सनातन धर्म
श्री कोपिणेश्वर मन्दिर में स्थापित वृहत शिवलिङ्गम है। इनका वास्त्विक नाम कौपीन पर आधारित कौपिनेश्वर रहा होगा जो कालांतर में कोपिणेश्वर हो गया है। इस शिवलिङ्गम की ऊंचाई ५' फीट और परिधि भी ५' फीट हैं। श्री कोपिणेश्वर मन्दिर भगवान शिव को समर्पित हैं। श्री कोपिणेश्वर शिवलिङ्गम महाराष्ट्र के ही नहीं आर्यावर्त सबसे वृहद शिवलिङ्ग में से एक हैं। श्री कोपिणेश्वर महादेव ठाणे के संरक्षक देव हैं। मन्दिर का निर्माण शिलाहारा वंश के शासकों द्वारा करवाया गया था। मन्दिर में टूट फूट होने पर इसका जीर्णोद्धार एवं पुनर्निर्माण १७६० ई. में करवाया गया। आवश्यकता होने पर मन्दिर के गर्भगृह के समक्ष वृहत कक्ष को संग्रहित धन एवं दान एकत्र कर १८७९ में बनवाया गया। इस मन्दिर का सबसे तात्कालिक जीर्णोद्धार १९९६ ई. में किया गया है। मन्दिर में दो प्रवेश द्वार हैं - १. मसुंडा झील के सामने, २. जंभली नाका मंडी के अंदर। मन्दिर के प्रवेश द्वार पर नन्दी महाराज स्थपित हैं। मन्दिर परिसर में श्री ब्रह्मदेव, श्रीराम, श्री उत्तरेश्वर (काशी विश्वलिङ्गेश्वर), श्री दत्तात्रेय, माँ काली, माँ शीतला(थटकाई), श्री आञ्जनेय, गरूड़ ...