Posts

Showing posts from October, 2024

सनातन धर्म और हम

Image
वामपंथी लुगदी उपन्यास लेखक (कथित इतिहासकार) तथा लहरू गैंग के चरण चाटूकारों ने किस प्रकार षड्यंत्र रच कर सनातनियों का मति हर लिया कि उन्हें अपने गौरवान्वित अतीत का भी भान नहीं रहा....!! इन "च्यूटीए" ने हमें पढ़ाया की प्रक्षेपास्त्र (मिसाइल) इत्यादि आयुद्ध आधुनिक युग में पश्चिमी देशों ने निर्मित किया है। उन शठमति, मूढ़मति से इस "मिसाइल और उसके लॉन्चर" की मूर्तियों को दिखा कर यही पूछना है कि "हे वर्णसंकर उत्पादों, यदि मिसाइल पश्चिमी देशों ने आधुनिक समय में बनाया है तो यह मूर्ति सहस्र वर्ष पूर्व ही सनातन धर्म के मन्दिरों में कैसे निर्मित और शोभायमान है.??? यह मिसाइल व लॉन्चर की मूर्ति हलेबिदू मन्दिर, कर्नाटक में है जो सहस्र वर्ष प्राचीन है। यह मूर्ति ही इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि प्राचीन काल में आर्यावर्त के विज्ञानियों को मिसाइल, लॉन्चर, ज्वलनशील वाणों, लॉन्चिंग पैड इत्यादि की तकनीक को विकसित करने का ज्ञान प्राप्त था और जिसे हमारे ग्रन्थों को चुराकर विदेशियों ने परतंत्रता के समय अपने देश ले जाकर और उस चोरी के ज्ञान का उपयोग करके ही आधुनिक आयुधों का निर्माण किय...

सनातन धर्म और हम

Image
भगवान श्री हरि नारायण के कुल चौबीस अवतार माने जाते हैं। जिनमें दशावतार प्रमुख हैं। इनके अतिरिक्त चौदह अन्य अवतारों को माना जाता है। भगवान श्री हरि विष्णु के हयग्रीव अवतार को सोलहवें अवतार के रूप में माना जाता है। भगवान हयग्रीव का यह अतिदुर्लभ प्रतिमा "निंरा नारायण पेरुमल मन्दिर, तिरुथनकाल, शिवकाशी, तमिलनाडु में स्थापित है। यह मन्दिर भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित है। यहाँ भगवान विष्णु "निंरा नारायण" के रूप में व माँ लक्ष्मी "अरुणकमला महादेवी" के रूप में पूजे जाते हैं। भगवान हयग्रीव अवतरण की कथा इस प्रकार है..... एक दैत्य हयग्रीव ने माँ महामाया का घोर तपस्या कर माँ को प्रसन्न कर लिया। माँ महामाया उसे तामसी शक्ति के रूप में दर्शन दे वर माँगने को बोलीं। दैत्य हयग्रीव ने अमरत्व का वर माँगा तो माँ ने कहा कि अमरत्व का वरदान किसी को भी नहीं दिया जाता, कुछ और माँग लो। दैत्य हयग्रीव ने माँगा की उसकी मृत्यु हयग्रीव (मेरे) के हाथों ही हो। माता महामाया ने "एवमस्तु" कहा और अंतर्ध्यान हो गईं। अब तो दैत्य हयग्रीव प्रसन्नता से पागल ही हो गया क्योंकि वह स्वयं तो अपन...

