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Showing posts from April, 2024

सनातन धर्म और हम

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सनातनी पूर्वजों के लिए धर्म का स्थान सर्वोपरि रहा था। अपने आराध्य देव के प्रति आस्था और समर्पण उच्चतम स्तर पर होने से ऐसा अकल्पनीय शिल्प का निर्माण सम्भव हो पाया। ये मूर्ति श्री चेन्नाकेशव मन्दिर में स्थित हैं। बेलूर, हसन जनपद, कर्नाटक। (चित्र – साभार) चेन्ना केशव का शाब्दिक अर्थ है "सुन्दर केशव" अर्थात सुन्दर विष्णु/नारायण। चेन्नाकेशव मन्दिर की स्थापना का श्रेय होयसल नरेश विष्णुवर्धन को जाता है जिन्होंने १११६ ई. में चोलों पर अपनी जीत के उपलक्ष्य में इसका निर्माण कराया था। चेन्नाकेशव मन्दिर का निर्माण होयसल साम्राज्य की प्रारंभिक राजधानी बेलूर में यागाची नदी के तट पर किया गया था। चेन्नाकेशव मन्दिर को केशव मन्दिर या बेलूर का विजयनारायण मन्दिर भी कहा जाता है। Zoom करके देखने पर इसमें कोई भी १" ईंच का भाग भी बिना नक्काशी के नहीं है। ध्यान रहे... यह सम्पूर्ण निर्माण बिना किसी विद्युत चालित यंत्रों के स्वहाथों से ही किया गया है। उस लुप्त पाषाण वास्तुशिल्प विधा के बारे में सोचकर ही मन पुलकित हो जता है, रोमांच से भर जाता है। किन्तु दुर्भाग्य से विधर्मियों ने उन दिव्य ज्ञान से प...

सनातन धर्म और हम

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इस चित्र में जो "स्वर्ण पट्टिका" यहाँ सङ्लग्न है यह कोई सामान्य पट्टिका नहीं है। यह अपने आप में दैवीय विशिष्टता समहित किए हुए है। यह भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी के द्वारा देव कोषागार के अधिपति श्री कुबेर देव को प्रेषित पत्रक है। मान्यता है कि भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी और देवी पद्मावती के परिणय कार्यक्रम में व्यय हेतु धन के आग्रह निमित्त यह प्रपत्र देव कोषागार के अधिपति श्री कुबेर देव को प्रेषित किया गया था। इस प्रपत्र में विवाह कार्यक्रम में व्यय हेतु १,४०,००,००० (एक कोटि चालीस लाख) देव-मुद्रा का आग्रह वर्णित है। यह पट्टिका आज भी श्री वाराह स्वामी पादपीठ, तिरुपति में संरक्षित है। पुरोहित गण पूर्ण श्रद्धा से इस पत्रक का आज भी पूजन अर्जन करते हैं। अद्भुत सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म 🙏🚩 जय श्री हरि नारायण विष्णु 🙏🌺 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म और हम

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परमपिता देवाधिदेव महादेव के शिवालय में शिवलिङ्गम के सामने से भगवान शिव के गण नन्दी महाराज ही अनुपस्थित रहें ऐसा कोई कल्पना कर सकते हैं क्या.?? सामान्य रूप में ऐसा सम्भव नहीं है। किन्तु आर्यावर्त में एक ऐसा शिव मन्दिर है जहाँ नन्दी महाराज अनुपस्थित हैं। और इसके पीछे एक अद्भुत सनातनी ऐतिहासिक कथा है। (वेद/पुराण) उपनिषद में लिखा एक एक शब्द मिथक नहीं सनातनी इतिहास है) दक्ष प्रजापति के कन्या का विवाह भगवान शिव के साथ सम्पन्न हुआ था। परन्तु जब भगवान शिव दक्ष प्रजापति के चरण स्पर्श नहीं किए तो दक्ष प्रजापति इसे अपना अपमान समझ बैठे थे। इससे वे अप्रसन्न थे। जब दक्ष प्रजापति ने यज्ञ का आयोजन किया तो सभी देवताओं, ऋषियों आदि को तो आमंत्रित किया परन्तु भगवान शिव व माता सती को निमंत्रण पत्र नहीं भेजा गया। माता सती अपने पति की इच्छा की अवहेलना कर नन्दी महाराज पर सवार होकर अपने पिता के घर यज्ञ स्थल पर गईं। (भगवान शिव ने माता सती को यज्ञ में जाने से रोका था) किन्तु वहाँ पिता दक्ष प्रजापति और कुछ कुपात्र लोगों द्वारा अपने पति शिव के होते अपमान को सहन नहीं कर पाईं। यज्ञ स्थल पर ही देवी सती ने योगाग्नि मे...

सनातन धर्म और हम

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श्री वेंकटेश्वर स्वामी मन्दिर - द्वारका तिरुमला - चिन्ना तिरुपति.!!! श्री वेंकटेश्वर स्वामी मन्दिर, पश्चिमी गोदावरी जिला, आन्ध्र प्रदेश में शेषाचलम पहाड़ी पर स्थित हैं। (सभी चित्र साभार) भगवान श्री हरि नारायण विष्णु श्री वेंकटेश्वर स्वामी के रूप में यहाँ स्थित हैं। श्री वेंकटेश्वर स्वामी के स्वयंभू विग्रह को द्वारका नामक सन्त ने ढूंढा था इसलिए इन्हें द्वारका तिरुमला कहा जाता है। इन्हें चिन्ना तिरुपति भी कहा जाता है। प्रभु के विग्रह कटि प्रदेश से ऊपर ही दिखाई देते हैं, क्योंकि निचले भाग की कल्पना भूगर्भ में है। इनके पवित्र चरणों को पाताल लोक के चक्रवर्ती बलि के दैनिक पूजन के लिए समर्पित किया गया है। मुख्य विग्रह के पार्श्व में भगवान श्री वेंकटेश्वर का पूर्ण आकर के विग्रह हैं। यह पूर्ण आकर का विग्रह श्री रामानुजाचार्य जी के द्वारा स्थापित किये गए हैं। अर्थमण्डप में देवी पद्मावती और नांचारी कि मूर्तियाँ हैं। यह मन्दिर सनातन वास्तुकला की एक अनुपम कृति है। इसमें पञ्च-मंजिला मुख्य गोपुरम तथा तीन अन्य गोपुरम हैं। इसमें श्री अञ्जनेय, श्री कार्तिकेय, श्री गोविन्द कृष्ण आदि की मूर्तियाँ हैं। वैभव...

