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Showing posts from October, 2023

सनातन धर्म

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वामपंथी लुगदी उपन्यास लेखक (कथित इतिहासकार) तथा लहरू गैंग के चरण चाटूकारों ने किस प्रकार षड्यंत्र रच कर सनातनियों का मति हर लिया कि उन्हें अपने गौरवान्वित अतीत का भी भान नहीं रहा....!! इन "च्यूटीए" ने हमें पढ़ाया की प्रक्षेपास्त्र (मिसाइल) इत्यादि आयुद्ध आधुनिक युग में पश्चिमी देशों ने निर्मित किया है। उन शठमति, मूढ़मति से इस "मिसाइल और उसके लॉन्चर" की मूर्तियों को दिखा कर यही पूछना है कि "हे वर्णसंकर उत्पादों, यदि मिसाइल पश्चिमी देशों ने आधुनिक समय में बनाया है तो यह मूर्ति सहस्र वर्ष पूर्व ही सनातन धर्म के मन्दिरों में कैसे निर्मित और शोभायमान है.??? यह मिसाइल व लॉन्चर की मूर्ति हलेबिदू मन्दिर, कर्नाटक में है जो सहस्र वर्ष प्राचीन है। यह मूर्ति ही इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि प्राचीन काल में आर्यावर्त के विज्ञानियों को मिसाइल, लॉन्चर, ज्वलनशील वाणों, लॉन्चिंग पैड इत्यादि की तकनीक को विकसित करने का ज्ञान प्राप्त था और जिसे हमारे ग्रन्थों को चुराकर विदेशियों ने परतंत्रता के समय अपने देश ले जाकर और उस चोरी के ज्ञान का उपयोग करके ही आधुनिक आयुधों का निर्माण किय...

सनातन धर्म

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भगवान श्री हरि नारायण के कुल चौबीस अवतार माने जाते हैं। जिनमें दशावतार प्रमुख हैं। इनके अतिरिक्त चौदह अन्य अवतारों को माना जाता है। भगवान श्री हरि विष्णु के हयग्रीव अवतार को सोलहवें अवतार के रूप में माना जाता है। भगवान हयग्रीव का यह अतिदुर्लभ प्रतिमा "निंरा नारायण पेरुमल मन्दिर, तिरुथनकाल, शिवकाशी, तमिलनाडु में स्थापित है। यह मन्दिर भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित है। यहाँ भगवान विष्णु "निंरा नारायण" के रूप में व माँ लक्ष्मी "अरुणकमला महादेवी" के रूप में पूजे जाते हैं। भगवान हयग्रीव अवतरण की कथा इस प्रकार है..... एक दैत्य हयग्रीव ने माँ महामाया का घोर तपस्या कर माँ को प्रसन्न कर लिया। माँ महामाया उसे तामसी शक्ति के रूप में दर्शन दे वर माँगने को बोलीं। दैत्य हयग्रीव ने अमरत्व का वर माँगा तो माँ ने कहा कि अमरत्व का वरदान किसी को भी नहीं दिया जाता, कुछ और माँग लो। दैत्य हयग्रीव ने माँगा की उसकी मृत्यु हयग्रीव (मेरे) के हाथों ही हो। माता महामाया ने "एवमस्तु" कहा और अंतर्ध्यान हो गईं। अब तो दैत्य हयग्रीव प्रसन्नता से पागल ही हो गया क्योंकि वह स्वयं तो अपन...

सनातन धर्म

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देवभूमि.......🚩 जहाँ माँ गङ्गे ने आदिदेव महेश्वर की जटाओं से निकल सर्वप्रथम भूमि को स्पर्श किया......!! जहाँ हर हर गङ्गे के उद्घोष से सूर्यदेव के प्रथम किरण का अभिनन्दन होता है.....!! जहाँ अनगिनत घाट अपने प्राकृतिक सौंदर्य से भक्तों व दर्शनकर्ता का मन मोह लेते हैं......!! जहाँ "हर-की-पौड़ी" के सन्ध्या कालीन "गङ्गा आरती" से स्वर्गीय छटा पृथ्वी पर उतर आता है...!! उसी देवभूमि हरिद्वार, उत्तराखंड का रात्रिकालीन अलौकिक सौन्दर्यपूर्ण विहँगम दृश्य.....!! हर हर गङ्गे🚩 वैभवपूर्ण सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय माँ गङ्गे 🙏🌺 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म

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विशालकाय लोनार झील लगभग पचास सहस्र वर्ष पूर्व उल्कापिंड के पृथ्वी से टकराने से बना है। लोनार झील को "लोनार क्रेटर" भी कहा जाता है। लोनार का अर्थ "नमक की क्यारी" होता है। अत्यधिक लवण तथा "HALOARCHAEA" लवण प्रेमी जीवाणुओं के कारण इसके जल का रँग गुलाबी है। विश्व भर के विज्ञानी इस लवणीय जल के झील की ओर अनुसंधान हेतु आकर्षित होते हैं। लोनार झील मुम्बई से लगभग ५०० कि.मी. दूर बुलढाणा जनपद, महाराष्ट्र में है। लोनार झील के निकट भगवान महादेव के कुछ बारह मन्दिर रहे हैं। उन्हीं शिवालयों में से एक में यह सर्वव्यापी, सर्वशक्तिमान भगवान शिव की अति प्राचीन दुर्लभतम शिवलिङ्ग स्थापित हैं। अनुपम शिवलिङ्ग के समक्ष नन्दी महाराज चिरप्रतीक्षित अवस्था में प्रभु के ध्यान में मग्न बैठे हैं। शिवालय की संरचना जीर्ण-शीर्ण हो गई है तो भी शिवलिङ्ग तथा नन्दी सुरक्षित हैं। भगवान शिव के भक्त इस भग्न शिवालय में भी आराधना, उपासना हेतु सहर्ष आते हैं। पर्यटकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण धर्म स्थली है। महान सनातन धरोहर...!! ॐ नमः परम् शिवाय 🚩 जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा ...

सनातन धर्म

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आज बंगाल में सनातन धर्मावलंबियों के लिए परिस्थिति विषम है। बंगाल में एक प्रसिद्ध शिवालय है "श्री सिद्धनाथ महादेव मन्दिर"। श्री सिद्धनाथ महादेव मन्दिर, कूचबिहार नगर से सात कि.मी. दूर पंचरत्न ढलीबारी, पश्चिम बंगाल में स्थित हैं।(चित्र-साभार) श्री सिद्धनाथ महादेव मन्दिर में एक प्राचीन दुर्लभ शिवलिङ्ग स्थापित हैं जो चार शताब्दी प्राचीन है। श्री सिद्धनाथ महादेव मन्दिर के निर्माण का श्रेय राजा उपेन्द्र नारायण को जाता है जिन्होंने जो इस राज के १७१४ ई. से १७६३ ई. तक शासक रहे। राजा उपेन्द्र नारायण भगवान शिव के अनन्य भक्त थे। राजा उपेन्द्र नारायण के पश्चात इस मन्दिर का जीर्णोद्धार व पुनर्निर्माण राजा शिवेन्द्र नारायण के द्वारा १८०८ ई. में कराया गया। स्थानीय सनातन धर्मावलंबियों में श्री सिद्धनाथ महादेव मन्दिर अति महत्वपूर्ण हैं। शिवरात्रि पर्व तथा अन्य विशेष अवसरों पर यहाँ आराधना के लिए भक्तों की भीड़ रहती है। महत्वपूर्ण सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म

