सनातन धर्म और हम
नवरात्र चार होते हैं.... १ वासंती नवरात्र - चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से इसमें माँ दुर्गा के नौ रूपों की आराधना होती है। २. ग्रीष्म नवरात्र - इसे गुप्त नवरात्रि भी कहा जाता है। यह आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा तिथि से आरम्भ होता है और इसमें दस महाविद्या साधना किया जाता है। ३.शारदीय नवरात्र - यह आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि से आरम्भ होता है और नौ दुर्गा का आराधना करते हैं। ४. शिशिर नवरात्र - यह भी गुप्त नवरात्रि पर्व है। यह माघ शुक्ल प्रतिपदा तिथि से आरम्भ होता है और दस महाविद्या साधना किया जाता है। सनातनी पूर्वजों द्वारा देवी/देवों के अनेकानेक प्रतिमाएं भिन्न भिन्न भाव भंगिमाओं में देवालयों, मन्दिरों, धार्मिक स्थलों आदि पर बड़े ही मनमोहक रूप में गढ़े गए हैं। माँ भगवती महिषासुरमर्दिनी की इस अनुपम प्रतिमा को ही देखें.! (चित्र – साभार) माँ अम्बे की यह षोडशभुजी प्रतिमा "रानी की बाव" पाटन, गुजरात में स्थित है। रानी की बाव गुजरात में पवित्र सरस्वती नदी के तट पर ग्यारहवीं शताब्दी में निर्मित किया गया था जो एक राजा के स्मारक के रूप में बनाया गया था। बाव या बावड़ी आर्यावर्त भरतखण्ड भूमि का भूमिगत जल ...