सनातन धर्म और हम

Image
सहस्रों वर्षों तक क्रूर काल के झंझावातों को सहन कर भी अपने सौंदर्य को अक्षुण्ण रखे हुए हैं यह अद्वितीय मूर्ति। इसके सूक्ष्म से सूक्ष्म कलाकारी भी इन क्रूर मौसम के मार में अपरिवर्तित रहे हैं। इस मूर्ति के आभूषणों, वस्त्रों और मृदंगम के नयनाभिरामी कलाकृतियों पर ध्यान दें.! क्या ये मंत्रमुग्ध, चमत्कृत और सम्मोहित नहीं कर रहे हैं.? इस मूर्ति के भाव भंगिमाएँ कितने जीवन्त और मनमोहक हैं। इस शिल्पकला को देखकर सनातनी शिल्पकार के सम्मान में मस्तक स्वतः झुक जाता है। ये अतुलनीय मूर्ति सघन वन के मध्य श्री अन्नपूर्णेश्वरी मन्दिर, मंगलोर, मूदबिदरी, कर्नाटक में स्थित है। आज के आधुनिक तकनीक के युग में भी क्या मात्र पारिश्रमिक के लिए कोई इसकी प्रतिकृति बना सकते.? इस प्रकार के निर्माण क्या बिना धर्म के प्रति निष्ठा और समर्पण के बनाया जा सकता है.? धन्य हैं वो सनातनी पूर्वज जिन्होंने इसे निर्माण किए हैं.! वैभवशाली सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म और हम

Image
देवाधिदेव महादेव के असंख्य मन्दिरों को विधर्मी मुगल आक्रांताओं ने अपने द्वेष के कारण अपवित्र और विध्वंस किया। परन्तु चरणचाटुकार षड्यंत्रकारी वामजीवीयों ने अपने स्वार्थ सिद्ध हेतु इस वीभत्स कृत्यों को हमारे इतिहास से ही लोपित करा दिया है। जिन मन्दिरों तक पापियों का हाथ नहीं पहुँचा और वे सुरक्षित रहे उनमें से एक हैं श्री लिङ्गराज मन्दिर। श्री लिङ्गराज मन्दिर, भुवनेश्वर, ओडिशा। श्री लिङ्गराज मन्दिर भगवान शिव को समर्पित है। श्री लिङ्गराज मन्दिर भुवनेश्वर के सबसे पुरातन मन्दिरों में से एक है। श्री लिङ्गराज मन्दिर में वृहताकार (वृहत परिधि में) शिवलिङ्ग स्थापित हैं। श्री लिङ्गराज मन्दिर कलिंग वास्तुकला का अद्भुत नमूना है। श्री लिङ्गराज मन्दिर सोमवंशी साम्राज्य के राजाओं द्वारा निर्मित माना जाता है। श्री लिङ्गराज मन्दिर का कुछ पुनर्निमाण व सौंदर्यीकरण गङ्ग शासकों द्वारा भी किया गया था। मुख्य मन्दिर के अतिरिक्त अन्य मन्दिर समुच्चय आस पास निर्मित हैं। सनातनी लोगों के लिए एक वैभवशाली दर्शनीय स्थल है। वैभवशाली सनातन धरोहर...!! ॐ नमः परम् शिवाय 🚩 जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल🙏🔱🚩 #प्रेमझा ...

सनातन धर्म और हम

Image
आज बंगाल में सनातन धर्मावलंबियों के लिए परिस्थिति विषम है। बंगाल में एक प्रसिद्ध शिवालय है "श्री सिद्धनाथ महादेव मन्दिर"। श्री सिद्धनाथ महादेव मन्दिर, कूचबिहार नगर से सात कि.मी. दूर पंचरत्न ढलीबारी, पश्चिम बंगाल में स्थित हैं।(चित्र-साभार) श्री सिद्धनाथ महादेव मन्दिर में एक प्राचीन दुर्लभ शिवलिङ्ग स्थापित हैं जो चार शताब्दी प्राचीन है। श्री सिद्धनाथ महादेव मन्दिर के निर्माण का श्रेय राजा उपेन्द्र नारायण को जाता है जिन्होंने जो इस राज के १७१४ ई. से १७६३ ई. तक शासक रहे। राजा उपेन्द्र नारायण भगवान शिव के अनन्य भक्त थे। राजा उपेन्द्र नारायण के पश्चात इस मन्दिर का जीर्णोद्धार व पुनर्निर्माण राजा शिवेन्द्र नारायण के द्वारा १८०८ ई. में कराया गया। स्थानीय सनातन धर्मावलंबियों में श्री सिद्धनाथ महादेव मन्दिर अति महत्वपूर्ण हैं। शिवरात्रि पर्व तथा अन्य विशेष अवसरों पर यहाँ आराधना के लिए भक्तों की भीड़ रहती है। महत्वपूर्ण सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म और हम

