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Showing posts from April, 2025

सनातन धर्म और हम

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आज कल मिक्स ब्रीड गैंग जातिप्रथा को येन केन प्रकारेन अनुचित सिद्ध करने को भिन्न भिन्न प्रकार के कुतर्क दे रहा है और विष्टावमन किए जा रहा है। पर यह नहीं देखता कि जातिप्रथा ही वह प्राथमिक रक्षा पंक्ति रहा है जिन्होंने सदा से विधर्मियों के आक्रमण अत्याचार का मुंह तोड़ प्रत्युत्तर देते रहा है और सनातन संस्कृति परंपरा का रक्षा किया है। यह गैंग वैभवशाली जातिप्रथा के शौर्यपूर्ण कीर्तिमानों को झुठलाने का हर संभव प्रयास कर रहा है, परंतु यह निरर्थक ही सिद्ध होगा। ऐसा ही वैभवशाली इतिहास टांगीनाथ धाम मन्दिर का रहा है। मान्यता है कि संलग्न चित्र में जो त्रिशूल - परशु है वह श्री हरि नारायण के षष्ठ आवेशावतार श्री परशुराम जी के द्वारा धँसाया गया है। (चित्र - साभार) झारखंड के गुमला जनपद में भगवान परशुराम का यह तपस्थली रहा है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान परशुराम ने यहाँ देवाधिदेव महादेव को प्रसन्न करने हेतु घोर तपस्या की थी।  यहीं उन्होंने अपने परशु को भूमि में गाड़ दिया था। इस परशु की ऊपरी आकृति कुछ कुछ त्रिशूल से मिलती है। इसी कारण यहाँ सनातनी श्रद्धालु इस परशु की पूजा के लिए आते है। परम् पिता ...

सनातन धर्म और हम

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कौथलम की दिव्यता न्यारी है......!!! प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर दृश्य मन को सम्मोहित कर लेते हैं। कौथलम में ऊँचाई पर से जलप्रपात का जल अपने में वनस्पतियों के औषधीय गुणों को समेटे हुए सतत गिरते रहते हैं। यह क्षेत्र पुष्प पौधों के सौन्दर्य से इंद्रलोक की प्रतीति कराते हैं। कौथलम महान ऋषि अगस्त्य का तप क्षेत्र रहा है। ऋषि अगस्त्य ने इस स्थान पर ध्यान और तपश्चर्या कर इस अलौकिक "श्री सिद्धेश्वरी पीठम" का स्थापना प्राचीन वैदिक काल में किए थे। (चित्र-साभार) यह दुर्लभतम शिवलिङ्गम अपने आप में ही अनूठा प्रमाण हैं। श्री सिद्धेश्वरी पीठम का पवित्र स्थल कोर्टल्लम, तिरुनेलवेली जनपद, तमिलनाडु में स्थित है। श्री सिद्धेश्वरी पीठम धार्मिक महत्व के साथ-साथ एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल के रूप में लोकप्रिय है। परमपिता देवाधिदेव महादेव अपना अनुग्रह आशिर्वाद भक्तों को सुख समृद्धि संपदा आरोग्य ऐश्वर्य प्रदान करने हेतु निरन्तर प्रदान करते रहते हैं। वैभवशाली सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म और हम

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पवनसुत आञ्जनेय के भक्तों ने अपने आराध्य देव का विग्रह अपनी श्रद्धा और भावनाओं के अनुसार भिन्न-भिन्न रूपों में बनाए हैं। यह दुर्लभतम विग्रह भी अपने अंदर वैसे ही विलक्षणताओं को समाहित किए हुए हैं। इस विग्रह का निर्माण और स्थापना श्री व्यासराजा द्वारा करवाया गया था (१४६०-१५३९ ई.)। इस अनुपम विग्रह को "अवतारताराय-आञ्जनेय" के रूप में जाना जाता है। (चित्र-साभार) यह अद्वितीय विग्रह नव-वृंदावन, हम्पी, कर्नाटक (जो तुंगभद्रा सरिता के निकट एक द्वीप है) पर स्थापित हैं। इस अद्भुत विग्रह में तीन युगों के सनातनी अवतारों को अत्यंत सौंदर्यपूर्ण रूप में दर्शाया गया है। १. इनकी मुखाकृति अतुलितबलधामं, श्रीराम भक्त हनुमानजी के रूप में हैं। त्रेतायुग। २. इनकी भुजाएँ महाबली, गदाधारी कौन्तेय भीम के रूप में हैं। द्वापरयुग। (पुष्ट-बाहु/कंधे पर ध्यान दें)। ३. इनके कर में सुशोभित ग्रँथ-पांडुलिपियाँ, श्री माधवाचार्य जी के रूप में हैं। कलयुग। श्री आञ्जनेय अपने विरल रूप में भक्तों के मध्य अत्यंत लोकप्रिय हैं। अद्वितीय सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय श्री आञ्जनेय महावीर हनुमान 🙏🌺 जय महाकाल🙏🔱🚩 #प्र...

