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Showing posts from January, 2024

सनातन धर्म

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प्राचीन सनातनी शिल्प शैली क्या थी इसे वामियाें के लुगदी उपन्यास (कथित इतिहास) को पढ़ कर नहीं जान सकते हैं। क्योंकि उनके उपन्यास में शिल्प कला में प्रयुक्त यंत्र "छेनी हथौड़ी" तक जाकर ही रुक गया है। इस मूर्ति के मुखमंडल, वस्त्र, आभूषणों, अलंकरणों के बनावट को ध्यान से देखिए...!! क्या इसकी कोई तुलना हो सकता है.?? अब उस विशिष्टता की ओर ध्यान दें जो वामियों के कपोल कल्पित कथा की प्रामाणिकता को तार तार कर देगा। इस मूर्ति के मस्तक में एक कान से दूसरे कान तक एक सूक्ष्म छेद बना हुआ है। अब इस पर चिंतन करें कि माना बाह्य अलंकरण को "छेनी हथौड़ी" से बना दिया होगा परंतु इस सूक्ष्म छेद को कैसे बनाया गया होगा??? यह भी ध्यान रखें कि ग्रेनाइट की कठोरता Moh's scale पर ८ है जो इसे डायमंड के पश्चात सबसे कठोर पाषाण बनाता है। और उस काल में इलेक्ट्रिकल ड्रिल मशीन नहीं होता था। तो यह सूक्ष्म छेद किस विधि, तकनीक से बनाया गया होगा.?? यह मन्दिर नौवीं शताब्दी का निर्माण है जिसमें संगीत स्तम्भ बने हुए हैं जो थाप देने पर सभी सातों स्वरों की ध्वनि सुनाते हैं। आप इस मूर्ति के निर्माण में प्रयुक...

सनातन धर्म

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शिल्प कला में निपुणता, पारंगतता, उत्कृष्टता, संपूर्णता क्या होती है यह इस नृत्य-मुकुट में परिलक्षित हो रहा है। बिना अखण्ड समर्पण और एकाग्रता और भक्ति भाव के यह निर्माण असंभव सा प्रतीत होता है। मुखाकृति के ऊपर व नीचे बने नाग-बंध पर ध्यान दें.... कितना अद्भुत दृश्य निखर उठा है.!! नृत्य मुकुट का एक एक ईंच सनातन शिल्पकार के शिल्प विधा को धन्य धन्य कह रहा है। नृत्य-मुकुट (केरल) ....!!! वैभवशाली सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म 🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म

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*मैं मूर्तिपूजक नहीं हूँ.!" हमें "मूर्तिपूजक" सम्बोधन से सम्बोधित मत करो.! जिस विग्रह की हम अर्चना पूजन करते हैं वह एक निर्जीव मूर्ति या प्रतिमा नहीं है। अपितु वे प्राण-प्रतिष्ठित "सजीव देव विग्रह" हैं। हम सजीव देव विग्रह पूजने वाले धर्मनिष्ठ सनातनी है। और एक बात, मैं सेकुलर नहीं हूँ........ मैं धर्मपरायण हूँ.!! मैं धर्मनिरपेक्ष हो ही नहीं सकता हूँ.!! मैं सनातन धर्मी हूँ.!! मेरी संस्कृति वैदिक आर्य संस्कृति है.!! आर्यावर्त मेरा राष्ट्र है.!! वेदवाणी संस्कृत हमारी भाषा है। हिंदी हमारी उप भाषा है। मुझे अपने धर्म, संस्कृति, राष्ट्र एवं भाषा से प्रेम है। ये सारी बातें मुझे अपने धर्म पालन से ही मिलती हैं। अतः मुझे, मेरे परिवार, मेरे समाज एवं मेरे राष्ट्र को "धर्मनिरपेक्ष" बनाने का प्रयास ना करें !!!! जयतु सनातन 🙏🚩 जयतु आर्यावर्त 🙏🚩 जय श्री हरि नारायण 🙏🌺 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म

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विश्व के एकमात्र हिन्दू-राष्ट्र रहे पर्वतीय सौंदर्य से परिपूर्ण देश में...... हर हर महादेव.? भोलेनाथ, त्रिपुरारी, जटाधारी, त्रिशूलधारी का श्री डोलेश्वर महादेव शिवलिङ्गम। शिव भक्तों के मध्य भगवान डोलेश्वर महादेव मन्दिर अत्यंत लोकप्रिय आराधना स्थल हैं। श्री डोलेश्वर महादेव मन्दिर, सूर्यदिनायक, भक्तपुर जनपद, नेपाल में अवस्थित हैं। यह मन्दिर सनातनियों के लिए भक्ति और आस्था के पवित्र स्थल हैं। महान सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म