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आदि शिव हैं.!! अनन्त शिव हैं.!! सत्य शिव हैं.!! ॐ कार शिव हैं.!! शिव ही ब्रह्म हैं.!! शिव ही शक्ति हैं.!! विश्व के कोने कोने में शिव व्याप्त हैं.!! ये सौन्दर्यपूर्ण शिवालय आर्यावर्त से सुदूरवर्ती देश काम्पाला, युगाण्डा, अफ्रीका में स्थित हैं। (चित्र-साभार) यह शिव मन्दिर दुर्लभतम विशिष्टता अपने में समेटे हुए हैं। यह सम्पूर्ण शिव मन्दिर विस्मयकारी रूप से मात्र "पाषाण" से निर्मित है। इस अद्भुत मन्दिर के निर्माण में एक कण भी लौह तत्व का उपयोग नहीं किया गया है। यह शिव मन्दिर ज्योतिर्लिङ्ग श्री सोमनाथ मन्दिर के उपरांत आर्यावर्त से बाहर द्वितीय विराट शिवालय हैं। इस शिव मन्दिर का निर्माण युगाण्डा में बसे "गुजराती" लोगों के सौजन्य से सम्पन्न हुआ है। अद्वितीय विश्व सनातन धरोहर...!! ॐ नमः परम् शिवाय 🚩 जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म

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हमारे सनातनी पूर्वजों ने सघन अनुसंधान के पश्चात शिखा (चोटी) रखने का प्रावधान किया था। यह एक अमूल्य निधि का कोष हमें सौंपा गया था परन्तु आधुनिकता व पाश्चात्य अन्धानुकरण में हमने उस कोष की महत्ता को भुला दिया है। चोटी जिस स्थान पर रखा जाता है वह "बिन्दु चक्र" के स्थान पर है। "बिन्दु चक्र" आज्ञा चक्र और सहस्रार चक्र के मध्य होता है। पशुओं के लिए मूलाधार चक्र ही सर्वोच्च चक्र होता है अतः पशु मात्र तीन वस्तुओं का अभिलाषी होता है, भोजन, निद्रा और काम (सेक्स)। किन्तु मानव में मूलाधार चक्र प्रारम्भिक है ततपश्चात स्वाधिस्ठानचक्र, मणिपुरचक्र, अनाहत चक्र, विशुद्धि चक्र, आज्ञा चक्र और सहस्रार चक्र सर्वोच्च है। (आरोहण में) योगी अपने योग में पूर्णता प्राप्त करने हेतु आरोहण और अवरोहण दोनों को ही समग्र रूप से करते हैं तो ही प्रज्ञा प्राप्ति होती है। इसके कारण ही मनुष्य में मन, बुद्धि, अहंकार होते हैं। परिकल्पना है कि बिन्दु चक्र में चन्द्र व मणिपुर चक्र में सूर्य होते हैं। बिन्दु चक्र के चन्द्र से अमृत झरता है जिसका भक्षण मणिपुर चक्र के सूर्य द्वारा किया जाता है। बिन्दु चक्र के अमृ...

सनातन धर्म

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देवाधिदेव महादेव, सर्वशक्तिमान, सर्वग्राही, सर्वज्ञ, सर्वव्यापी हैं। यह चराचर जगत उन्हीं के अनुकम्पा से चलायमान है। वे जब तक नहीं चाहेंगे तब तक किसी भी वस्तु का विनाश सम्भव ही नहीं है। हिमाचल प्रदेश का यह अतिप्राचीन शिव मन्दिर इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। जब सबों ने इसे छोड़ दिया तो प्रकृति स्वयं इसे अपने अंक में भरकर इसे संरक्षित कर दिया है। अब तो इस वृक्ष के जड़ ही इस शिवालय के भीत और छत हैं। अनुपम शिवलिङ्ग मन्दिर में स्थापित है और अपना आशीर्वाद सबों पर बरसा रहे हैं। दुर्लभतम सनातन धरोहर....!! ॐ नमः परम् शिवाय 🚩 जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म

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महर्षि विश्वामित्र जिनसे मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम ने शिक्षा प्राप्त किए, उन्हें ब्रह्मर्षि कहलाने की अतीव अभिलाषा थी। किन्तु ब्रह्मर्षि वशिष्ठ उन्हें सदैव राजर्षि ही कहते थे। क्रोध से वशीभूत होकर महर्षि विश्वामित्र ने ब्रह्मर्षि वशिष्ठ की हत्या के लिए एक कटार लेकर ब्रह्मर्षि वशिष्ठ के आश्रम के एक पेड़ पर चढ़ बैठे और उचित समय की प्रतीक्षा करने लगे कि महर्षि वशिष्ठ शिष्यों को विदा कर एकान्त में हों और वे उनकी हत्या कर पाएँ। वह शरद पूर्णिमा की रात थी और चंद्रमा अपने सोलहों कलाओं से परिपूर्ण हो अपनी छटा बिखरे रहे थे। शिष्यों ने कहा :- गुरुवर, आज चन्द्रमा कितना सुन्दर दिखाई दे रहा है। महर्षि वशिष्ठ ने कहा : सौंदर्य देखना हो तो महर्षि विश्वामित्र के मुखमण्डल को देखो जो चन्द्रमा से भी अधिक सौंदर्य पूर्ण हैं। परन्तु उनके क्रोध ने इस सुंदरता पर ग्रहण लगा दिया है।  यह सुनकर महर्षि विश्वामित्र अवाक रह गए और पेड़ से उतर कर महर्षि वशिष्ठ के चरणों में गिर पड़े। महर्षि वशिष्ठ ने उन्हें पकड़ कर कहा :- "ब्रह्मर्षि विश्वामित्र, उठिये। महर्षि विश्वामित्र ने कहा ब्रह्मर्षि वशिष्ठ मैं तो आपकी हत्या...

सनातन धर्म

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सनातन संस्कृति की गौरवगाथा जितने जीवन्त रूप में "छेनी-हथौड़ी" से पत्थरों पर हमारे सनातनी पूर्वजों ने लिखा है उसका अन्य उदाहरण सम्पूर्ण विश्व में मिलना दुर्लभ ही है। इस मन्दिर के वस्तुशिल्प के समक्ष तो विश्व के सभी आश्चर्य बौने प्रतीत होते हैं। श्री अरुलमिगु अरुणाचलेश्वर मन्दिर, तमिलनाडु। (चित्र-साभार) बस.!! इन्हें अपने आँखों से निहारते रहें और स्वयं को भुलाकर अपने आराध्य देव में खो जाएँ.!! नमन है सनातनी पूर्वजों को जिन्होंने सम्पूर्ण निपुणता से इसका सृजन किया है। अतुलनीय सनातन धरोहर...!! ॐ नमः परम् शिवाय 🚩 जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म

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सम्पूर्ण आर्यावर्त में यह अनूठा और सम्भवतः इकलौता मन्दिर है जो स्वर्ण से निर्मित है। श्री महालक्ष्मी मन्दिर, वेल्लोर नगर, तमिलनाडु, के मलईकोड़ी पहाड़ों पर स्थित है। श्री महालक्ष्मी मन्दिर १५००० कि.ग्रा. स्वर्ण से निर्मित है। श्री महालक्ष्मी मन्दिर सौ एकड़ से अधिक विस्तृत भू भाग पर बना हुआ है। इस मन्दिर की एक-एक कलाकृति सनातनी शिल्पकार के हाथों से बना है। प्रतिदिन लाखों की संख्या में भक्तगण पूजन, आराधना के लिए आते हैं। माता महालक्ष्मी का आशीर्वाद सभी भक्तजनों को प्राप्त होता है। भक्तों के मध्य यह मन्दिर आकर्षण का केंद्र है। वैभवशाली भव्य सनातन धरोहर...!! जय माँ महालक्ष्मी🙏🌺 जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🌺🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म

