर बहुत से देवताओं की मूर्तियां झलकती है। यहीं बगल में खानवा का युद्ध "महाराणा सांगा" व बाबर के बीच हुआ था। विजेता राणा सांगा का साम्राज्य अफगानिस्तान से गुजरात मालवा क्षेत्र तक फैला था। सीकरी गढ़ के बगल में ही खानवा पहाड़ पर विजय स्तम्भ के रूप में महान "राणा सांगा" का स्मारक गर...