सनातन धर्म और हम

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आर्यावर्त में अनेक राजकोष रहे थे जिन्हें विधर्मी आक्रांताओं ने लूट लिया था। परन्तु उन्हीं में एक ऐसा भी गुप्त राजकोष रहा है जिसे कोई भी विदेशी नहीं लूट नहीं पाया। क्या आप उसे जानते हैं??? वह गुप्त राजकोष "सोन भण्डार" गुफा के नाम से जाना जाता है। सोन भण्डार गुफा बिहार के राजगीर, नालन्दा में स्थित है। (चित्र - साभार) सोन भण्डार गुफा का इतिहास हर्यक वंश (५४४ - ४९२ ई.पू.) के शासक बिम्बिसार से जुड़ा है। बिम्बिसार ने अपने शासनकाल में एक बड़े पहाड़ को काटकर उसमें कृत्रिम गुफा का निर्माण कराया था। उस गुफा में अपने बहुमूल्य संपदाओं को छुपा कर रख दिया था। इस गुफा का नाम सोन भण्डार पड़ा था। इस गुफा में दो कोठरी बनवाया गया था। एक में धन सम्पदा (स्वर्ण/माणिक्य आदि) रखा गया था और दूसरे कोठरी में उसकी सुरक्षा करने हेतु सैनिकों के रहने की व्यवस्था थी। इस गुफा को एक विशाल पाषाण खण्ड से ढंक दिया गया था। फिरंगी अंग्रेज़ों ने परतंत्रता के समय इस सोन भण्डार को खोलने के लिए इस पर तोप के गोले दागे थे। तोप दागने के चिह्न आज भी यहाँ विद्यमान हैं और उसे देखे जा सकते हैं। पर अंग्रेज लाख प्रयास के पाश्च...

सनातन धर्म और हम

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आर्यावर्त के मन्दिरों, भवनों, राजप्रासादों, धर्मस्थलों को देखकर यह लगता है कि विश्व के "वंडर्स/wonders" का निर्णय वास्तविक प्रतिष्ठानों को देखकर नहीं अपितु किसी "वातानुकूलित कोठरी" में बैठकर किया गया है, तभी तो बस एक तेजोमहालय ही इसमें स्थान बना पाया। अकल्पनीय वास्तुशिल्प का निर्माण क्या होता है यह आज भी विश्व को सनातन धर्म से ही सीखना पड़ेगा। इस छवि में निर्मित मन्दिर को ध्यान से देखें और सोचें कि जिस स्थान पर मनुष्य का पहुँचना भी दुःसह है वहाँ इतने भव्य मन्दिर का निर्माण सनातनी पूर्वजों ने किस प्रकार किए होंगे.!! सोच कर देखें कि मन्दिर निर्माण में प्रयुक्त सामग्री कैसे इस स्थल पर पहुँच पाया होगा और जिन शिल्पकार, कलाकार, वास्तुकार ने कार्य किया होगा वे उतने लम्बे समय तक कैसे इस कार्य स्थल तक प्रतिदिन पहुँचते होंगे??? यह श्री संजीवराय पेरुमल मन्दिर, एरुमापट्टी प्रखंड, नमक्कल जनपद, तमिलनाडु में स्थित हैं। यह सिरागिरी पहाड़ी पर भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित मन्दिर है। इस अकल्पनीय मन्दिर का निर्माण सत्रहवीं शताब्दी में हुआ है। इस मन्दिर के निर्माण का श्रेय मदुरै साम्र...

सनातन धर्म और हम

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इस चित्र में जो "स्वर्ण पट्टिका" यहाँ सङ्लग्न है यह कोई सामान्य पट्टिका नहीं है। यह अपने आप में दैवीय विशिष्टता समहित किए हुए है। यह भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी के द्वारा देव कोषागार के अधिपति श्री कुबेर देव को प्रेषित पत्रक है। मान्यता है कि भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी और देवी पद्मावती के परिणय कार्यक्रम में व्यय हेतु धन के आग्रह निमित्त यह प्रपत्र देव कोषागार के अधिपति श्री कुबेर देव को प्रेषित किया गया था। इस प्रपत्र में विवाह कार्यक्रम में व्यय हेतु १,४०,००,००० (एक कोटि चत्वारिंशत लक्ष) देव-मुद्रा का आग्रह वर्णित है। यह पट्टिका आज भी श्री वाराह स्वामी पादपीठ, तिरुपति में संरक्षित है। पुरोहित गण पूर्ण श्रद्धा से इस पत्रक का आज भी पूजन अर्जन करते हैं। अद्भुत सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म 🙏🚩 जय श्री हरि नारायण विष्णु 🙏🌺 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म और हम