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इस धरा पर यदि कुछ अलौकिक, स्वर्गीय, व दिव्य है तो वह सनातन संस्कृति के दुर्लभ मन्दिर हैं जिन्हें देखकर भी प्यास नहीं मिटती, दृष्टि नहीं हटती.!! श्री थानुमालयन मन्दिर, तमिलनाडु। (चित्र-साभार) अपने अद्भुत वास्तुशिल्प से भक्तों, दर्शनकर्ताओं के मन को मोहित कर लेते हैं। वैभवपूर्ण सनातन धरोहर...!! ॐ नमः परम् शिवाय 🚩 जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म

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खड़े स्तम्भों पर बने हुए लघु मूर्तियों, ज्यामितीय आकृतियों, पुष्प-पत्तों को देखिए। सहस्रों वर्ष पूर्व आधुनिक तकनीक रहित इन निर्माण में कितना परिश्रम और समय लगा होगा.??  सोचकर देखिए.! सोचकर ही रोमांच होता है ना.!! किन्तु सनातनी शिल्पकारों ने अपनी शिल्पकुशलता से इस श्रमसाध्य कार्य को अतुलनीय निर्माण में परिवर्तित कर समस्त विश्व के लिए रख छोड़े हैं कि आइए देखिए और इसमें खो जाइए.!! बग्गा रामलिंगेश्वर स्वामी मन्दिर, तादिपत्री, अनन्तपुर जनपद, आन्ध्रप्रदेश। (चित्र-साभार) बग्गा रामलिंगेश्वर स्वामी मन्दिर भगवान शिव को समर्पित एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। शिव भक्तों के लिए यह आराधना, उपासना का प्रमुख केंद्र है। वैभवशाली सनातन धरोहर...!! ॐ नमः परम् शिवाय 🚩 जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म

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भगवान श्री हरि विष्णु शेषशायी हैं। वे हरिशयन एकादशी के उपरांत चार मास तक शयन करते हैं और पुनः देवोत्थान एकादशी को अपने बैकुण्ठ से सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के कार्य संचालन हेतु निद्रा का त्याग करते हैं। जब जब धर्म की हानि होती है श्री हरि नारायण अवतरित हो कर सद रक्षण और खल निग्रह करते हैं। समस्त ब्रह्माण्ड में सभी जीवों के आनंद के मूल वही सच्चिदानंद हैं। भगवान अनन्त का एक दुर्लभतम प्रतिमा जिसमें श्रीमन्नारायण शेषनाग के कुण्डली पर शयन कर रहे हैं।(चित्र-साभार) सभी देव, ऋषि आदि स्वस्तिवाचन कर रहे हैं। यह दक्षिण भारत का चौदहवीं शताब्दी का निर्माण माना जाता है। वतर्मान में यह अद्भुत प्रतिमा राष्ट्रीय संग्रहालय, स्कॉटलैंड, एडिनबर्ग, यूनाईटेड किंगडम में रखा है। अमूल्य सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म 🙏🚩 ॐ नमो नारायणाय 🚩 जय श्रीमन्नारायण 🙏🌺 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म

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आपने अखण्ड पाषाण शिला से निर्मित प्रतिमाएँ, मूर्तियाँ, क्रीड़ा सामग्री इत्यादि बहुतायत में देखे होंगे किन्तु क्या पाषाण के एक ही चट्टान से निर्मित सम्पूर्ण जोड़-रहित अखण्ड मन्दिर देखा है.?? तो सोचने को विवश हो जाएँगे। परन्तु सनातनी शिल्पकार पूर्वजों ने इस असम्भव को भी सम्भव कर दिखाया और वो भी आज से सहस्रों वर्ष पूर्व ही। श्री पाएर (पाएच) शिव मन्दिर वह अकल्पनीय दुर्लभ मन्दिर है जो अखण्ड पाषाण शिला से निर्मित है।(चित्र-साभार) श्री पाएर शिव मन्दिर, पुलवामा, कश्मीर में है। इस मन्दिर में कहीं भी जोड़ नहीं है। मन्दिर में अनुपम शिवलिङ्ग स्थापित हैं। मन्दिर में सुन्दर आकृतियों को उकीर्ण किया गया है। देवशिल्पी विश्वकर्मा के आशीर्वाद से ही सनातनी वास्तुशिल्पकारों द्वारा इस मन्दिर का निर्माण सम्भव हुआ होगा। इस मन्दिर को लगभग १५०० वर्ष प्राचीन माना जाता है। कभी इस मन्दिर में भी रुद्राष्टकम का पाठ किया जाता था। कभी यहाँ भी शिव-भक्त आस्था से अविभूत हो रूद्राभिषेक करते थे। किन्तु रेगिस्तानी जाहिलों के वर्णसंकरों के रक्तपात से यह स्थान सनातनी विहीन हो गया। आज यह मन्दिर निर्जन और सौंदर्य विहीन सा हो गया ह...

सनातन धर्म

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जब माँ दुर्गा का अवतरण हुआ तो असुर संहार के लिए सभी देवताओं ने उनमें अपनी मातृशक्ति को प्रेषित कर दिया था, यथा श्री विनायक ने देवी विनायकी के रूप में, श्री नरसिंह ने देवी नृसिंहि के रूप में, श्री वराह ने देवी वाराही के रूप में इत्यादि..!! देवी वाराही का एक सुविख्यात मन्दिर "पञ्च सागर शक्तिपीठ" वाराणसी, उत्तरप्रदेश में है। इस मन्दिर में देवी वाराही की उपासना वैष्णव, शैव, शाक्त सभी परम्पराओं के भक्त करते हैं। ऐसी मान्यता है कि यहाँ देवी सती के नीचे दाँत गिरे थे अतः इसे शक्तिपीठ भी माना जाता है। पञ्च सागर मन्दिर में माँ शक्ति को देवी "वाराही" के रूप में तथा भगवान शिव को "महारुद्र" अर्थात आवेशावतार के रूप में पूजन आराधना किया जाता है। इस मन्दिर की एक प्रमुख विशिष्टता है कि यह दिन में मात्र दो घण्टे के लिए पूजन के लिए खुलता है और पुनः सम्पूर्ण दिन के लिए बन्द कर दिया जाता है। ऐसी मान्यता है कि माँ वाराही रात्रि में वाराणसी की रक्षा स्वयं करती है। भक्तों के आस्था का यह मन्दिर प्रमुख केन्द्र है। भव्यतापूर्ण सनातन धरोहर...!! या देवि सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता...

