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सनातन धर्म

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शाखाओं के कटने से जड़ नहीं समाप्त होते हैं। और सनातन धर्म के जड़ तो सम्पूर्ण जगत में विस्तारित हैं। इन्हें मिटाने के सभी प्रयास असफल ही होंगे और एक दिन पुनः यह विश्व के समक्ष प्रस्तुत हो जाएँगे। वर्ष १९८५ में आकस्मात एक उत्खनन में सनातन धर्म के कुछ चिह्न मिलने पर वहाँ पर विस्तृत खुदाई किया गया। इस उत्खनन में उन्हें चौथी - नवीं शताब्दी के मध्य का सनातन संस्कृति के अस्तित्व के साक्ष्य प्राप्त हुए। यहाँ शैव परम्परा के प्राचीन प्रमाण प्राप्त हुए। यहाँ दक्षिण पूर्व एशिया के विशालतम पाषाण शिवलिङ्ग प्राप्त हुए हैं। (चित्र-साभार) यह २.२६ मीटर का शिवलिङ्ग वियतनाम के हो-ची-मिन्ह नगर से १५० कि.मी. दूर "कैट ट्येन" पुरातात्विक स्थल पर खुदाई में मिला है। ज्ञात हो कि वियतनाम भी प्राचीन काल में शैव परम्परा में सनातन धर्म का ही देश रहा है। सनातन धर्म के सत्य को कहाँ तक छुपाओगे, जहाँ भी हाथ लगाओगे सनातन धर्म के साक्ष्य ही पाओगे। अतुलनीय सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

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वामी, कामी और लहरू गैंग के निकृष्ट दोपाया पशुओं ने आर्यावर्त को सँपेरों, असभ्य जंगलियों का देश प्रमाणित करने का हर सम्भव प्रयास किया। परन्तु सत्य तो धरती-आकाश को भी चीर कर प्रकट होने का सामर्थ्य रखता है। उन्हें बता दें कि जब उनके बौद्धिक वृद्ध प्रपितामह वर्णमाला के अक्षर सिख रहे थे..  उस समय हमारे वैदिक सनातन धर्म के पूर्वजों ने अकल्पनीय पाषाण शिल्प कला के साक्षात प्रमाण निर्माण कर हम सनातनी वंशजों के लिए विरासत में छोड़ गए हैं। जिन पर हमें अभिमान, घमंड, गर्व है। ये निकृष्ट पशु कहते हैं कि नारी का सनातन संस्कृति में सम्मान नहीं था। अरे मूढ़.!! नारी सम्मान के इस प्रत्यक्ष प्रमाण को देख।  इस मन्दिर के पाषाण शिल्प में नारी केश-विन्यास के ६० रूपों को पत्थरों पर उकीर्ण किया गया है। सभी मूर्तियाँ जीवन्त प्रतीत होते हैं।  और कोई भी एक मूर्ति दूसरे से नहीं मिलती हैं।  और हाँ, यह निर्माण आज का नहीं सहस्रों वर्ष पूर्व का ही है। यह प्रमाणित करता है कि जिसे आधुनिकता में "FASHION" कहते हैं वह उत्कृष्ट रूप में प्राचीन काल में ही नारी सौंदर्य का सनातन संस्कृति का एक अवयव रहा है। ये स...

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हमारे सनातनी पूर्वजों के लिए धर्म ही सर्वोपरि रहा है इसलिए उन्होंने सबसे अधिक अपने आराध्य देव के मन्दिरों के निर्माण में अपने कला के उत्कृष्टता का प्रदर्शन किए हैं। पन्द्रहवीं शताब्दी में बने हुए इन प्राचीन मन्दिरों को देखने पर दृष्टि हटाने की इच्छा नहीं होती है। (चित्र-साभार) ये विजयनगर, गुजरात, जिसे पोलो फारेस्ट भी कहते हैं में स्थित हैं। इनके वास्तुशिल्प और स्थापत्यकला अतुलनीय हैं। कितना आश्चर्यजनक है कि यह निर्माण सनातनी हाथों से हुआ है। इनके सम्पूर्णता और एकरूपता का कोई अन्य अनुकृति समकालीन विश्व में कहीं भी ढूँढना असम्भव है। यदि कोई वामी/कामी/कांगी/librand कहीं विश्व में इसकी अनुकृति ढूंढ पाए तो अवश्य ही बताना। अकल्पनीय सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म 🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

