सनातन धर्म और हम
भगवान श्री हरि नारायण के कुल चौबीस अवतार माने जाते हैं। जिनमें दशावतार प्रमुख हैं। इनके अतिरिक्त चौदह अन्य अवतारों को माना जाता है। भगवान श्री हरि विष्णु के हयग्रीव अवतार को सोलहवें अवतार के रूप में माना जाता है। भगवान हयग्रीव का यह अतिदुर्लभ प्रतिमा "निंरा नारायण पेरुमल मन्दिर, तिरुथनकाल, शिवकाशी, तमिलनाडु में स्थापित है। यह मन्दिर भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित है। यहाँ भगवान विष्णु "निंरा नारायण" के रूप में व माँ लक्ष्मी "अरुणकमला महादेवी" के रूप में पूजे जाते हैं। भगवान हयग्रीव अवतरण की कथा इस प्रकार है..... एक दैत्य हयग्रीव ने माँ महामाया का घोर तपस्या कर माँ को प्रसन्न कर लिया। माँ महामाया उसे तामसी शक्ति के रूप में दर्शन दे वर माँगने को बोलीं। दैत्य हयग्रीव ने अमरत्व का वर माँगा तो माँ ने कहा कि अमरत्व का वरदान किसी को भी नहीं दिया जाता, कुछ और माँग लो। दैत्य हयग्रीव ने माँगा की उसकी मृत्यु हयग्रीव (मेरे) के हाथों ही हो। माता महामाया ने "एवमस्तु" कहा और अंतर्ध्यान हो गईं। अब तो दैत्य हयग्रीव प्रसन्नता से पागल ही हो गया क्योंकि वह स्वयं तो अपन...