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Showing posts from February, 2024

सनातन धर्म और हम

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हमारे सनातनी पूर्वजों की सृजनशीलता किसी भी अन्य सभ्यता से अतुलनीय ही रहा है। सनातनी हाथों ने जो कुछ भी रच डाला है वह आज भी कल्पनातीत ही है। यहां तक कि उस सृजन में प्रयोग किए गए तकनीकों से भी आज का आधुनिक विश्व और आधुनिक विज्ञान अनभिज्ञ ही है। उनके सृजन में उपयुक्त यंत्र और विधि आज तक भी रहस्य के गर्भ में छुपे हुए हैं। चलिए देखिए इन अद्भुत चित्रों को....... (चित्र साभार) जैसा कि वामियों, कांगियों, लहरू के चरण-चाटूकारों ने लुगदी उपन्यास (इतिहास) में लिख कर संसार को बताया था कि आर्यावर्त के निवासी सँपेरे, असभ्य जंगली थे.. तो "उनाकोटी" के रघुनंदन पहाड़ों पर (त्रिपुरा में) यह नयनाभिरामी, अद्वितीय, अद्भुत शिल्प किसने बनाया?? क्योंकि जिस काल में यह बनाया गया था उस समय ईसा-मूसा का जन्म भी नहीं हुआ था। उस काल में "उजला, हरा, पीला, नीला" गैंग का कोई अस्तित्व ही नहीं था। सभी पहाड़ आदि देव शिव, श्री गणेश, श्री विष्णु, माँ भवानी आदि आराध्य देव/देवी के मूर्तियों से भरे पड़े हैं। यह धर्मनगर का महत्वपूर्ण तीर्थ व पर्यटन स्थल है। वैसे "उनाकोटी" का अर्थ है (कोटि = करोड़) ...

सनातन धर्म

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देवाधिदेव महादेव के अधिकांश शिवालयों में प्रभु को शिवलिङ्ग के रूप में ही पूजन किया जाता है। माँ पार्वती का या तो पृथक मन्दिर होता है या फिर उसी शिवालय में पृथक विग्रह रूप में पूजन किया जाता है। परंतु परमपिता महादेव का संभवतः यह एक मात्र शिवालय पूजन स्थल है जहाँ उन्हें संयुक्त - विग्रह "हर-गौरी" के रूप में पूजा जाता है। यह वेलपुर, नजीमाबाद , तेलंगाना में है, जिसे यादव राजाओं ने तेरहवीं शताब्दी में बनवाया है इसे स्थानीय लोगों के द्वारा "अर्धनारी-नटेश्वर" कहा जाता है। इसमें श्री उमा-महेश्वर के संयुक्त विग्रह हैं। (चित्र - साभार) सनातनी शिल्पकार ने अपनी सम्पूर्ण कला निपुणता पारंगतता उत्कृष्टता को इसके निर्माण में उड़ेल दिया है। ध्यान से इनके मुखमंडल, अंगविन्यास, वस्त्र, आभूषण, आयुध, मुकुट, तोरण आदि को देखने पर कला उत्कृष्टता संपूर्णता को देखा जा सकता है। यह अतुलनीय शिल्प कला का एक आदर्श उदाहरण है। शिव भक्त के लिए यह अत्यंत लोकप्रिय पूजन और दर्शनीय स्थल है। अद्वितीय सनातन धरोहर...!! ॐ नमः परम् शिवाय 🚩 जय सनातन धर्म 🙏🚩 जय माँ भगवती भवानी 🙏🌺 जय महाकाल🙏🔱🚩 #प्रेमझा ...

सनातन धर्म

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दासता दो प्रकार की होती है। १. शारीरिक दासता और २. मानसिक दासता। व्यक्ति शारीरिक दासता में विवशता में अपने ऊपर शासन करने वाले का सभी आदेश भले ही मानता है पर भीतर एक अकुलाहट, एक छटपटाहट, एक व्यग्रता होती है कि किसी भी प्रकार से इस दासता की बेड़ियों से मुक्त होना है। और वह व्यक्ति इस मुक्ति हेतु तब तक प्रयत्नशील रहता है जब तक कि वह दासता से मुक्त नहीं हो जाता। जबकि मानसिक दासता में व्यक्ति इस दासता को मन से स्वीकार कर इसे ही अपनी नियति मान लेता है। इसी दासता में रस लेने लगता है। मुक्ति की बात नहीं सोचता। यहां तक कि "स्टॉकहॉम सिंड्रॉम" से ग्रसित हो दासता में ही प्रसन्नता ढूंढ़ लेता है। सिकुलर हिनुओं का भी यही हाल है। उसने भी पराधीन रहते हुए "मानसिक दासता" स्वीकार कर लिया। यह सिकुलर समुदाय शुद्धतावादी सनातनी संस्कार को त्याग कर सुविधावादी हिनू हो कर रह गया। इस समुदाय को हर बात में पश्चिम के लोगों का प्रमाणपत्र चाहिए होता है जिससे यह किसी भी बात को प्रमाणित कर सके। नीचे दिए चित्रों में चित्र १ को अधिकांश लोग जानते भी नहीं होंगे जबकि चित्र २ विश्व विख्यात है। (चित्र - साभ...

