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Showing posts from October, 2025

सनातन धर्म और हम

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भगवान श्री हरि नारायण के कुल चौबीस अवतार माने जाते हैं। जिनमें दशावतार प्रमुख हैं। इनके अतिरिक्त चौदह अन्य अवतारों को माना जाता है। भगवान श्री हरि विष्णु के हयग्रीव अवतार को सोलहवें अवतार के रूप में माना जाता है। भगवान हयग्रीव का यह अतिदुर्लभ प्रतिमा "निंरा नारायण पेरुमल मन्दिर, तिरुथनकाल, शिवकाशी, तमिलनाडु में स्थापित है। यह मन्दिर भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित है। यहाँ भगवान विष्णु "निंरा नारायण" के रूप में व माँ लक्ष्मी "अरुणकमला महादेवी" के रूप में पूजे जाते हैं। भगवान हयग्रीव अवतरण की कथा इस प्रकार है..... एक दैत्य हयग्रीव ने माँ महामाया का घोर तपस्या कर माँ को प्रसन्न कर लिया। माँ महामाया उसे तामसी शक्ति के रूप में दर्शन दे वर माँगने को बोलीं। दैत्य हयग्रीव ने अमरत्व का वर माँगा तो माँ ने कहा कि अमरत्व का वरदान किसी को भी नहीं दिया जाता, कुछ और माँग लो। दैत्य हयग्रीव ने माँगा की उसकी मृत्यु हयग्रीव (मेरे) के हाथों ही हो। माता महामाया ने "एवमस्तु" कहा और अंतर्ध्यान हो गईं। अब तो दैत्य हयग्रीव प्रसन्नता से पागल ही हो गया क्योंकि वह स्वयं तो अपन...

सनातन धर्म और हम

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विशालकाय लोनार झील लगभग पचास सहस्र वर्ष पूर्व उल्कापिंड के पृथ्वी से टकराने से बना है। लोनार झील को "लोनार क्रेटर" भी कहा जाता है। लोनार का अर्थ "नमक की क्यारी" होता है। अत्यधिक लवण तथा "HALOARCHAEA" लवण प्रेमी जीवाणुओं के कारण इसके जल का रँग गुलाबी है। विश्व भर के विज्ञानी इस लवणीय जल के झील की ओर अनुसंधान हेतु आकर्षित होते हैं। लोनार झील मुम्बई से लगभग ५०० कि.मी. दूर बुलढाणा जनपद, महाराष्ट्र में है। लोनार झील के निकट भगवान महादेव के कुछ बारह मन्दिर रहे हैं। उन्हीं शिवालयों में से एक में यह सर्वव्यापी, सर्वशक्तिमान भगवान शिव की अति प्राचीन दुर्लभतम शिवलिङ्ग स्थापित हैं। अनुपम शिवलिङ्ग के समक्ष नन्दी महाराज चिरप्रतीक्षित अवस्था में प्रभु के ध्यान में मग्न बैठे हैं। शिवालय की संरचना जीर्ण-शीर्ण हो गई है तो भी शिवलिङ्ग तथा नन्दी सुरक्षित हैं। भगवान शिव के भक्त इस भग्न शिवालय में भी आराधना, उपासना हेतु सहर्ष आते हैं। पर्यटकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण धर्म स्थली है। महान सनातन धरोहर...!! ॐ नमः परम् शिवाय 🚩 जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा ...

सनातन धर्म और हम

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विश्व के सभी सातों आश्चर्य (seven wonders) जिसके चौखट पर आकर अपने दम तोड़ देंगे, ये वो अकल्पनीय सनातन संस्कृति की सर्वोत्कृष्ट कृति है। (Zoom करके अवश्य देखें) यह सनातनी शिल्पकार पूर्वजों के कर कमलों द्वारा मध्यकाल दसवीं शताब्दी में निर्मित माना जाता है। (चित्र-साभार) यह कभी देवाधिदेव महादेव का भव्य मन्दिर हुआ करता था। किन्तु अब मन्दिर के कोई चिह्न विद्यमान नहीं हैं। अपने सनातनी पूर्वजों के वास्तुशिल्प को देखकर एक बात स्पष्ट है कि जहाँ विश्व के वास्तुशिल्प की कल्पना का अन्त होता है वहीं से हमारे सनातनी वास्तुशिल्प का सृजन आरम्भ होते हैं। अठारहवीं शताब्दी में धौलपुर के शासक ने भग्न मन्दिर के पत्थरों को अपने भवन निर्माण के लिए उपयोग कर लिए। अब इस अद्वितीय मन्दिर के मात्र प्रवेश मण्डपम ही बच रहे हैं। ये गढ़ी पदावली, मोरेना, मध्यप्रदेश में स्थित हैं। इसके आधार से छत तक सम्पूर्ण भीत मूर्तियों, कलाकृतियों, बेल-बूटों की संरचनाओं से भरे पड़े हैं। इनमें त्रिदेव, सृष्टिकर्ता श्री ब्रह्मदेव, पालनकर्ता श्रीमन्नारायण, सृष्टि के संचालके व संहारक देवाधिदेव महादेव अप्रतिम रूप से निर्मित हैं। इनमें जो महा...

