सनातन धर्म
परमपिता भगवान शिव के सुंदरेश्वर रूप की अर्धांगिनी माँ मिनाक्षी अम्माँ हैं। माँ मिनाक्षी अम्माँ को श्री हरि नारायण का अनुजा माना जाता है। इस प्रतिमा में माँ मिनाक्षी अम्माँ अपने दुर्लभतम, अद्वितीय, दिव्य रूप में हैं। (चित्र-साभार) यह प्रतिमा मीनाक्षी मन्दिर के पुडुमण्डपम, मदुरै, तमिलनाडु में हैं। जैसा कि सदैव ही होता रहा है, यह प्रतिमा भी म्लेच्छों के हीनभावना, शत्रुता और द्वेष का भेंट चढ़ कर खंडित हो गया है। सनातनी शिल्पकारों के कला निपुणता का यह जीवंत प्रमाण है। कला की उत्कृष्टता अनुमान इस प्रतिमा के मुकुट, आभूषणों और वस्त्रों को देखकर सहज हो जाता है। प्रतिमा के ठेहुना को ध्यान से देखें, वस्त्र के साथ अस्थि और मांसपेशियों के सूक्ष्मता को कितने सजीवता से दर्शाया गया है। मुखमण्डल पर मातृत्व और वत्सलता स्पष्ट रूप में परिलक्षित होता है। गर्व है अपने सनातनी पूर्वजों पर जिन्होंने इस जीवंत प्रतिमा का निर्माण किए। सर्व मङ्गल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्येत्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते॥ ॐ सर्वसम्मोहिन्यै विद्महे विश्वजनन्यै च धीमहि तन्नो शक्तिः प्रचोदयात॥ अतुलनीय सनातन धरोहर...!! जय सना...