सनातन धर्म

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सनातन वास्तुशिल्प कला का आदर्श उदाहरण यह नन्दी महाराज हैं। (चित्र-साभार) अखण्ड पाषाण शिला (श्यामवर्णी ग्रेनाइट) से इस अतिदुर्लभ प्रतिमा का निर्माण किया गया है। सम्पूर्ण प्रतिमा पर सूक्ष्म कलाकृतियाँ उकीर्ण हैं। आकर्षक रूप में "ॐ" का निर्माण पृष्ठ भाग में किया गया है। यह नन्दी प्रतिमा श्री राघवेश्वर शिव मन्दिर, कुम्भरी महाराष्ट्र में है। श्री राघवेश्वर शिव मन्दिर अति प्राचीन है। माना जाता है कि श्री राघवेश्वर शिव मन्दिर का निर्माण तेरहवीं शताब्दी में हुआ है। श्री राघवेश्वर शिव मन्दिर गोदावरी नदी के तट पर स्थित है। श्री राघवेश्वर शिव मन्दिर भगवान महादेव के भक्तों के आस्था के प्रमुख केन्द्र हैं। वैभवशाली सनातन धरोहर...!! ॐ नमः परम् शिवाय 🚩 जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म

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विश्व के सभी सातों आश्चर्य (seven wonders) जिसके चौखट पर आकर अपने दम तोड़ देंगे, ये वो अकल्पनीय सनातन संस्कृति की सर्वोत्कृष्ट कृति है। (Zoom करके अवश्य देखें) यह सनातनी शिल्पकार पूर्वजों के कर कमलों द्वारा मध्यकाल दसवीं शताब्दी में निर्मित माना जाता है। (चित्र-साभार) यह कभी देवाधिदेव महादेव का भव्य मन्दिर हुआ करता था। किन्तु अब मन्दिर के कोई चिह्न विद्यमान नहीं हैं। अपने सनातनी पूर्वजों के वास्तुशिल्प को देखकर एक बात स्पष्ट है कि जहाँ विश्व के वास्तुशिल्प की कल्पना का अन्त होता है वहीं से हमारे सनातनी वास्तुशिल्प का सृजन आरम्भ होते हैं। अठारहवीं शताब्दी में धौलपुर के शासक ने भग्न मन्दिर के पत्थरों को अपने भवन निर्माण के लिए उपयोग कर लिए। अब इस अद्वितीय मन्दिर के मात्र प्रवेश मण्डपम ही बच रहे हैं। ये गढ़ी पदावली, मोरेना, मध्यप्रदेश में स्थित हैं। इसके आधार से छत तक सम्पूर्ण भीत मूर्तियों, कलाकृतियों, बेल-बूटों की संरचनाओं से भरे पड़े हैं। इनमें त्रिदेव, सृष्टिकर्ता श्री ब्रह्मदेव, पालनकर्ता श्रीमन्नारायण, सृष्टि के संचालके व संहारक देवाधिदेव महादेव अप्रतिम रूप से निर्मित हैं। इनमें जो महा...

सनातन धर्म

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जिसे चमत्कार भी नमस्कार करते हैं वही अकल्पनीय सनातन शिल्पकला है। माँ नारायणी की इस प्रतिमा में सनातनी पूर्वजों की शिल्पकुशलता अपने उत्कृष्ट रूप में शोभायमान है। तो भी वामपंथियों और लहरू गैंग के चरण-चाटूकारों को सनातन संस्कृति का वास्तुशिल्प प्रभवित नहीं कर पाए। यह दुर्भाग्य सनातन संस्कृति के शिल्प कला का नहीं अपितु उन वामपंथियों और लहरू चमचों का रहा है, जिसके भाग्य में ही इनका आंनद लेना नहीं लिखा है। अन्यथा सम्पूर्ण विश्व इसे चमत्कार ही मानेंगे और जानेंगे क्योंकि आधुनिक युग के तकनीकों से भी इस प्रतिमा की अनुकृति पुनर्निर्माण असम्भव ही प्रतीत होता है। यह माँ महिषासुरमर्दिनि का दुर्लभतम प्रतिमा हलेबिदू मन्दिर, कर्नाटक में स्थित है। (चित्र-साभार) इस प्रतिमा को zoom करके देखें और उस वैभवशाली अतीत की कल्पनाओं को मग्न हो जाएँ। वैभवपूर्ण सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म 🚩 जय जय माँ जगदम्बे 🙏🌺 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

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सम्पूर्ण विश्व में भाँति-भाँति के रँग-रूप, आकर-प्रकार के शिवलिङ्ग प्राप्य हैं। किन्तु, यह दुर्लभतम शिवलिङ्ग अपने आप में अनूठा और अप्रतिम हैं। (चित्र-साभार) इस अद्भुत शिवलिङ्ग में नन्दी महाराज व कूर्म (कच्छप/कछुआ) संयुक्त रूप में निर्मित हैं। यह अतिप्राचीन भगवान देवाधिदेव महादेव को समर्पित श्री गङ्गेश्वर महादेव मन्दिर में स्थापित हैं। श्री गङ्गेश्वर महादेव मन्दिर,  गङ्गवा ग्राम, दांता तालुका, बनासकांठा जनपद गुजरात में स्थित हैं। शिवलिङ्ग में स्पष्ट रूप में नन्दी महाराज व कूर्म दृश्यमान हैं। मन्दिर भग्न स्थिति में ही है। मन्दिर के शिखर भी खण्डित हैं। मात्र गर्भगृह सुरक्षित है जहाँ यह अनुपम शिवलिङ्ग स्थापित हैं। इस मन्दिर की भव्यता का गर्भगृह को देखकर कोई भी अनुमान लगा सकता है कि अपने गौरवपूर्ण अतीत में यह मन्दिर कितना भव्य रहा होगा.!! इस मन्दिर के गर्भगृह के एक भीत पर श्रीमन्नारायण के दशावतार उकीर्ण हैं। इनमें मत्स्यावतार, कूर्मावतार, वाराहावतार, नरसिंहावतार, वामनावतार, श्री परशुराम अवतार, श्री राम अवतार, श्री बलभद्र अवतार तथा श्री कृष्ण अवतार हैं। आश्चर्यजनक रूप से इनमें श्री कल्कि ...

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परमपिता एवं जगतमाता उमामहेश्वर के समस्त परिवार का विग्रह अनेक शिवालयों में सुलभ ही दर्शन हो जाते हैं। परन्तु गणाध्यक्ष, विघ्नहर्ता, पार्वतीनन्दन श्री गणपति भैय्या के समस्त परिवार का एक साथ दर्शन सम्भवतः इसी एकमात्र देवालय में होते हैं। (किसी अन्य मंदिरों में है तो बता कर ज्ञानवर्धन करें।) यह दुर्लभ दृश्य श्री विद्या धाम मन्दिर, इंदौर, मध्यप्रदेश में है। इस देवालय में श्री गणेश भैय्या अपनी अर्धांगिनियों, पुत्रों, पुत्री, पुत्रवधुओं और पौत्रों संग विराजमान हैं। यहाँ श्री गणेश भैय्या अपनी भार्या प्रजापति विश्वकर्मा की पुत्रियों रिद्धि एवं सिद्धि के संग हैं। उनके संग सिद्धि से पुत्र क्षेम एवं रिद्धि से पुत्र लाभ विराजमान हैं। क्षेम को ही शुभ के नाम से जाना जाता है। सम्पदा प्राप्ति हेतु इन्हीं शुभ-लाभ का नाम अंकित किया जाता है। उनके संग उनकी पुत्रवधुएँ तुष्टि एवं पुष्टि विराजमान हैं। उनके संग पौत्र द्वय आमोद एवं प्रमोद विराजमान हैं। साथ में उनकी पुत्री व क्षेम लाभ की अनुजा संतोषी माता भी विराजमान हैं। यह एक अनुपम दिव्य आनन्ददायक दृश्य है। बुद्धिदाता विनायक गणपति सभी सनातनी स्नेहीजनों को आशी...

