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सनातन धर्म और हम

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जिन तथाकथित 'फेमिनिस्ट' & 'वोक्स' /लिब्रांड/वामी/कामी को लगता है कि.... वैदिक सनातन परंपरा में महिलाओं को अधिकार नहीं था। वे इन वास्तु शिल्पों में निर्मित भाव भंगिमाओं को देखें,  उनके ज्ञानचक्षु खुल जाएँगे कि... जितना सम्मान और अधिकार नारी को सनातन परंपरा में रहा... किसी और पन्थ-मजहब में नहीं दिया गया। क्योंकि सनातनी मन्दिरों में उत्कीर्ण ये मूर्तियाँ समसामयिक विषयों और समाजिक जीवन के प्रतिबिंब हैं। परंतु क्या कहें, बात वही है कि "अंधे आगे नाचते कला अकारथ जाय"... जिस प्रकार उल्टे घड़े पर जल डालने से ऊर्जा क्षरण के अतिरिक्त और कुछ प्राप्त नहीं होता उसी प्रकार इन मूढ़मति को कितने ही प्रमाण दे दो ये सुधरने वाले नहीं.!! तो इन अधम को इसके हाल पर छोड़ देना ही श्रेयस्कर होगा.! सनातन धर्म सदा सर्वदा से ही जयतु है और जयतु ही रहेगा.! जय सनातन धर्म 🙏🚩 जय महाकाल 🙏🌺🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म और हम

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एक अद्वितीय अद्भुत शिवलिङ्ग, शङ्कर मठ, थिरुवीडिमृदुर, तंजावुर, तमिलनाडु। ऐसी मान्यता है कि जब आदिशंकराचार्य ने अद्वैत के सत्य को प्रमाणित करना चाहा तब शिवलिंग में से एक हस्त अभय मुद्रा में प्रकट हो गए और  यह वचन कहे, - "सत्यम अद्वैतम"॥ यह वही प्राचीनतम शिवलिङ्ग है। शिवभक्तों की इस शिवलिङ्ग के साथ अनन्य आस्था भक्ति और श्रद्धा है।  शिवभक्त यहाँ दैनिक पूजन आराधना कर अपने परमानंद में होते हैं। महान सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म 🙏🚩 जय महाकाल🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म और हम

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हमारे सनातनी पूर्वजों की सृजनशीलता किसी भी अन्य सभ्यता से अकल्पनीय एवं अतुलनीय ही रहा है। सनातनी हाथों ने जो कुछ भी रच डाला है वह आज भी कल्पनातीत ही है। यहाँ तक कि उस सृजन में प्रयोग किए गए तकनीकों से भी आज का आधुनिक विश्व और आधुनिक विज्ञान अनभिज्ञ ही है। उनके सृजन में उपयुक्त यंत्र और विधि आज तक भी रहस्य के गर्भ में छुपे हुए हैं। चलिए देखिए इन अद्भुत चित्रों को....... (चित्र साभार) जैसा कि वामियों, कांगियों, लहरू के चरण-चाटूकारों ने लुगदी उपन्यास (इतिहास) में लिख कर संसार को बताया था कि आर्यावर्त के निवासी सँपेरे, असभ्य जंगली थे.. तो "उनाकोटी" के रघुनंदन पहाड़ों पर (त्रिपुरा में) यह नयनाभिरामी, अद्वितीय, अद्भुत शिल्प किसने बनाया?? क्योंकि जिस काल में यह बनाया गया था उस समय ईसा-मूसा का जन्म भी नहीं हुआ था। उस काल में "उजला, हरा, पीला, नीला" गैंग का कोई अस्तित्व ही नहीं था। सभी पहाड़ आदि देव शिव, श्री गणेश, श्री विष्णु, माँ भवानी आदि आराध्य देव/देवी के मूर्तियों से भरे पड़े हैं। यह धर्मनगर का महत्वपूर्ण तीर्थ व पर्यटन स्थल है। वैसे "उनाकोटी" का अर्थ है (कोटि =...

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वामियों क्रिस्लामियों ने कैसे हमारे गौरवशाली प्रमाणिक इतिहास से ही हमें दूर कर दिया और इसके दूरगामी दुष्परिणाम  किस प्रकार आज हमारे सनातनी परंपरा संस्कृति को ही अजगर की भांति निगलता जा रहा है इसे देखते ही पीड़ा से मन विचलित हो उठता है। उन्होंने हमारे शिक्षा व्यवस्था पर अधिकार कर लिया और अपने कुटिलता से शिक्षार्थियों के मतिष्क में अपने कुटिल खल कामी विचारों का बीजारोपण करता गया। शनैः शनैः हमारी युवा पीढ़ी के विचारों को ही दूषित कर दिया। आईए एक उदाहरण देखते हैं..... उन्होंने कहा/पढ़ाया कि हमारे सभी ग्रन्थ मात्र पौराणिक कथाएं हैं। इतिहास से इसका कोई संबंध नहीं है। चलो माना कि यदि हमारा इतिहास केवल पौराणिक कथा है तो इन महान धरोहरों को कौन बना कर छोड़ दिए हैं.??? उस काल में तो..... ना लेजर कटर था... ना ही इलेक्ट्रोनिक ड्रिलर मशीन था.... ना ही ऑटोमेटिक रॉक कटर था.... ना कंप्यूटर सॉफ्टवेयर था... और  ना ही कंप्यूटर ग्राफिक डिजाइनर...! तो फिर इसकी परिकल्पना और निर्माण कार्य किन लोगों के द्वारा किए गए थे.?? हमारे पूर्वजों के शिल्प कला के निपुणता को देखिए, कितने कठिन परिश्रम से इस विग्रह...