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इस सृष्टि की रचना में "योग/युग्म/संगम" का विशिष्ट एवं महत्वपूर्ण भूमिका है। संगम के बिना तो सृष्टि की कल्पना भी नहीं किया जा सकता है। नया जीवन "शुक्राणु एवं अंडाणु" के संगम से ही जन्म लेता है। अब इस सब की जानकारी के लिए X-Ray, Ultrasonogram, आदि आधुनिक विधि उपलब्ध है। परंतु कल्पना करें दो सहस्राब्दी पूर्व के सनातनी पूर्वजों को इसकी सटीक सूचना किस प्रौद्योगिकी/ तकनीक ने दिया होगा.?? कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है न.?? गर्व करें कि उन सनातनी पूर्वजों ने अपने तपश्चर्य से अंतर्चक्षु को इतना जागृत कर लिया था कि उन्हें किसी भी घटना को सहजता से देखने की दृष्टि प्राप्त हो गया था। वे इस दिव्य दृष्टि से भविष्य में भी झांक सकते थे। इसी बात का प्रत्यक्ष प्रमाण आप श्री वाडाकुनाथ स्वामी मंदिर की भीत पर ऊकीर्ण पाषाण भित्ति चित्रों में देख सकते हैं। श्री वाडाकुनाथ स्वामी मन्दिर, त्रिश्शुर, केरल। इस भित्ति चित्रों में शुक्राणु, अंडाणु, निषेचन, अंबिलिकल कार्ड,   भ्रूण विकास की सभी अवस्थाओं को जीवंत रूप में चित्रित किया गया है।(सभी चित्र -साभार) अपने मस्तिष्क पर जोर दे कर विचार करें कि ...

सनातन धर्म

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इतिहास को कागज पर लिखने की कला तो आधुनिक युग में विकसित किया गया है। परंतु हमारे सनातनी पूर्वजों ने तो सम्पूर्ण इतिहास को प्राचीन काल में ही पाषाण शिला पर गढ़ कर हमारे लिए रख छोड़े है। अब यह भिन्न बात है कि इस इतिहास की लिपि और भाषा को पढ़ना अतिआधुनिकता में अंधे होकर रहने वाले मनुष्यों को आता भी है या नहीं। महाभारत युद्ध कुरुक्षेत्र में हुआ था और इस इतिहास को पाषाण शिला पर चित्रों की लिपि में लिखवाने का श्रेय जाता है होयसल नरेश विष्णुवर्धन को। नरेश विष्णुवर्धन ने होयसलेश्वर मंदिर के भीत पर इस इतिहास लेखन का आरंभ ११२१ ई में करवाया और यह कार्य सम्पन्न हुआ ११६० में। इस कार्य संपादन में सनातनी शिल्पकारों के अथक परिश्रम, प्रयास, निपुणता और समर्पण की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इस मन्दिर के भीत पर सम्पूर्ण चक्रव्यूह, वाणवर्षा, गज युद्ध, रथ युद्ध आदि को जीवन्त रूप में चित्रित किया गया है। (सभी चित्र - साभार) होयसल साम्राज्य का ध्वज १५० वर्षों तक लहराता रहा था। परंतु इस अद्वितीय सनातनी धरोहर पर रेगिस्तानी पशु की कुदृष्टि पड़ गई। और विधर्मी म्लेच्छ मलिक कफूर के जंगली झुंड ने चौदहवीं शताब्दी के पू...

सनातन धर्म

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परमपिता परमेश्वर भगवान शिव व जगतमाता माँ शक्ति का अनुपम अर्धनारीश्वर प्रतिमा। बारहवीं शताब्दी में कोलुथुंग चोल प्रथम द्वारा निर्मित चोल वास्तुशिल्प का अनुपम अतुलनीय उदाहरण है यह भगवान अर्धनारीश्वर की प्रतिमा। श्री अमृतकदेश्वर मन्दिर, मेलकदाम्बुर ग्राम, कड्डलोर जनपद, तमिलनाडु। (चित्र - साभार) इस मन्दिर का १५०० वर्षों से भी अधिक प्राचीन सनातन परंपरा का इतिहास है। सनातनी शिल्पकार ने अपने कला निपुणता पारंगतता का सम्पूर्ण उपयोग किया है इस प्रतिमा के मुकुट, आभूषण, चंद्रहार, यज्ञोपवीत, कमरबंद, कंगन आदि के सृजन में.! मुखमंदल एवं अंगविन्यास, हाथों की भाव भंगिमा, नन्दी महाराज के मुख, ग्रीवा आदि में इस कला की उत्कृष्टता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। वैभवशाली सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म