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गर्व करें कि हमारे सनातनी शिल्पकारों को सम्भवतः पाषाण को भी गला कर मूर्ति गढ़ने की कला ज्ञात थी। अन्यथा जो कलाकृतियाँ मिट्टी या धातु से भी बनाया जाना असम्भव ही है, उन मूर्तियों/प्रतिमाओं/संरचनाओं को भी वे पाषाण से गढ़ कर हमें सौंप गए हैं और जो आज विश्व भर को अपने अनूठे अकल्पनीय निर्माण से चमत्कृत करता रहता है। मन्दिरों और देव विग्रहों की उत्कृष्टता को छोड़ दें और इन आभूषणों को ध्यान से देखें.!! क्या आधुनिक शिल्पकला से इसकी प्रतिकृति को धातु या मृदा से भी बनाना सम्भव है.??? ध्यान रहे.!! यह अखण्ड पाषाण शिला के एक ही चट्टान से निर्मित है। आपका उत्तर "नहीं" में ही होगा। गौरवान्वित होइए अपने सनातनी पूर्वजों के शिल्प कुशलता पर की उन्होंने इन आभूषणों को पत्थर से गढ़ कर असम्भव को भी सम्भव बना दिए। यह अतुलनीय आभूषण द्वारपालक मूर्ति का है जो श्री होयसलेश्वर मन्दिर, हलेबिदू, कर्नाटक में है। (चित्र-साभार) जब मन्दिर की बाह्य सज्जा ऐसा उत्कृष्ट है तो अपने सम्पूर्ण वैभवशाली काल में यह कितना अकल्पनीय रहा होगा.?? कोटि कोटि नमन है उन अनाम सनातनी पूर्वजों को जिन्होंने सहस्रों वर्ष पूर्व इन्हें निर्...

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यह सर्वज्ञात है कि वामपंथियों और लहरू के चरण-चाटूकारों ने आर्यावर्त के महान संस्कृति को अपमानित करने के लिए सम्पूर्ण विश्व को 'चिल्ला-चिल्ला' कर बताया कि "इस देश में विदेशी लुटेरे के आक्रमण से पूर्व एक सूई का भी निर्माण नहीं किया जाता था"। किन्तु यह प्रश्न अनुत्तरित है कि यदि इस देश में एक सूई निर्माण का भी सामर्थ्य और सम्पदा नहीं था तो सबसे पहले विधर्मी म्लेच्छ, पुनः विधर्मी पुर्तगाल, फ्रांसीसी, अंग्रेज लूटेरे इस देश में क्या "मराने व खोदवाने" बारम्बार आता था.??? इस देश के गौरवशाली अतीत के भग्नावशेष भी आजतक लोगों को सम्मोहित कर रहे हैं। इस अतिदुर्लभ श्री योग लक्ष्मी-नरसिंह स्वामी जी की प्रतिमा को ही देखें, यह प्रतिमा एक ही अखण्ड पाषाण शिला से निर्मित है।(चित्र-साभार) इस प्रतिमा में प्रयुक्त शिल्प विधा कितना उत्कृष्ठ रहा है की आज सहस्रों वर्ष पश्चात भी यह सनातनी शिल्पकुशलता दर्शनकर्ता को रोमांचित/आह्लादित करता है। यह अतुलनीय प्रतिमा हम्पी, कर्नाटक में है। इस प्रतिमा को विधर्मी रेगिस्तानी पशुओं ने सनातन धर्म से अपने जन्मप्रदत्त शत्रुता के कारण १५६५ ई. में क्ष...

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सम्पूर्ण सृष्टि में पुरुष तत्व static हैं और प्रकृति तत्व kinetic. यह सम्पूर्ण सृष्टि आदिशक्ति से ही चलायमान है। माँ आदिशक्ति के एक रूप "माँ पाताल भैरवी" का यह दुर्लभतम विग्रह छत्तीसगढ़ में हैं। (चित्र-साभार) माँ पाताल भैरवी का यह विग्रह भूतल से सोलह फीट नीचे स्थापित हैं। माँ पाताल भैरवी का यह विग्रह पन्द्रह फीट ऊँची और ग्यारह टन वजनी हैं। यह भव्य माँ पाताल भैरवी विग्रह, बर्फानी धाम, राजनंदगांव, छत्तीसगढ़ में स्थित हैं। भक्तों में इनके दिव्य रूप का अखण्ड आकर्षक है। भक्त नकारात्मकप्रभावों से मुक्ति के लिए माँ के शरण में आते हैं और माँ से परम् आनन्द का प्रसाद पाते हैं। अद्भुत सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म 🙏🚩 जय माँ भुवनेश्वरी🙏🌺 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

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परमपिता परमेश्वर भगवान महादेव का विग्रह सामान्यतः पूर्वाभिमुख व जगन्माता देवी माँ पार्वती का पश्चिमाभिमुख होते हैं। अर्थात शिव मन्दिर का मुख पूर्व दिशा की ओर और पार्वती मन्दिर का मुख पश्चिम दिशा में खुलता है, और दोनों ही मन्दिर एक दूसरे के आमने सामने होते हैं। किन्तु यह एक दुर्लभतम मनोहारी शिव विग्रह है जो दक्षिणाभिमुख है...!!! श्री दक्षिणामूर्ति महादेव, श्री काँची कैलासनाथर मन्दिर, पिल्लैयारपलायम, कांचीपुरम, तमिलनाडु। यह दक्षिणाभिमुख शिव का कैलासनाथर मन्दिर सातवीं शताब्दी का बना आकर्षक मन्दिर हैं। अपने दुर्लभतम कलाकृतियों और वास्तुशिल्प के कारण मन्दिर दर्शकों को मन्त्रमुग्ध कर देता है। दक्षिणामूर्ति के रूप में भगवान शिव गुरुश्रेष्ठ परम् ब्रह्म हैं और अपने आशीर्वाद से विश्व का कल्याण कर रहे हैं। मन्दिर में निर्मित लघु मूर्तियाँ, गज व सिंह की मूर्तियाँ अपने निर्माणकर्ता के निपुणता और प्रवीणता को सुस्पष्ट रेखांकित करते हैं। (चित्र - साभार) भगवान शिव का विग्रह भक्तों को अपने अनुपम रूप से सम्मोहित करते हैं। अतुलनीय सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा ...

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आदौ राम तपोवनादिगमनं, हत्वा मृगं कंचनं। वैदीहीहरणं जटायुमरणं, सुग्रीवसंभाषणम्॥ बालीनिर्दलनं समुद्रतरणं, लंका पुरीदाहनम्। पश्चाद् रावण कुम्भकर्ण हननं, एतद्धि रामायणम्॥ यह अद्भुत दुर्लभतम प्रतिमा मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम, आञ्जनेय महावीर हनुमान और संग में माता जानकी सीता जी की है। यह प्रतिमा हमारे सनातनी पूर्वजों द्वारा निर्मित अमूल्य धरोहर है जो सनातन कलाकृति की अनुपम भेंट है जिसे वे अपने आधुनिक संतति को सौंप गए हैं। यह मूर्ति श्री वैकुण्ठनाथ पेरुमल मन्दिर, तूतीकोरिन, तमिलनाडु में है। ग्यारहवीं शताब्दी में निर्मित इस मूर्ति के परिधान के निर्माण में शिल्पकार के निपुणता को देखें। इस सम्पूर्ण निर्माण को एक ही अखण्ड प्रस्तर शिला से काट कर गढ़ा गया है। इसमें कोई जोड़ नहीं है। (चित्र - साभार) अब एक बार अवश्य ही विचार करें और निर्णय लें कि वामियों/कांगियों/लिब्रानडों के कहे हुए शब्दों कि 'इस देश में मलेच्छों विधर्मियों के आक्रमण से पहले कुछ नहीं बनता था' को क्या समझा जाए.?? यदि मलेच्छों विधर्मियों के आने से पहले आर्यावर्त में कुछ भी नहीं था तो तो ये लोग बार बार यहाँ आक्रमण कर किसलिए ...

