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सनातन धर्म और हम

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आर्यावर्त में जिस ओर भी पग बढ़ाएँगे उस ओर सनातन संस्कृति के विस्मयकारी पाषाण शिल्प दृष्टिगोचर होते रहेंगे। इन पाषाण शिल्प का साक्षात्कार आपको एक पृथक लोक में विचरण कराते हैं। इनका दृश्यावलोकन आपके रोम रोम में दिव्य ऊर्जा का संचार करते हैं। ये आपको रोमांचित कर देते हैं। तीर्थंकर चन्द्रनाथ जी की एक अतुलनीय विशालकाय प्रतिमा मंदारगिरि पहाड़ी की चोटी पर तुमकुर, कर्नाटक में स्थित हैं। तीर्थंकर चन्द्रनाथ जी की प्रतिमा इक्कीस मीटर ऊँची हैं। इस पहाड़ी पर कलात्मक ४३५ पग सीढ़ी के बने हुए हैं।   पहाड़ी की चोटी पर चार भव्य मन्दिर बने हुए हैं। इन चार मन्दिरों में दो मन्दिर बारहवीं शताब्दी का तथा अन्य दो चौदहवीं शताब्दी का बना हुआ है। जैन मताबलम्बियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण और दर्शनीय स्थल है। वैभवपूर्ण सनातन धरोहर...!! जय जिनेन्द्र🙏🌺 जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म और हम

वामपंथी कितना अधम, कितना नीच, कितना घृणित होता है इसके लिए किसी को अब कोई प्रमाण की आवश्यकता ही नहीं होता है। यह तो पूर्व प्रमाणित सत्य है। किन्तु आर्यावर्त के वामियों की निकृष्टता तो "लज्जा को भी लज्जित" कर देता है। किसी भी राष्ट्र के निर्माण में यह अनिवार्य होता है कि वे अपने वर्तमान के अतीत से शिक्षा लेकर ही भविष्य के वर्तमान का निर्माण करें तो वे सदैव उन्नति के पथ पर चलायमान रहते हैं। दुर्भाग्यवश आर्यावर्त के कथित इतिहासकार वैश्विक वामपंथी षड्यंत्र में लिप्त होकर यहाँ के गौरवशाली इतिहास को ही मटियामेट कर दिया और यह भी प्रयास किया की लोग वास्तविक इतिहास से कभी परिचित नहीं हो पाए। परन्तु सत्य को कोई छुपा सकता है क्या.? सत्य को कभी भी समाप्त नहीं किया जा सकता है। विश्व के सात आश्चर्य में अत्यंत ही विषम परिस्थिति में एक मात्र तेजोमहालय को स्थान मिला। जबकि आर्यावर्त में तो हर ओर आश्चर्य ही आश्चर्य बिखरा पड़ा है। संलग्न छाया चित्र मालादेवी जैन मन्दिर, ग्यारसपुर, विदिशा, मध्यप्रदेश के मार्ग में बने हिंडोला तोरण द्वार का है। चित्र को zoom करके देखें तो पाएँगे की इसमें श्री हरि विष...