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वो कैसी चमत्कारी विद्या रही होंगी जो पाषण को भी मोम के सदृश्य कोमल बनाकर उसपर कला का सृजन किया जाता था.???? इस शिल्प विद्या में पारंगत होने हेतु कितना परिश्रम, एकाग्रता और समय दिए गए होंगे.???? किनका प्रेरणा रहा होगा जिनसे प्रेरित होकर उन्होंने ऐसा अप्रतिम सृजन किए होंगे.???? क्या सनातनी पूर्वजों के इन विरासतों को हम उचित सम्मान दे पाए हैं.??? श्री सुब्रमण्यम स्वामी अपने वाहन मोर संग नाग-बन्ध पर विराजमान, निर्मित हैं। (चित्र - साभार) श्री रामतीर्थ मन्दिर, गोकर्ण, उत्तर कानारा, कर्नाटक। प्रभु मुरुगन के मुखमण्डल से लेकर उनके वस्त्र-आभूषणों तक, मोर से लेकर नाग-द्वय तक के निर्माण में जो निपुणता दृश्यमान होता है यह पाषाण शिल्प कला का सर्वोच्च शिखर ही है। यह सम्पूर्ण निर्माण एक अखण्ड पाषण शिला पर किया गया है। इन्हें देखकर अपने सनातनी पूर्वजों पर गौरवान्वित हैं। गौरवशाली सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म 🙏🚩 जय श्री षण्मुख स्कन्द 🙏🌺 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म सनातन धर्म और हम 🚩

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कितना अद्भुत अलौकिक है यह दृश्य.!!! ऐसा प्रतीत होता है जैसे किसी चितेरे ने तूलिका लेकर सधे निपुण हाथों से कैनवास पर यह अनुपम चित्र रच दिया है। किन्तु यह चित्र नहीं अपितु देवशिल्पी विश्वकर्मा द्वारा निर्मित बाबा केदारनाथ धाम मन्दिर का रात्रिकालीन मनमोहक दृश्य है। बाबा केदारनाथ मन्दिर, केदारनाथ धाम, उत्तराखंड। अतुलनीय सनातन धरोहर...!! ॐ नमः परम् शिवाय 🚩 जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म

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सम्पूर्ण सृष्टि के सृजनकर्ता....!! समस्त ब्रह्माण्ड के पालनकर्ता....!! और सावधिक विघटन के लिए... सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के संहारकर्ता....!! वे जिन्होंने (जब भागीरथ के आग्रह पर भी ब्रह्मा-पुत्री माँ गङ्गा के वेग को सहन करने कोई उपलब्ध नहीं हुए तो) माँ गङ्गा को अपनी जटाओं में स्थान दे दिए...!! वे जिन्होंने (जब समुद्रमंथन से प्राप्त हलाहल विष को स्वीकार करने के लिए कोई आगे नहीं आए और सम्पूर्ण सृष्टि त्राहिमाम कर उठी) हलाहल विष का पान सहर्ष स्वीकार कर सृष्टि की रक्षा किए...!! जो हर परिस्थिति में शान्त संयमित ही रहे....!!! अपने ओर से सम्पूर्ण जगत में ज्ञान, प्रकाश, दया, करुणा, आशीर्वाद, अनुग्रह, कृपा बाँटने के उपरांत भी जब उन्हें माँ शक्ति से, अपने अर्ध-अस्तित्व, अर्ध-चेतना से विलग किया गया, तो.... देवाधिदेव महादेव, शिव, शम्भु, महेश, भोले, हर, जटाधारी, त्रिशूलधारी अपने अर्ध-अंश की विरह से व्यथित हो क्रोध को धारण कर गए....!! भगवान अर्धनारीश्वर सबों पर कृपा बनाए रखें.!! सबों का कल्याण करें.!! सबों को मोक्ष प्रदान करें.!! परमपिता महेश्वर व माता सती का अनुपम प्रतिमा.!! श्री दक्षेश्वर महादेव मन्दिर...

सनातन धर्म

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प्राचीन कश्मीर के कण-कण शैववाद से ही संचालित रहे थे। ( दुर्भाग्यवश चौदहवीं शताब्दी के पश्चात भले ही यहाँ विधर्मियों का आधिपत्य हो गया।) भगवान शिव का आशीर्वाद कश्मीर से ही सम्पूर्ण आर्यावर्त में विस्तार पाए। भगवान शिव के प्रति भक्ति, आस्था और समर्पण मात्र शब्दों में ही नहीं अपितु प्रत्येक निर्माण में दृष्टिगोचर होते हैं। भगवान शिव को समर्पित यह मन्दिर सत्रह सौ वर्ष प्राचीन है। भगवान शिव के भक्ति में प्रत्येक निर्माण में चमत्कार किस प्रकार घटित होते हैं ये मन्दिर इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। इस अतिप्राचीन शिव मन्दिर के अद्भुत वास्तुकला में चमत्कार स्पष्ट दिखाई देता है। इसके प्रत्येक आयाम का भार समान रूप में ७.२० टन है। भार का इतना सटीक गणना करना और उस अनुपात में ही पत्थर को काट कर मन्दिर के भीत का निर्माण कार्य पूरा करना और वो भी बिना किसी त्रुटि के...., क्या यह सामान्य बात है.?? आप स्वयं चिंतन करें.!!! आधुनिक विज्ञान आज भी सनातन संस्कृति के उच्चतम स्तर को छू भी नहीं पाया है। यह अतिप्राचीन शिव मन्दिर, पुलवामा, कश्मीर में स्थित है। अतुलनीय सनातन धरोहर...!! ॐ नमः परम् शिवाय 🚩 जय सनातन धर्म...