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जो लोग कहते हैं कि विश्व में केवल ७ आश्चर्य(WONDERS) हैं वो सम्पूर्ण आर्यावर्त में निर्मित सनातन मन्दिरों, महलों, भवनों, स्मारकों इत्यादि को समग्रता में देखा ही नहीं है। नहीं तो ७०००००००००००००००००००००००००१ आश्चर्य तो आर्यावर्त में ही मिल जाएंगे। ये श्री सुब्रमण्यम स्वामी मन्दिर, मरुधमलाई, कोयम्बटूर हैं। (चित्र – साभार) Zoom करके देखने पर इसमें विस्मयकारी मूर्ति कला का दर्शन होता है। कितना श्रमसाध्य रहा होगा इतनी सूक्ष्मता से मूर्तियों का जीवंत निर्माण.!!! निर्माण कार्य तो दूसरे या तीसरे चरण में आरम्भ किया जाता है।  सबसे पहले तो इस मन्दिर के प्रारूप की जिसने परिकल्पना की होगी उसके मानसिक और बौद्धिक क्षमता के उत्कृष्टता का अनुमान लगाएं.! कितने उच्च स्तर का यह शिल्पकला और स्थापत्य कला का आदर्श उदहारण है। आज विज्ञान इतना आधुनिक और विकसित हो गया है तो भी इसकी प्रतिकृति बनाना असम्भव सा प्रतीत होता है। सनातनी पूर्वजों के विलक्षण प्रतिभा और कला की निपुणता पर गर्व है। अतुलनीय सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म 🙏🚩 जय षण्मुख स्कन्द कार्तिकेय स्वामी 🙏🌺 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा ...

सनातन धर्म और हम

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चमत्कार देखने हेतु सनातनी दृष्टि चाहिए ना कि वामजीवियों की दूषित दृष्टि। सनातनी चमत्कार तो एक ढूंढो सहस्र मिलेंगे.! अनिवार्यता है सनातनी दृष्टि की क्योंकि वामजीवियों ने तो सनातनी गौरव/शौर्य/संस्कार/पवित्रता का सत्यानाश करने में कोई कमी नहीं छोड़ा है। यह अद्भुत दृश्य श्री सप्तेश्वर महादेव का है। इस अतिप्राचीन शिवलिङ्गम का अभिषेक सप्त (सात) धाराएँ अनवरत करती रहती हैं। अतः इसे सप्तेश्वर महादेव कहा जाता है। ये निरंतर गिरने वाली सप्त धाराएँ किस श्रोत से आती हैं, इसका उद्गम स्थल क्या है, यह आज भी रहस्य बना हुआ है। एक अद्वितीय विशिष्टता है कि ऋतु ग्रीष्म हो या शरद ऋतु या शिशिर ऋतु शिवलिङ्गम पर गिरने वाले जल के तापमान में कोई अंतर नहीं होता है। यह जल सदैव स्वच्छ और शीतल ही बना रहता है। क्यों है ना अचंभित करने वाली बात.??? पौराणिक कथाओं के अनुसार यह साढ़े तीन सहस्र वर्षों से सभी अनुसंधान को धता बताते हुए एक अनसुलझा रहस्य बना हुआ है। यह अलौकिक दृश्य श्री सप्तेश्वर महादेव मन्दिर, साबरकांठा जनपद, गुजरात में है। (चित्र – साभार) इस दुर्लभ दृश्य से युक्त महादेव मन्दिर बीजापुर के निकट साबरमती नदी के तट ...