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ऐसा अकल्पनीय शिल्पकला कि दर्शक अचंभित हो जाएँ। मानव की कल्पना को सनातनी पूर्वजों ने इस उत्कृष्टता से परिपूर्ण किया है जो आज का मानव ऐसा निर्माण करने का सोच भी नहीं सकता है। यह अब ज्ञात नहीं है, ऐसी शिल्पकला व वास्तुकला की कौन सी तकनीक हमारे पूर्वजों के पास थी जिसे हम आज इतना उन्नत होकर भी समझ नहीं पाए हैं। इसकी तुलना व प्रतिकृति निर्माण करना तो विश्व में किसी से भी सम्भव नहीं था। किन्तु लहरू-गैंग तथा वामपंथियों का षड्यंत्र इस महान विरासत पर भारी पड़ा और विश्व क्या स्वयं आर्यावर्त के सभी लोग भी इसके बारे में कम ही जानते हैं। चेन्नाकेशव मन्दिर, सोमनाथपुरा, कर्नाटक। (चित्र - साभार) वैभवपूर्ण सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म 🙏🚩 जय श्री लक्ष्मीनारायण🙏🌺 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

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वही अनादि हैं, वही अनन्त हैं। वही कण कण में व्याप्त हैं। समस्त ब्रह्माण्ड उन्हीं से है और उन्हीं में समाहित है। ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात पूर्णमुदच्यते। पूर्णस्य   पूर्णमादाय   पूर्णमेवावशिष्यते॥ देवाधिदेव महादेव का दुर्लभतम अद्वितीय अघोरमूर्ति शिव विग्रह। श्रीकण्ठेश्वर मन्दिर, नंजनगुड़, कर्नाटक। इस अद्भुत विग्रह में भगवान शिव के ३० हाथों में विभिन्न अस्त्र शस्त्र आयुध सुसज्जित हैं। जब नकारात्मक शक्तियों का अत्यधिक उत्थान हो जाता है तो भगवान शिव अपने संहारक रूप में उन दुष्ट शक्तियों का संहार कर ब्रह्माण्ड में संतुलन स्थापित करते हैं। सम्पूर्ण विग्रह अकल्पनीय शिल्पकला का आदर्श प्रतिकृति हैं। वस्त्र, आभूषण, साज सज्जा जिस उत्कृष्ट रूप में निर्मित है यह शिल्पकार के कर्मठता, निपुणता, प्रवीणता का द्योतक है। वैभवशाली सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

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माँ रक्तबीजनाशिनी, माँ महाकाली के विग्रह अनेक रूपों में प्राप्य हैं। माँ दक्षिणकाली, माँ भद्रकाली, माँ श्मशानकाली आदि..। माँ की यह प्रतिमा दुर्लभ विशिष्टता लिए हुए हैं। इस प्रतिमा में माँ दशमुखी हैं तथा इनके भुजाएँ व पाद दस-दस ही हैं जो इन्हें विलक्षण बनाते हैं। यह प्रतिमा भगवान शिव मन्दिर, तोखा, काठमांडू, नेपाल में स्थापित हैं। माँ के सभी हाथों में आयुद्ध सुसज्जित हैं। माँ मुण्डमाला से शोभायमान हैं। माँ के नेत्रों से करुणा का प्रवाह हो रहा है। दुर्लभतम सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म 🙏🚩 जय माँ महाकाली🙏🌺 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

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बस्तर और दंतेवाड़ा की चर्चा प्रायः समाचारों में रहता है। किन्तु ये समाचार अधिकांशतः विचलित करने वाले ही होते हैं। वैसे बस्तर दंतेवाड़ा का एक सौन्दर्यपूर्ण इतिहास रहा है। नाग शासन काल यहाँ का महत्वपूर्ण कालखण्ड रहा है। इसी नाग शासन में राजमहिषी गङ्गमहादेवी ने यहाँ भव्य शिवालय युग्म बनवाया था। यह मन्दिर निर्माण १२१० ई. में हुआ था। राजमहिषी ने इस दो शिवालयों में एक अपने नाम गङ्गमहादेवी के नाम पर श्री गङ्गाधरेश्वर महादेव मन्दिर व दूसरा अपने पति महाराज सोमेश्वर देव के नाम पर श्री सोमेश्वर महादेव मन्दिर का निर्माण करवाया। यह यहाँ शिलालेख में भी अंकित है। इस शिवालय युग्म को "बत्तीसा मन्दिर" के नाम से जाना जाता है क्योंकि जिस प्रकार सिंहासन बत्तीसी में बत्तीस पुतलियाँ उत्कीर्ण थीं उसी प्रकार इस मन्दिर का मण्डप बत्तीस स्तम्भों पर आधारित है। यह शिवालय युग्म बारसूर, दंतेवाड़ा जनपद, छत्तीसगढ़ में स्थित है। यह शिवालय दो गर्भगृह से युक्त हैं तथा दोनों गर्भगृह में त्रिरथ शैली में निर्मित शिवलिङ्ग स्थापित हैं। इस शिवालय के शिवलिङ्गों को इसकी विशिष्टता अन्य शिवलिङ्ग की तुलना में दुर्लभ बनाती है। ...