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किसी राष्ट्र को अंदर से घुन खाए लकड़ी के जैसा निर्बल और नष्ट करना हो तो उसके इतिहास को मटियामेट कर दो। यही सबसे अधिक प्रभावी रणनीति होती है। आर्यावर्त भरतखण्ड के शौर्य पराक्रम भाव को समाप्त करने हेतु सिकुलर/लिब्रांड/वामी/कांगी गैंग ने यही किया। इस गैंग ने इतिहास में इतना मिलावट किया कि उसे गल्प-साहित्य या लुगदी-उपन्यास जैसा बनाकर रख छोड़ा। हमारा वैभवशाली इतिहास यह है कि..... चोलों ने २१०० वर्ष राज किया.! चालुक्यों ने ७०० वर्ष राज किया.! पांड्यों ने ८०० वर्ष राज किया.! सातवाहनों ने ५००वर्ष राज किया.! अहोम राजवंश ने ७०० वर्ष राज किया.! पल्लवों ने ६०० वर्ष राज किया.! चंदेलों ने ४०० वर्ष राज किया.! राष्ट्रकूटों ने ५०० वर्ष राज किया.! मौर्य वंश ने ५५० वर्ष राज किया.! गुप्त वंश ने ४०० वर्ष राज किया.! और विधर्मी मलेच्छ मुगलों ने मात्र २०० वर्ष राज किया.! (सम्पूर्ण देश पर एक साथ इन मलेच्छों का राज मात्र इतना ही रहा है) इसके अतिरिक्त शुंग राजवंश, नंद राजवंश, कुषाण आदि अनेक राजवंशों की बात छोड़ भी दें तो इस सत्य को कोई झुठला नहीं सकता है। पर विडम्बना है कि हमारे (कथित) इतिहास की पुस्तकों में वैभ...

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देवाधिदेव महादेव के अधिकांश शिवालयों में प्रभु को शिवलिङ्ग के रूप में ही पूजन किया जाता है। माँ पार्वती का या तो पृथक मन्दिर होता है या फिर उसी शिवालय में पृथक विग्रह रूप में पूजन किया जाता है। परंतु परमपिता महादेव का संभवतः यह एक मात्र शिवालय पूजन स्थल है जहाँ उन्हें संयुक्त - विग्रह "हर-गौरी" के रूप में पूजा जाता है। यह वेलपुर, निजामाबाद , तेलंगाना में है, जिसे यादव राजाओं ने तेरहवीं शताब्दी में बनवाया है इसे स्थानीय लोगों के द्वारा "अर्धनारी-नटेश्वर" कहा जाता है। इसमें श्री उमा-महेश्वर के संयुक्त विग्रह हैं। (चित्र - साभार) सनातनी शिल्पकार ने अपनी सम्पूर्ण कला निपुणता पारंगतता उत्कृष्टता को इसके निर्माण में उड़ेल दिया है। ध्यान से इनके मुखमंडल, अंगविन्यास, वस्त्र, आभूषण, आयुध, मुकुट, तोरण आदि को देखने पर कला उत्कृष्टता संपूर्णता को देखा जा सकता है। यह अतुलनीय शिल्प कला का एक आदर्श उदाहरण है। शिव भक्त के लिए यह अत्यंत लोकप्रिय पूजन और दर्शनीय स्थल है। अद्वितीय सनातन धरोहर...!! ॐ नमः परम् शिवाय 🚩 जय सनातन धर्म 🙏🚩 जय माँ भगवती भवानी 🙏🌺 जय महाकाल🙏🔱🚩 #प्रेमझा ...

सनातन धर्म और हम

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ये नर्तकियों की जीवन्त मूर्तियाँ श्री लिङ्गराज मन्दिर, भुवनेश्वर, ओडिशा में निर्मित हैं। (चित्र - साभार) श्री लिङ्गराज मन्दिर देवाधिदेव महादेव को समर्पित हैं। इस मन्दिर के विशालकाय शिवलिङ्गम अपने आप में सम्पूर्ण और अद्वितीय हैं। इस मन्दिर का निर्माण नौवीं सदी में हुआ है परंतु आज भी इसके अद्भुत निर्माण को देखें तो सम्मोहित हो जाएंगे। इन नर्तकियों की मूर्तियों के आभूषणों, जीवंत भाव-भंगिमाएँ उत्कृष्ट पाषाण शिल्पकला के अनूठे नमूने हैं। हमारे प्राचीन मन्दिर केवल आराधना/पूजन स्थल ही नहीं थे। ये मनुष्य के सर्वांगीण विकास के सर्वोच्च स्थल रहे थे। यहाँ वैदिक ज्ञान, व्याकरण, संस्कृत, तकनीकी, शिल्पकला, वास्तुकला, आयुर्वेद, शल्यक्रिया इत्यादि के पठन-पाठन, अनुसंधान के सर्वोच्च संस्थान थे। परंतु दुर्भाग्यवश विधर्मी आक्रांताओं/यवनों और आधुनिक सिकुलर सरकार वाली व्यवस्था ने मन्दिरों के सभी सनातन व्यवस्था को विनष्ट कर सनातन ज्ञान परम्पराओं को समाप्त कर दिया। स्वतंत्र भारत में भी सभी मन्दिरों पर अवैध अधिग्रहण कर इसे मृतप्राय कर दिया है। अब तो कोई पुष्यमित्र शुंग ही अवतार लेकर पुनः सनातन शिक्षण व्यवस्था क...