सनातन धर्म और हम

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आप विश्व के सभी सातों "आश्चर्य (WONDER)" को तराजू के एक पलड़े पर रखें और दूसरी ओर पलड़े पर  केवल इस मन्दिर को रखें तो भी इस मन्दिर वाला पलड़ा झुका हुआ मिलेगा। ये हैं बृहदेश्वर मन्दिर, तंजावुर, तमिलनाडु। यह विशाल मन्दिर ग्यारहवीं शताब्दी का निर्माण है। आप यह जानकर रोमांच से भर जाएँगे की इस मन्दिर में सीमेंट या अन्य कोई "एडहेसिव" का प्रयोग पत्थरों को जोड़ने के लिए नहीं किया गया है। सम्पूर्ण मन्दिर "इंटरलॉकिंग" प्रणाली के द्वारा शिला-खण्डों को जोड़कर निर्मित है। सहस्रों वर्ष पूर्व बने इस मन्दिर में आजतक कोई अन्तर नहीं आया है। इस मन्दिर ने कई भूकम्प, प्रलय, प्राकृतिक आपदाओं ऐसे ही हँसते हुए सहा है और अटल खड़ा है। इसके ८० टन के विमान को शिखर पर कैसे चढ़ाया गया है यह आज भी विज्ञानियों के रहस्य ही है। इसके वृहताकार नन्दी काले ग्रेनाइट के एक ही शिला खण्ड से निर्मित है। और इस विशाल बृहद नन्दी महाराज के बारे में आप ही कुछ कहें.!! यह चोलकाल का द्रविड़ स्थापत्य शैली का अद्भुत निर्माण है। ग्रेनाइट पत्थर से बना हुआ यह विश्व का इतना विशाल संभवतः प्रथम मन्दिर है। इस मन्दिर में ...

सनातन धर्म और हम

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ब्रह्मा पुत्र दक्ष प्रजापति ने यज्ञ का आयोजन किया और सभी देवों, ऋषियों आदि को आमंत्रित किया। किन्तु जगतपिता महादेव को निमंत्रण नहीं भेजा। माता सती पति इच्छा के विरुद्ध जाकर अपने पिता दक्ष प्रजापति के यज्ञस्थल में पहुँची। परन्तु वहाँ अपने पति का अपमान सहन नहीं कर पाईं और अपने जीवन को समाप्त कर लिया। जगतपिता महादेव के अंश से उत्पन्न वीरभद्र यज्ञ का विध्वंस कर दिया। वीरभद्र भगवान शिव के आवेश रूप से उत्पन्न हैं अतः अत्यंत क्रोधित और विकराल प्रतीत होते हैं। यह भगवान महादेव के प्रकोप रूप ही हैं। श्री वीरभद्र जी की अद्भुत प्रतिमा निजागल के मन्दिर में स्थापित है। (चित्र-साभार) यह लोकप्रिय मन्दिर निजागल, तमकुर जनपद, कर्नाटक में स्थित है। श्री वीरभद्र जी की प्रतिमा अस्त्र शस्त्र से सुसज्जित है। श्री वीरभद्र जी के मुखमण्डल पर क्रोध स्पष्ट है। श्री वीरभद्र जी में भक्तों का अगाध श्रद्धा है। वैभवशाली सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म और हम

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मानता हूँ कि यह सम्भव है और ऐसा किया भी गया है कि... सनातनियों को म्लेच्छों द्वारा बल प्रयोग कर के, अनैतिक रूप से, यातना एवं प्रताड़ना देकर... मन्दिर से बाहर निकाल दिया जा सकता है... परन्तु... क्या कोई भी विधर्मी शक्ति सनातनियों के हृदय से मन्दिर को निकाल सकता है.?? अतिप्राचीन दत्ता मन्दिर के साथ भी यही हुआ है। यह मन्दिर कश्मीर में आज जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है। मान्यता है कि इस मन्दिर का निर्माण पांडवों के द्वारा किया गया था। विधर्मियों ने इस मन्दिर को अपवित्र और नष्ट-भ्रष्ट कर दिया। आज भी इसके अपवित्र होने की पीड़ा सनातनियों के हृदय में है। आज भी सनातनी इस प्रतीक्षा में हैं कि इनका कभी तो जीर्णोद्धार होगा। क्या कभी पुनः कोई पुष्यमित्र शुंग जन्म लेगा...?? अनुत्तरित प्रश्न....!!! श्री दत्ता मन्दिर, उरी, कश्मीर। (चित्र-साभार) वैभवशाली सनातन धरोहर के भग्नावशेष...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म और हम