सनातन धर्म और हम

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शिल्पकला, मूर्तिकला, और वास्तुकला में कुछ अतुलनीय, अकल्पनीय देखना चाहते हैं तो आर्यावर्त में सनातनी मन्दिरों का दर्शन करने जाएं.!! समस्त विश्व में भी ऐसा निर्माण कार्य आपको दूसरा देखने को नहीं मिल सकता है। श्री नटराज मन्दिर, चिदम्बरम, तमिलनाडु.! (सभी चित्र – साभार) श्री नटराज मन्दिर देवाधिदेव शिव को समर्पित अद्भुत अनुठा वास्तुशिल्प का उदाहरण है। चिदम्बरम मन्दिर शिव को समर्पित पञ्च-भूत स्थलों के प्रतिनिधिक पाँच पवित्र मंदिरों में से एक है। ये सभी हैं :- चिदम्बरम प्रतिनिधित्व - आकाश!! तिरुवन्नामलाई कालाहस्ती प्रतिनिधित्व - वायु!! तिरुवन्नामलाई अरुणाचलेश्वर प्रतिनिधित्व - अग्नि!! तिरुवनैकवल जम्बुकेश्वरर प्रतिनिधित्व - जल!! काँची एकम्बरेश्वर प्रतिनिधित्व - पृथ्वी!! चिदम्बरम मन्दिर अतिप्राचीन तथा पौराणिक महत्व के विशिष्ट मन्दिर हैं। इस मन्दिर में देवाधिदेव शिव "नटराज" के रूप में और गोविन्दराज "पेरुमल स्वामी" के रूप में पूजे जाते हैं। यह मन्दिर "शैव" और "वैष्णव" दोनों मतावलंबियों के लिए समान रूप में पूज्यनीय हैं। मान्यता है कि इस मन्दिर को सर्वप्रथम शि...

सनातन धर्म और हम

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सनातन धर्म संस्कृति के गूढ़ रहस्यों को अनावृत करना आज के आधुनिक विज्ञानियों के लिए असम्भव ही प्रतीत होता है। अनेक अबूझ पहेली हैं जो आधुनिक विज्ञानियों को चकित कर रहे हैं। ऐसा ही एक रहस्यमयी श्री अचलेश्वर महादेव मन्दिर हैं। यह मन्दिर धोलपुर, राजस्थान में स्थित हैं। (चित्र – साभार) श्री अचलेश्वर महादेव मन्दिर भारतवर्ष के सबसे पुरातन मन्दिरों में से एक हैं। इसके इतिहास ढाई सहस्र वर्षों से अधिक पुरातन हैं। इस मन्दिर के रहस्यमय शिवलिङ्गम का रङ्ग दिन में तीन बार प्रवर्तित हो जाता है। इस शिवलिङ्गम का रङ्ग प्रातः काल में लाल, मध्याह्न में केशरिया व संध्या काल में श्याम (काला) हो जाता है। समय के साथ इनके स्थिति में भी कुछ परिवर्तन होते हैं। इनके निर्माण कर्ता के पाषाण ज्ञान की कल्पना मात्र से रोमांस अनुभव होता है। ध्यान रखें सनातनियों के मन्दिर केवल आराधना पूजन स्थल ही नहीं थे बल्कि अनुसंधान के उच्च केन्द्र थे। अतुलनीय सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म और हम

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जो लोग कहते हैं कि विश्व में केवल ७ आश्चर्य(WONDERS) हैं वो सम्पूर्ण आर्यावर्त में निर्मित सनातन मन्दिरों, महलों, भवनों, स्मारकों इत्यादि को समग्रता में देखा ही नहीं है। नहीं तो ७०००००००००००००००००००००००००१ आश्चर्य तो आर्यावर्त में ही मिल जाएंगे। ये श्री सुब्रमण्यम स्वामी मन्दिर, मरुधमलाई, कोयम्बटूर हैं। (चित्र – साभार) Zoom करके देखने पर इसमें विस्मयकारी मूर्ति कला का दर्शन होता है। कितना श्रमसाध्य रहा होगा इतनी सूक्ष्मता से मूर्तियों का जीवंत निर्माण.!!! निर्माण कार्य तो दूसरे या तीसरे चरण में आरम्भ किया जाता है।  सबसे पहले तो इस मन्दिर के प्रारूप की जिसने परिकल्पना की होगी उसके मानसिक और बौद्धिक क्षमता के उत्कृष्टता का अनुमान लगाएं.! कितने उच्च स्तर का यह शिल्पकला और स्थापत्य कला का आदर्श उदहारण है। आज विज्ञान इतना आधुनिक और विकसित हो गया है तो भी इसकी प्रतिकृति बनाना असम्भव सा प्रतीत होता है। सनातनी पूर्वजों के विलक्षण प्रतिभा और कला की निपुणता पर गर्व है। अतुलनीय सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म 🙏🚩 जय षण्मुख स्कन्द कार्तिकेय स्वामी 🙏🌺 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा ...