सनातन धर्म और हम
आज कल मिक्स ब्रीड गैंग जातिप्रथा को येन केन प्रकारेन अनुचित सिद्ध करने को भिन्न भिन्न प्रकार के कुतर्क दे रहा है और विष्टावमन किए जा रहा है। पर यह नहीं देखता कि जातिप्रथा ही वह प्राथमिक रक्षा पंक्ति रहा है जिन्होंने सदा से विधर्मियों के आक्रमण अत्याचार का मुंह तोड़ प्रत्युत्तर देते रहा है और सनातन संस्कृति परंपरा का रक्षा किया है। यह गैंग वैभवशाली जातिप्रथा के शौर्यपूर्ण कीर्तिमानों को झुठलाने का हर संभव प्रयास कर रहा है, परंतु यह निरर्थक ही सिद्ध होगा। ऐसा ही वैभवशाली इतिहास टांगीनाथ धाम मन्दिर का रहा है। मान्यता है कि संलग्न चित्र में जो त्रिशूल - परशु है वह श्री हरि नारायण के षष्ठ आवेशावतार श्री परशुराम जी के द्वारा धँसाया गया है। (चित्र - साभार) झारखंड के गुमला जनपद में भगवान परशुराम का यह तपस्थली रहा है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान परशुराम ने यहाँ देवाधिदेव महादेव को प्रसन्न करने हेतु घोर तपस्या की थी। यहीं उन्होंने अपने परशु को भूमि में गाड़ दिया था। इस परशु की ऊपरी आकृति कुछ कुछ त्रिशूल से मिलती है। इसी कारण यहाँ सनातनी श्रद्धालु इस परशु की पूजा के लिए आते है। परम् पिता ...