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यह अतुलनीय अतिप्राचीन श्री विश्वेश्वर महादेव मन्दिर है। इसे स्थानीय लोगों के द्वारा बाशेश्वर महादेव मन्दिर भी पुकारा जाता है। श्री विश्वेश्वर महादेव मन्दिर, बजौरा, कुल्लू, हिमाचल प्रदेश में है। श्री विश्वेश्वर महादेव मन्दिर, भगवान शिव को समर्पित है। इस मन्दिर का निर्माण नवीं शताब्दी में किया गया था। यह मन्दिर कुल्लू घाटी का सबसे बृहत पाषाण मन्दिर है।  इस मन्दिर में एक दुर्लभ विशाल शिवलिङ्गम स्थापित हैं जो संयुक्त रूप से भगवान परमपिता देवाधिदेव महादेव व जगतमाता माँ पार्वती के प्रतिनिधित्व करते हैं। यह मन्दिर पहाड़ी शैली में निर्मित एकल कक्ष का मन्दिर है। इस मन्दिर के चारों ओर बरामदे हैं। मन्दिर के पाषाण दीवारों पर आकर्षक पुष्प कलाकृतियों का निर्माण किया गया है। अन्दर की कलाकृतियाँ सूक्ष्म रूप से उत्कृष्टतापूर्ण रूप में किया गया है। इस मन्दिर परिसर में और भी लघु-मन्दिर हैं जो भगवान श्रीमन्नारायण, देवी श्री लक्ष्मी, विघ्नहर्ता श्री गणेश जी को समर्पित हैं। इसके उत्कृष्ट वास्तु व शिल्पकला के कारण इसे संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है। वैभवशाली सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल...

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ख़ैबर पख्तूनख्वा में स्थित परमपिता देवाधिदेव महादेव का एक मन्दिर..!!! इस भक्तों के परिधान पर मत जाइए। इन्हें "उनके" सदृश्य परिधान धारण करना इनकी दुर्भाग्यपूर्ण विवशता है। ये भी सनातन संस्कृति के पालन करने वाले सनातनी बन्धु ही हैं।(चित्र-साभार) जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

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यह सर्वमान्य सिद्धांत है कि यदि किसी को किसी देश का इतिहास पढ़ना होता है तो सबसे उत्तम ज्ञान पुस्तकालय में इतिहास की पुस्तकों से ही प्राप्त होता है। परन्तु यदि आपमे आर्यावर्त के गौरवशाली इतिहास को जानने की तीव्र उत्कण्ठा है तो आप कभी भी भूले से भी उसे पुस्तकालय में जाकर इतिहास के पुस्तकों में नहीं ढूँढें। क्योंकि यहाँ इतिहास की पुस्तकों से जो ज्ञान आपको प्राप्त होगा वह अधकचड़ा, विकृत छद्म-ज्ञान ही आपको प्राप्त होगा जो आपको भ्रमित कर देगा। आर्यावर्त के समग्र प्राचीन इतिहास के ज्ञान के लिए आप किसी प्राचीन मन्दिरों में जाएँ। क्योंकि आर्यावर्त के ये मन्दिर मात्र भक्ति व आराधना के स्थल नहीं हैं अपितु एक सम्पूर्ण इतिहास का पुस्तकालय है जो वास्तविक ज्ञान के लिए ही प्राचीन काल से खड़े हैं। ये मन्दिर आपको यहाँ की प्राचीन संस्कृति, सामाजिक/आर्थिक /राजनैतिक जीवन, वैभव, मित्र - शत्रु, कला, साहित्य, विज्ञान, रहन सहन, खान पान का सामग्रता से विस्तृत जानकारी देगा। ऐसे ही इतिहास से भरे एक...... अकल्पनीय, अद्वितीय श्री कृष्ण मन्दिर का पुष्करणी, हम्पी, कर्नाटक। (चित्र - साभार) यह विशालकाय पुष्करणी स्वयं वि...

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सनातनी हिनूओं का दुर्भाग्य देखिए कि इसने जिसको भी मत (वोट) देकर दिल्ली का सिंहासन सौंपा वह सिंहासन का भरपूर आनन्द उठाया। किन्तु सनातनी वीर और वीरांगनाओं के शौर्य को सम्मानित करने के स्थान पर "विश्वासीकरण" में ही लगा रहा। फिर वो तुष्टिकरण सिरमौर कांगी हो जिसने ५६ साल राज किया या हिनुवादी/रास टर्र वादी पार्टी जिसने १५ साल राज किया और आज भी सिंहासन पर है। यह परित्यक्त स्थल महान मराठा वीरांगना व छत्रपति शिवाजी महाराज की बहू "रानी ताराबाई" की है।(चित्र-साभार) रानी ताराबाई प्रथम मराठा वीरांगना थी जिन्होंने उत्तर में छापे मारकर म्लेच्छ विधर्मी मलेच्छ मुगल औरंगजेब को पराजित किया और उस आततायी से मालवा के नगरीय क्षेत्रों को जीत लिए। आज सनातनी मन्दिरों के चढ़ावे व सनातनी के कर (टैक्स) से पुरातत्व विभाग विधर्मी लुटेरे औरंगजेब के महल के पुनर्निर्माण में धन व्यय करने में व्यस्त होता है परन्तु उसे इन वीरांगना की जीर्ण शीर्ण समाधि स्थल नहीं दिखाई देता है। केंद्र और राज्य दोनों ही स्थानों डबल इंजन वाली कथित हीनू-वादी/रास टर्र वादी पार्टी का राज रहा है। किन्तु उन्हें ह.ज हाउस बनवाने क...

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म्लेच्छों का काम ही विनाश रहा है। विधर्मी का सभी कुकर्म विनाश से ही प्रेरित रहा है। अतः सनातनी पूर्वजों के सदृश्य महानता विधर्मी म्लेच्छों को प्राप्य नहीं रहा। वहीं सनातनी पूर्वज सदैव सृजन को ही संकल्पित रहे हैं। यह जो कलाकृति देख रहे हैं किसी भीत पर निर्मित नहीं है। अपितु मन्दिर के भीतर छत पर निर्मित है। (चित्र-साभार) इस मन्दिर का निर्माण होयसल साम्राज्य में १११३ - १११४ ई. में हुआ है। जिस काल में पश्चिमी देश त्रिआयामी कला से अनभिज्ञ थे उस काल में सनातनी वास्तु शिल्पकारों ने पाषाण पर त्रिआयामी मूर्तियों को गढ़ दिए हैं। और ध्यान रखें कि यह टुकड़ों में बना कर नहीं जोड़ा गया है अपितु एक ही अखण्ड पशन शिला से निर्मित है। श्री लक्ष्मी देवी मन्दिर, कर्नाटक, होयसल वास्तुशिल्प की सबसे प्राचीन मन्दिरों में से यह एक है। क्या वामपंथियों के गैंग समकालीन विश्व के किसी अन्य देशों में ऐसा दुर्लभ निर्माण कार्य बता सकता है.?? क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि किन उन्नत तकनीक का उपयोग इस अद्भुत शिल्प के निर्माण में किए गए हैं। अकल्पनीय सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म 🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा ...

