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Showing posts from July, 2024

सनातन धर्म और हम

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भगवान शिव के रूद्रावतार आञ्जनेय महावीर स्वामी जी हैं। सभी मन्दिरों में भगवान महावीर जी की प्रतिमा पाँव पर खड़ी मिलती हैं। (कुछ अपवाद हैं जहाँ बजरंगबली शयन मुद्रा में भी हैं।) किन्तु एक अनूठा दुर्लभ मन्दिर जहाँ भगवान महावीर जी सिर के बल उल्टे खड़े हैं। सम्भवतः यह सम्पूर्ण विश्व का एकमात्र मन्दिर है जिसमें भगवान बजरंगबली का विग्रह सिर के बल उल्टा खड़े हैं। यह अद्वितीय प्राचीन महावीर मन्दिर साँवेर गाँव, मध्यप्रदेश में स्थित है जो इंदौर से लगभग २५ मील की दूरी पर है। उल्टे महावीर स्वामी जी के बारे में एक पौराणिक कथा है कि.. जब त्रेतायुग में प्रभु श्री राम जी का युद्ध दशानन रावण से हो रहा था तो अहिरावण ने अपना वेश बदलकर श्री राम की सेना में मिल गया। यह उसकी एक चाल थी। उसने अपने षड्यंत्र के अनुसार जब श्री राम और भ्राता लक्ष्मण सो रहे थे तो उन्हें मूर्छित कर उनका अपहरण कर लिया। अहिरावण उन दोनों को अपने साथ पाताल लोक में ले गया। प्रातः काल उन दोनों को शिविर में अनुपस्थित देख समस्त वानर सेना में हाहाकार मच गया। अन्ततः बजरंगबली ने पाताल लोक में श्री राम और लक्ष्मण का पता लगाकर अपने पुत्र मकरध्वज की ...

सनातन धर्म और हम

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भारतीय इतिहास के पुस्तकों में वामपंथी इतिहासकार ने बर्बर मुग़ल आक्रांताओं के पाप को छुपाने के लिए उसका बहुत बड़ाई लिखा है, किन्तु........ सनातनी पराक्रमी महावीर विद्याधर चंदेल ने विधर्मी महमूद गजनवी को पराजित कर उसका नाक भूमि पर रगड़वाया था, यह शौर्य गाथा लिखने में स्याही कम पड़ गया था। देवाधिदेव महादेव का एक नाम "कंदर्पी" भी है। सम्राट विद्याधर चंदेल भगवान शिव के उपासक थे। अतः उन्होंने महमूद गजनवी को पराजित करने के उपरांत अपने शौर्य की गौरव गाथा को लिखने के लिए एक भव्य मन्दिर का निर्माण करवाया।  इस मन्दिर को भगवान शिव के"कंदर्पी" नाम पर ही कंदरिया महादेव मन्दिर रखा गया। श्री कंदरिया महादेव मन्दिर भगवान शिव को समर्पित है। यह आर्यावर्त का पहला मन्दिर है जो आक्रांता मुगलों को पराजित कर विजय के उल्लास में बनाया गया है। श्री कंदरिया महादेव मन्दिर का निर्माण लगभग १००० ई. में किया गया है। यह मन्दिर १०९ फीट लम्बा, ६० फीट चौड़ा और ११६ फीट ऊँचा है। श्री कंदरिया महादेव मन्दिर आर्यावर्त के प्रमुख भव्य मन्दिरों में से एक है। श्रेष्ठ वास्तुकला से निर्मित यह मन्दिर प्राचीन वैदिक सनातन...

सनातन धर्म और हम

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गुजरात के ज्योतिर्लिंग सोमनाथ महादेव की ख्याति विश्व प्रसिद्ध है। किन्तु गुजरात में ही एक अन्य मन्दिर अपने भव्यता और सौंदर्य के लिए अद्वितीय है। यह श्री हठीसिंह जैन मन्दिर, अहमदाबाद, गुजरात में स्थित है। श्री हठीसिंह जैन मन्दिर पन्द्रहवें जैन तीर्थंकर भगवान धर्मनाथ को समर्पित है। श्री हठीसिंह जैन मन्दिर का निर्माण सेठ हठीसिंह केसरसिंह ने १८४८ ई. में आरम्भ करवाया था। उनका अपने आराध्य देव के लिए एक भव्य मन्दिर निर्माण की योजना थी। दुर्भाग्यवश, जैन मन्दिर का निर्माण पूर्ण होने के पूर्व ही उनकी असामयिक मृत्यु हो गई, और मन्दिर निर्माण बाधित हो गया। तदोपरांत उनकी पत्नी ने आगे बढ़कर अपने पति के इस स्वप्न को साकार किया और मन्दिर निर्माण पूर्ण हुआ। यह एक अद्भुत मन्दिर है जो उत्कृष्ट वास्तुशिल्प का उदाहरण है। वैभवशाली सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म और हम

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समस्त स्वर परमपिता परमेश्वर शिव से ही उत्पन्न हैं। स्वर ही ईश्वर हैं। और स्वर नाद के ही पर्याय हैं। नाद देवाधिदेव महादेव के डमरू से उत्पन्न हैं। प्रकृति के सभी स्पंदन भगवान शिव के नृत्य से ही संचालित/नियंत्रित हैं। भगवान शिव का एक अद्भुत, अद्वितीय नृत्य प्रतिमा...!!! यह शिव प्रतिमा बादामी गुफा (cave - 1) कर्नाटक के प्रवेश द्वार पर ही निर्मित हैं। (चित्र - साभार) यह भगवान शिव का अतिभङ्ग मुद्रा अष्टादश भुजी हैं। भगवान शिव के सभी अष्टादश भुजाएँ अस्त्र, शस्त्र, वाद्य यंत्रों से सुसज्जित हैं। भगवान शिव के हाथों में त्रिशूल, पाश, डमरू, मृदंगम, नाग इत्यादि शोभायमान हैं। भगवान शिव अपने अनुपम नृत्य मुद्रा में दिव्य अलौकिक ऊर्जा बिखेर रहे हैं जिनसे ये सम्पूर्ण जगत चलायमान है। यहाँ भगवान शिव का मुखमंडल परम् शान्ति लिए हुए हैं। नन्दी महाराज और श्री गणपति भईया इस दुर्लभ दृश्य के आनन्द का रसपान कर रहे हैं। शिव गण वाद्य यंत्रों पर थाप दे रहे हैं। एक अद्वितीय "आदियोगी" के रूप में परमपिता देवाधिदेव महादेव का यह रूप भक्तों को आकर्षित कर रहे हैं। दुर्लभतम सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय म...