सनातन धर्म

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भले ही आज इस नीरव स्थल पर कोई शिव भक्त नहीं आता हो.... भले ही आज यहां पञ्चाक्षरी मंत्र व श्रीरुद्राष्टम का पाठ नहीं गूंजता हो.... भले ही आज यहां घंटे-घड़ियाल, शङ्ख, करताल, नगाड़े की ध्वनि नहीं सुनाई दे.... फिर भी..... इस खंडहर में भी आदिदेव महादेव अपनी छवियों को बिखेरे हुए हैं। (चित्र - साभार) अतिप्राचीन अद्भुत शिवलिंग चिर प्रतीक्षा में अपने नंदी महाराज के साथ। शिमोगा, कर्नाटक। महान सनातन धरोहर...!! ॐ नमः परम् शिवाय 🚩 जय सनातन धर्म 🙏🚩 जय महाकाल🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म

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मात्र ताजमहल और कुतुबमीनार पर ही अपनी जिज्ञासा को मत रोकें क्योंकि वामियों ने इन दोनों वास्तुशिल्प के तेजोमहालय और विष्णुस्तम्भ के रूप में मान्यता को ही समाप्त कर दिया है। सनातन संस्कृति के अमूल्य धरोहर को सहेज कर रखने वाले भग्नावशेषों देखना है तो हम्पी, कर्नाटक में देखें.!! (चित्र-साभार) हम्पी महान विजयनगर साम्राज्य की राजधानी रही है। मध्यकालीन युग में विश्व के सबसे विशाल नगर और आर्यावर्त का सबसे समृद्धशाली नगर का गौरव इसे प्राप्त रहा है। विजयनगर साम्राज्य के नरेशों के लिए सनातन धर्म का स्थान सर्वोपरि रहा था। उन्होंने सनातनी मन्दिरों और धर्मस्थलों की विस्तृत श्रृंखला का निर्माण किया था। किन्तु, जैसा कि आर्यावर्त के अधिकांश भाग में सनातनी मन्दिरों और धर्मस्थलों के साथ हुआ है। विधर्मी म्लेच्छ आक्रांताओं ने इस नगर को नष्ट-भ्रष्ट और ध्वस्त कर दिया। आज भी भग्नावशेषों में उस गौरवशाली इतिहास की विजयगाथा सुना जा सकता है। गौरवपूर्ण सनातन धरोहर जो विधर्मियों की गहरी घृणा और शत्रुता की भेंट चढ़ गया.!! सनातनी पूर्वजों के परिश्रम, समर्पण और वास्तुशास्त्र के ज्ञान को नमन। जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल...

सनातन धर्म

कुछ दिनों से हर पटल पर हर बात पर कथित हिंसा के विरोधी "अहिंसा-वादी" लेखों की भरमार हो गई है। क्या हिंसा केवल बड़े पशुओं संग हुए हिंसा को ही माना जाना चाहिए.?? क्या unicellular/multicellular व कीट पतंग के साथ हुई हिंसा को हिंसा नहीं कहा जाएगा.?? ये जितने भी लेख लिखे गए हैं वे अधिकांश aves & mammals (पक्षी व स्तनधारी पशु) के ऊपर हुए हिंसा को ही ध्यान में रखकर लिखा गया है। उन सभी कथित "अहिंसा-वादी" से यही जानना है कि क्या वे सभी अपने जीवन में कभी "सिल्क/रेशम/तसर" से बने हुए वस्त्र धारण किए हैं या नहीं.?? यदि हां.!! तो फिर क्या उन्होंने रेशम उत्पादन की प्रक्रिया को कभी जानने का प्रयास किया है.?? वे यदि जीव के प्रति इतना ही दयालुता का भाव रखते हैं तो सबसे पहले सिल्क उत्पादन का ही विरोध करना चाहिए.! क्योंकि किसी निरीह प्राणी के साथ जितनी क्रूरता सिल्क उत्पादन में किया जाता है और किसी में नहीं होता है। यदि वे ऐसा नहीं करते तो यह सेलेक्टिव "हिंसा" का विरोधी होना एक दिखावा है, भ्रम है, पाखंड है, और कुछ नहीं.!! आप सभी भी एक बार कोकून से सिल्क उत्पादन ह...