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भक्ति भी कला से मिलकर क्या - क्या रंग दिखाती है...!!! यशोदानंदन, नंदलाला, घनश्याम की यह एक अति दुर्लभतम मूर्ति है। यहां श्री हरि नारायण के पूर्णावतार श्री कृष्ण कन्हैया अष्टभुजाधारी हैं। आश्चर्यजनक रूप से अष्टभुजा होने पर भी द्वि-पाद ही हैं। कन्हैया के हाथों में शङ्ख, चक्र, गदा, पद्म, आदि सुशोभित हैं और प्रसन्न चित्त हो मुरली बजा रहे हैं। लीलाधर पर सभी आभूषणों, मुकुट, तोड़ी, कंगन, कुण्डल शोभित कर रहे हैं। कान्हा के अधरों पर मनमोहक मुस्कान है। जिन सनातनी शिल्पकारों ने इन्हें बनाया है उन्हें कोटि कोटि साधुवाद। (चित्र - साभार) ॐ देवकीनंदनाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्णः प्रचोदयात्।। ॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवा भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः। स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवाँसस्तनूभिर्व्यशेम देवहितं यदायुः॥ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः। स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु॥ ॐ शान्ति.! शान्ति.! शान्ति.!!! अद्वितीय सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म 🙏🚩 जय श्री द्वारकाधीश 🙏🌺 जय महाकाल🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म और हम

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यह विशाल नन्दी एक ही अखण्ड पाषाण शिला से निर्मित है (कर्नाटक)। इसके आभूषण पर ध्यान दें..!!!! ग्रेनाइट को सबसे कठोर माना जाता है (MOH'S SCALE OF HARDNESS - 8, FOR DIAMOND IT'S - 10, the hardest) किन्तु बिना किसी लेजर कटर के हमारे सनातनी पूर्वजों ने इसे कैसे उकीर्ण किए होंगे??? इस सूक्ष्म रचनाओं को गढ़ने हेतु किन यंत्रों का उपयोग किया गया होगा.??? क्योंकि उस समय में इलेक्ट्रिक ड्रिलर और कटर नहीं होता था। क्यों, रोमांचित करते हैं न?? यही है सनातन धर्म की समृद्ध विरासत...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म और हम

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यदि अन्य पंथ मजहब के अनुयायी के साथ हिनू की तुलना किया जाए तो परिणाम बड़ा ही वेदनादायक प्रतीत होता है। अन्य पंथ मजहब के अनुयायी जहाँ जीवन में समृद्ध होने पर अपने पंथ मजहब के प्रति समर्पण भाव से अधिक आकृष्ट व समर्पित होते हैं वहीं हिनू समृद्ध होते ही सिकुलरिज्म वायरस से संक्रमित हो अपने धर्म से छिटक कर दूर बहुत दूर होता जाता है। अन्य पंथ मजहब के अनुयायी अपने धार्मिक स्थल के देख-रेख को प्रथम प्राथमिकता देते हैं जबकि हिनू को समृद्ध होते ही घर, वाहन, मोबाईल फोन की ललक होती है धर्म स्थल के लिए सोचने का तो समय ही नहीं मिलता है। यह अति प्राचीन दुर्लभतम शिवलिङ्गम परळी (महाराष्ट्र) में सज्जनगढ़ गाँव के निकट प्राचीन मन्दिर के गर्भगृह में स्थापित है। यह मन्दिर किस कालखण्ड का है, इसका कोई निश्चित प्रमाण किसी के पास नहीं है। परन्तु मन्दिर की वास्तुकला बहुत ही अद्भुत है। मन्दिर के भीत, स्तंभों पर उकेरे हुए सूक्ष्म रचनाओं को बहुत ही निपुणता से गढ़ा गया है। मन्दिर के शिखर और कलश की कलाकृति सनातनी शिल्पकार के विशेषज्ञता को स्वतः प्रमणित करता है। शिवालय के बाहर ही नन्दी महाराज की प्रतिमा स्थापित की गई थ...

सनातन धर्म और हम

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सनातन धर्म के कलाकृतियों में प्रकृति स्वयं रँग भरकर उन्हें अतिसौन्दर्यपूर्ण बनाती हैं। श्री मरियम्मा मन्दिर विशाल टेप्पाक्कुलम जलाशय के तट पर वंडियूर में स्थित है। यह मन्दिरों के नगर मदुरै, तमिलनाडु में स्थित है। ग्रीष्म ऋतु में यह सम्पूर्ण जलाशय रिक्त पड़ा हुआ होता है और लोग इसे क्रीड़ास्थली के रूप में उपयोग किया करते हैं। किन्तु वर्षा ऋतु आते ही जलाशय आकण्ठ जल से आप्लावित हो जाता है और यह मनोहारी दृश्य प्रस्तुत करता है जिससे लोग अनायास ही आकृष्ट हो जाते हैं। मन्दिर की यह छवि कितनी नयनाभिरामी है। (चित्र-साभार) यह टेप्पाक्कुलम मीनाक्षी मन्दिर से लगभग तीन मील दूर है। मन्दिर द्रविड़ वास्तुशिल्प का अद्वितीय उदाहरण है। सौन्दर्यपूर्ण सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल🙏🔱🚩 #प्रेमझा