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पुरुलिया का नाम दो दशक पूर्व वायुयान से अवैध आयुध गिराए जानें के कारण बहुत चर्चा में रहा था। किन्तु प्राचीन काल में पुरुलिया महत्त्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग हुआ करता था। पुरुलिया छोटानागपुर-पठार का ही भाग है जो पश्चिम बंगाल में है। कभी पुरुलिया के बुद्धपुर में मन्दिरों का समुच्चय हुआ करता था। अब अधिकांश मन्दिर काल के गाल में समा चुके हैं। परन्तु अभी भी उस समुच्चय में से भगवान शिव का एक मन्दिर बचा हुआ है। इस शिव मन्दिर में यह दुर्लभ प्राचीन शिवलिङ्ग स्थापित है। शिव मन्दिर, बुद्धपुर, निकट मानबाजार, पुरुलिया, पश्चिम बंगाल। माना जाता है कि यह अद्भुत शिवलिङ्ग बारहवीं शताब्दी का है। शिवलिङ्ग की आकृति आकर्षक है और जल-लहरी (अरघा) चतुष्कोणीय है। इस दुर्लभतम, अप्रतिम, दिव्य शिवलिङ्ग की छटा निराली है। ऐसा प्रतीत होता है कि अलौकिक तेज इस अनुपम शिवलिङ्ग से निकल कर चहुँ ओर आलोकित कर रहे हैं। अतुलनीय सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

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आर्यावर्त में अखण्ड पाषाण शिला से निर्मित यह सम्भवतः सबसे विराट 'ऐश्वर्य गणपति" का विग्रह हैं। किन्तु अतिप्राचीन होने के उपरांत भी यह आज भी एक मन्दिर की प्रतीक्षा में हैं। (चित्र-साभार) यह सहस्रों वर्षों से खुले आकाश के नीचे प्रकृति के झंझावातों को सह रहे हैं। स्थानीय निवासियों की मानें तो चुनाव के समय राजनीतिक दलों के मुखिया ने मन्दिर निर्माण का आश्वासन दिया था। परन्तु कहावत है न कि 'रात गई बात गई" और काम निकलने के पश्चात कौन किसको जानता है। यह ऐश्वर्य गणपति जी हैदराबाद से लगभग ११० कि.मी. की दूरी पर एक अल्प ज्ञात गाँव एवञ्च (अवंच) में स्थापित हैं। ऎसी मान्यता है कि इनका निर्माण चालुक्यों ने ग्यारहवीं शताब्दी में करवाया था। यह ऐश्वर्य गणपति की प्रतिमा पच्चीस फीट ऊँची है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश के सबसे विशाल ऐश्वर्य गणपति जी के बारे में अधिकांश सनातनी लोगों को ज्ञात नहीं है। दुर्लभतम सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म 🙏🚩 जय विघ्नहर्ता विनायक जी🙏🌺 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

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नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय, भस्माङ्गरागाय महेश्वराय। नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय, तस्मै न काराय नमः शिवाय॥ यह दुर्लभ भगवान शिव की प्रतिमा इस बात का प्रमाण है कि सम्पूर्ण विश्व में कोई भी महादेश एशिया, अफ्रीका, यूरोप, अमेरिका हो या जावा, थाईलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया या अरब देश सभी सनातन धर्म को ही मानते और सनातन संस्कृति से ही संचालित होते थे। यह प्रतिमा सहस्रों वर्ष प्राचीन हैं। यह भगवान शिव की प्रतिमा विश्व के सबसे इस्लामी अधिसंख्यक देश इंडोनेशिया की है। (चित्र-साभार) इस अखण्ड पाषाण प्रतिमा में भगवान शिव संग भैरव जी, श्री गणपति जी, नन्दी महाराज जीवन्त रूप में निर्मित हैं। इस प्रतीमा के मुखमंडल, आभूषण, त्रिशूल, वस्त्र परिधान, नन्दी महाराज की पूंछ आदि को गढ़ने में किए गए उत्कृष्ट शिल्पकारी कितने मनमोहक प्रस्तुति हैं। धन्य हैं सनातनी पूर्वज जिन्होंने इस अप्रतिम प्रतिमा का निर्माण किए। अद्भुत विश्व सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

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कश्मीर.!! ! महर्षि कश्यप की तपोभूमि, आदिशङ्कराचार्य की साधना भूमि, महाकवि कल्हण के राजतरंगिणी का सृजन भूमि और शैव परम्परा का उद्गम स्थल...!! दुर्भाग्यवश और राजनीतिक अकर्मण्यता व स्वार्थ के कारण कई दशकों से सनातनी रक्त से नहा रही है। किन्तु आज भी यदा-कदा यहाँ की धरा अपने उदर से सनातन संस्कृति के प्रमाण जनती रहती है। हरवन क्षेत्र, कश्मीर में एक जलाशय की खुदाई हरवन उद्यान में हो रही थी। यह वर्ष २०१७ का समय था। अनायास खुदाई कर्मी को कुछ "ठोस" मिला। जब इसे सुरक्षित निकाला गया तो लोग उसे देख आनंदित और अचम्भित हुए। ये एक दुर्लभ एकमुखी शिवलिङ्ग है जो वहाँ से प्राप्त हुए। इस अनुपम शिवलिङ्ग की ऊँचाई २.५' फीट है। (चित्र-साभार) इस अद्भुत शिवलिङ्ग को छठी शताब्दी का निर्माण माना जाता है। इस शिवलिङ्ग पर बने मुखाकृति के केशविन्यास में बौद्ध काल की स्पष्ट छाप है। तभी तो कहते हैं कि सनातन धर्म के प्रमाण को छुपा सकते हैं किन्तु नष्ट नहीं कर सकते। अद्वितीय सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

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सनातन धर्म के कलाकृतियों में प्रकृति स्वयं रँग भरकर उन्हें अतिसौन्दर्यपूर्ण बनाती हैं। श्री मरियम्मा मन्दिर विशाल टेप्पाक्कुलम जलाशय के तट पर वंडियूर में स्थित है। यह मन्दिरों के नगर मदुरै, तमिलनाडु में स्थित है। ग्रीष्म ऋतु में यह सम्पूर्ण जलाशय रिक्त पड़ा हुआ होता है और लोग इसे क्रीड़ास्थली के रूप में उपयोग किया करते हैं। किन्तु वर्षा ऋतु आते ही जलाशय आकण्ठ जल से आप्लावित हो जाता है और यह मनोहारी दृश्य प्रस्तुत करता है जिससे लोग अनायास ही आकृष्ट हो जाते हैं। मन्दिर की यह छवि कितनी नयनाभिरामी है। (चित्र-साभार) यह टेप्पाक्कुलम मीनाक्षी मन्दिर से लगभग तीन मील दूर है। मन्दिर द्रविड़ वास्तुशिल्प का अद्वितीय उदाहरण है। सौन्दर्यपूर्ण सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म 🙏🚩 जय माँ भगवती मीनाक्षी 🙏🌺 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