सनातन धर्म और हम

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सम्पूर्ण विश्व में भाँति-भाँति के रँग-रूप, आकर-प्रकार के शिवलिङ्ग प्राप्य हैं। किन्तु, यह दुर्लभतम शिवलिङ्ग अपने आप में अनूठा और अप्रतिम हैं। (चित्र-साभार) इस अद्भुत शिवलिङ्ग में नन्दी महाराज व कूर्म (कच्छप/कछुआ) संयुक्त रूप में निर्मित हैं। यह अतिप्राचीन भगवान देवाधिदेव महादेव को समर्पित श्री गङ्गेश्वर महादेव मन्दिर में स्थापित हैं। श्री गङ्गेश्वर महादेव मन्दिर,  गङ्गवा ग्राम, दांता तालुका, बनासकांठा जनपद गुजरात में स्थित हैं। शिवलिङ्ग में स्पष्ट रूप में नन्दी महाराज व कूर्म दृश्यमान हैं। मन्दिर भग्न स्थिति में ही है। मन्दिर के शिखर भी खण्डित हैं। मात्र गर्भगृह सुरक्षित है जहाँ यह अनुपम शिवलिङ्ग स्थापित हैं। इस मन्दिर की भव्यता का गर्भगृह को देखकर कोई भी अनुमान लगा सकता है कि अपने गौरवपूर्ण अतीत में यह मन्दिर कितना भव्य रहा होगा.!! इस मन्दिर के गर्भगृह के एक भीत पर श्रीमन्नारायण के दशावतार उकीर्ण हैं। इनमें मत्स्यावतार, कूर्मावतार, वाराहावतार, नरसिंहावतार, वामनावतार, श्री परशुराम अवतार, श्री राम अवतार, श्री बलभद्र अवतार तथा श्री कृष्ण अवतार हैं। आश्चर्यजनक रूप से इनमें श्री कल्कि ...

सनातन धर्म और हम

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यह अतुलनीय अतिप्राचीन श्री विश्वेश्वर महादेव मन्दिर है। इसे स्थानीय लोगों के द्वारा बाशेश्वर महादेव मन्दिर भी पुकारा जाता है। श्री विश्वेश्वर महादेव मन्दिर, बजौरा, कुल्लू, हिमाचल प्रदेश में है। श्री विश्वेश्वर महादेव मन्दिर, भगवान शिव को समर्पित है। इस मन्दिर का निर्माण नवीं शताब्दी में किया गया था। यह मन्दिर कुल्लू घाटी का सबसे बृहत पाषाण मन्दिर है।  इस मन्दिर में एक दुर्लभ विशाल शिवलिङ्गम स्थापित हैं जो संयुक्त रूप से भगवान परमपिता देवाधिदेव महादेव व जगतमाता माँ पार्वती के प्रतिनिधित्व करते हैं। यह मन्दिर पहाड़ी शैली में निर्मित एकल कक्ष का मन्दिर है। इस मन्दिर के चारों ओर बरामदे हैं। मन्दिर के पाषाण दीवारों पर आकर्षक पुष्प कलाकृतियों का निर्माण किया गया है। अन्दर की कलाकृतियाँ सूक्ष्म रूप से उत्कृष्टतापूर्ण रूप में किया गया है। इस मन्दिर परिसर में और भी लघु-मन्दिर हैं जो भगवान श्रीमन्नारायण, देवी श्री लक्ष्मी, विघ्नहर्ता श्री गणेश जी को समर्पित हैं। इसके उत्कृष्ट वास्तु व शिल्पकला के कारण इसे संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है। वैभवशाली सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल...