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धरती के स्वर्ग कश्मीर के कण-कण में भगवान शिव समाहित हैं। कश्मीर के श्रीनगर में शङ्करमठ के निकट ही अतिप्राचीन दुर्गानाग मन्दिर हैं। दुर्गानाग मन्दिर में दुर्लभ शिवलिङ्ग स्थापित है। अतीत में आदि शङ्कराचार्य अपने साधना के लिए इसी शङ्कर मठ में ठहरे थे। इसी शङ्कर मठ में आदि शङ्कराचार्य को माँ शक्ति स्वरूपा देवी के दर्शन प्राप्त हुए थे। माँ के दर्शन प्राप्ति से आह्लादित आदि शङ्कराचार्य ने यहीं उनके विश्व विख्यात कृति "सौंदर्य लहरी" की रचना किए थे। दुर्गानाग मन्दिर तक सीढ़ियों के निर्माण अठारहवीं शताब्दी में करवाया गया है। यह एक जागृत पीठ है। दर्शनकर्ता भक्तों के मनवांछित अभीष्ट को पूर्ण करते हैं। वैभवशाली सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

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सनातनी शिल्पकार कितने सूक्ष्म से सूक्ष्म बातों को ध्यान में रखकर उसे अपने सृजन में समाहित करते थे, इसका यह मूर्ति आदर्श उदाहरण है। इस मूर्ति में वस्त्र-परिधान को ध्यान से देखें, वस्त्र के गाँठ, उनके कलाकृतियों इत्यादि को कितनी निपुणता से सजीव चित्रित किया गया है। इनके वस्त्र ठेठ गंवई वेश में गढ़े गए हैं। सम्पूर्ण मूर्ति में अप्रतिम भाव संप्रेषण और सौन्दर्य है। यह अल्प खण्डित मूर्ति नन्द बाबा और मैया यशोदा के हैं। उनके गोद में बाल गोपाल व बाल बलभद्र हैं। (चित्र-साभार) बाल गोपाला की गैया भी पार्श्व में निर्मित है। यह मूर्ति श्री दसावतार मन्दिर, देवगढ़, उत्तरप्रदेश में है। यह गुप्तकालीन मूर्ति पाँचवीं शताब्दी का माना गया है। मन्दिर के खम्भे में उकीर्ण कलाकृतियाँ मनमोहक हैं। इस अनुपम कृति को जब गढ़ा जा रहा होगा उस समय के सनातनी शिल्पकार के मस्तिष्क में लल्ला कान्हा, बाल बलदाऊ, नन्द बाबा, मैया यशोदा की जो छवि अंकित होगी उसे कल्पना करते ही सर्वांग पुलकित हो उठता है। रोम रोम रोमांच से भर जाता है। धन्य हैं वे सनातनी शिल्पकार जिन्होंने इस अनमोल रचना को गढ़ा है.!! दुर्लभतम सनातन धरोहर...!! जय सना...

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आर्यावर्त दुर्लभ धार्मिक सम्पदा का अमूल्य निधि अपने आँचल में रखे हुए थे। किन्तु विधर्मी म्लेच्छ मु$लों ततपश्चात दुर्दान्त $साई लुटेरों ने इसे लूट कर नष्ट विनष्ट कर दिया। यह अद्वितीय भैरव जी, भगवान शिव व माता पार्वती की प्रतिमा एक अखण्ड पाषाण शिला से निर्मित हैं। (चित्र-साभार) इनके अतिरिक्त श्री विनायक गणपति जी, श्री स्कन्द कार्तिकेय व आकर्षक नन्दी महाराज भी एक साथ ही निर्मित हैं। यह १२०० वर्षों से भी अधिक प्राचीन माना गया है। यह कभी महर्षि कश्यप के भूमि कश्मीर का धरोहर रहा था। इसको देखते ही इनके सनातनी निर्माणकर्ता के शिल्पकला की निपुणता का स्वतः अनुमान हो जाता है। मु@लों ने ६०० वर्ष पूर्व अपने पापपूर्ण कुकर्म से इसे अपवित्र व खण्डित कर दिया। जब लुटेरे फिरंगियों का देश भर शासन हुआ तो इस अमूल्य धरोहर को चुरा कर ले गया। आज यह अमूल्य प्रतिमा क्लीवलैंड संग्रहालय में रखा है। अब यह सब देखकर भी "भाई-चारा" पर कैसा भरोसा.???? अमूल्य सनातन धरोहर.....!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

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आज भी विश्व के जिस किसी भी स्थान पर सनातन धर्म के धरोहर हैं वे कौतूहल से भरपूर हैं। बौद्ध बहुल देश थाईलैंड में भगवान श्रीमन्नारायण (श्रीविष्णु) व गरूड़ का विशिष्ट मन्दिर है। अविश्वसनीय रूप से यह सम्पूर्ण मन्दिर "काष्ठ" से निर्मित है। यहाँ भगवान श्री हरि विष्णु जी व उनके वाहन विनता पुत्र गरूड़ जी की प्रतिमा भी काष्ठ से ही निर्मित हैं।(चित्र-साभार) श्री विष्णु मन्दिर, पटाया, थाईलैंड। यहाँ के प्रत्येक वस्तु, मूर्तियों, पुष्प - लताओं, कलाकृतियों पर सनातन संस्कृति की गहरी छाप है। यह सनातन संस्कृति का छाप अत्यंत सौंदर्यपूर्ण, उत्कृष्ठ सृजन, और दुर्लभ कृति है। अद्वितीय सनातन विश्व धरोहर...!! जय सनातन धर्म 🙏🌺 जय श्री हरि नारायण 🙏🌺 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

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माता सती के दक्ष प्रजापति के यज्ञ कुण्ड में आत्मदाह के पश्चात भगवान शिव उनके मृत देह को अपने कन्धे पर उठा रुद्रताण्डव करने लगे। तब सृष्टि को संहार से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने अपने अपने सुदर्शन चक्र से उस मृत देह को कई खण्ड में विभक्त कर दिए। जहाँ जहाँ माता के अंग गिरे वहाँ वहाँ शक्तिपीठ हैं। कुल ५१ शक्तिपीठ हैं। किन्तु स्थानीय लोगों के मान्यताओं पर कुछ ऐसे भी माता के स्थल हैं जिन्हें वे शक्तिपीठ मानते हैं। श्री महाकाली शक्तिस्थल, कालिका धाम को भी सिद्ध शक्तिपीठ माना जाता है। श्री महागौरी माता मन्दिर, शिमलापुरी, लुधियाना, पंजाब। श्री महागौरी माता मन्दिर में माँ जगततारिणी, भयहारिणी, भवतारिणी श्री दक्षिणेश्वरी काली माँ की दिव्य प्रतिमा स्थापित हैं। इस मन्दिर की चमत्कारी विशिष्टता है कि संध्या आरती के समय माँ के नेत्र हिलते हैं। इस अद्भुत दृश्य को लाखों भक्तों ने अपने आँखों से देखा है और वे इस चमत्कार के साक्षी हैं। यहाँ माँ स्वयम्भू पिण्डी के रूप में विराजमान हैं। लोगों को इस धाम में अनन्य श्रद्धा है और यहाँ भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती हैं। या देवि सर्वभूतेषु शक्तिरुपेण संस्थिता नमस...