सनातन धर्म और हम

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धरती के स्वर्ग कश्मीर के कण-कण में भगवान शिव समाहित हैं। कश्मीर के श्रीनगर में शङ्करमठ के निकट ही अतिप्राचीन दुर्गानाग मन्दिर हैं। दुर्गानाग मन्दिर में दुर्लभ शिवलिङ्ग स्थापित है। अतीत में आदि शङ्कराचार्य अपने साधना के लिए इसी शङ्कर मठ में ठहरे थे। इसी शङ्कर मठ में आदि शङ्कराचार्य को माँ शक्ति स्वरूपा देवी के दर्शन प्राप्त हुए थे। माँ के दर्शन प्राप्ति से आह्लादित आदि शङ्कराचार्य ने यहीं उनके विश्व विख्यात कृति "सौंदर्य लहरी" की रचना किए थे। दुर्गानाग मन्दिर तक सीढ़ियों के निर्माण अठारहवीं शताब्दी में करवाया गया है। यह एक जागृत पीठ है। दर्शनकर्ता भक्तों के मनवांछित अभीष्ट को पूर्ण करते हैं। वैभवशाली सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म और हम

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सनातनी शिल्पकार कितने सूक्ष्म से सूक्ष्म बातों को ध्यान में रखकर उसे अपने सृजन में समाहित करते थे, इसका यह मूर्ति आदर्श उदाहरण है। इस मूर्ति में वस्त्र-परिधान को ध्यान से देखें, वस्त्र के गाँठ, उनके कलाकृतियों इत्यादि को कितनी निपुणता से सजीव चित्रित किया गया है। इनके वस्त्र ठेठ गंवई वेश में गढ़े गए हैं। सम्पूर्ण मूर्ति में अप्रतिम भाव संप्रेषण और सौन्दर्य है। यह अल्प खण्डित मूर्ति नन्द बाबा और मैया यशोदा के हैं। उनके गोद में बाल गोपाल व बाल बलभद्र हैं। (चित्र-साभार) बाल गोपाला की गैया भी पार्श्व में निर्मित है। यह मूर्ति श्री दसावतार मन्दिर, देवगढ़, उत्तरप्रदेश में है। यह गुप्तकालीन मूर्ति पाँचवीं शताब्दी का माना गया है। मन्दिर के खम्भे में उकीर्ण कलाकृतियाँ मनमोहक हैं। इस अनुपम कृति को जब गढ़ा जा रहा होगा उस समय के सनातनी शिल्पकार के मस्तिष्क में लल्ला कान्हा, बाल बलदाऊ, नन्द बाबा, मैया यशोदा की जो छवि अंकित होगी उसे कल्पना करते ही सर्वांग पुलकित हो उठता है। रोम रोम रोमांच से भर जाता है। धन्य हैं वे सनातनी शिल्पकार जिन्होंने इस अनमोल रचना को गढ़ा है.!! दुर्लभतम सनातन धरोहर...!! जय सना...

सनातन धर्म और हम

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माता सती के दक्ष प्रजापति के यज्ञ कुण्ड में आत्मदाह के पश्चात भगवान शिव उनके मृत देह को अपने कन्धे पर उठा रुद्रताण्डव करने लगे। तब सृष्टि को संहार से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने अपने अपने सुदर्शन चक्र से उस मृत देह को कई खण्ड में विभक्त कर दिए। जहाँ जहाँ माता के अंग गिरे वहाँ वहाँ शक्तिपीठ हैं। कुल ५१ शक्तिपीठ हैं। किन्तु स्थानीय लोगों के मान्यताओं पर कुछ ऐसे भी माता के स्थल हैं जिन्हें वे शक्तिपीठ मानते हैं। श्री महाकाली शक्तिस्थल, कालिका धाम को भी सिद्ध शक्तिपीठ माना जाता है। श्री महागौरी माता मन्दिर, शिमलापुरी, लुधियाना, पंजाब। श्री महागौरी माता मन्दिर में माँ जगततारिणी, भयहारिणी, भवतारिणी श्री दक्षिणेश्वरी काली माँ की दिव्य प्रतिमा स्थापित हैं। इस मन्दिर की चमत्कारी विशिष्टता है कि संध्या आरती के समय माँ के नेत्र हिलते हैं। इस अद्भुत दृश्य को लाखों भक्तों ने अपने आँखों से देखा है और वे इस चमत्कार के साक्षी हैं। यहाँ माँ स्वयम्भू पिण्डी के रूप में विराजमान हैं। लोगों को इस धाम में अनन्य श्रद्धा है और यहाँ भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती हैं। या देवि सर्वभूतेषु शक्तिरुपेण संस्थिता नमस...