Image
विशालकाय लोनार झील लगभग पचास सहस्र वर्ष पूर्व उल्कापिंड के पृथ्वी से टकराने से बना है। लोनार झील को "लोनार क्रेटर" भी कहा जाता है। लोनार का अर्थ "नमक की क्यारी" होता है। अत्यधिक लवण तथा "HALOARCHAEA" लवण प्रेमी जीवाणुओं के कारण इसके जल का रँग गुलाबी है। विश्व भर के विज्ञानी इस लवणीय जल के झील की ओर अनुसंधान हेतु आकर्षित होते हैं। लोनार झील मुम्बई से लगभग ५०० कि.मी. दूर बुलढाणा जनपद, महाराष्ट्र में है। लोनार झील के निकट भगवान महादेव के कुछ बारह मन्दिर रहे हैं। उन्हीं शिवालयों में से एक में यह सर्वव्यापी, सर्वशक्तिमान भगवान शिव की अति प्राचीन दुर्लभतम शिवलिङ्ग स्थापित हैं। अनुपम शिवलिङ्ग के समक्ष नन्दी महाराज चिरप्रतीक्षित अवस्था में प्रभु के ध्यान में मग्न बैठे हैं। शिवालय की संरचना जीर्ण-शीर्ण हो गई है तो भी शिवलिङ्ग तथा नन्दी सुरक्षित हैं। भगवान शिव के भक्त इस भग्न शिवालय में भी आराधना, उपासना हेतु सहर्ष आते हैं। पर्यटकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण धर्म स्थली है। महान सनातन धरोहर...!! ॐ नमः परम् शिवाय 🚩 जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा ...

सनातन धर्म और हम

Image
इस भग्न मन्दिर को ध्यान से देखें....!! इस भग्नावशेष को देखकर यदि किसी के रक्त में आक्रोश व्याप्त नहीं होता है और वो "भाई-चारे" की पीपनी बजाता है तो समझ लें कि उसके रक्त के लाल रंग में "हरे रंग" का मिलावट हो चुका है। यह भग्नावशेष विराट "मार्तण्ड मन्दिर, अनन्तनाग, कश्मीर के हैं। आर्यावर्त में प्रचलित आराध्य परम्पराओं में "शैव, वैष्णव, सौर, गाणपत्य, शैव-शाक्त व स्मार्त" रहे हैं। यह मार्तण्ड मन्दिर "सौर परम्परा" का प्रमुख सुविख्यात मन्दिर था। मार्तण्ड मन्दिर का निर्माण कर्कोटक वंश के महान शासक सम्राट ललितादित्य मुक्तपिड के द्वारा उनके शासनकाल में आठवीं शताब्दी में किया गया था।(चित्र-साभार) इस भव्य मन्दिर को ध्वस्त करने का कुकर्म ¢स्लामी पापी सिकन्दर शाह मीरी ने किया था। चौदहवीं शताब्दी में सिकन्दर शाह ने इस विराट मन्दिर को ध्वस्त करवाकर अपने नाम के साथ "बुतशिकन" का ¢स्लामी उपाधि धारण किया जिसका अर्थ 'मूर्तिभंजक' होता है। इस मन्दिर के भग्नावशेष को देखकर ही इसके सौंदर्य और भव्यता के अनुमान लगाया जा सकता है कि जब यह मन्दिर अपने यौ...

सनातन धर्म और हम

Image
आदि शिव हैं.!! अनन्त शिव हैं.!! सत्य शिव हैं.!! ॐ कार शिव हैं.!! शिव ही ब्रह्म हैं.!! शिव ही शक्ति हैं.!! विश्व के कोने कोने में शिव व्याप्त हैं.!! ये सौन्दर्यपूर्ण शिवालय आर्यावर्त से सुदूरवर्ती देश काम्पाला, युगाण्डा, अफ्रीका में स्थित हैं। (चित्र-साभार) यह शिव मन्दिर दुर्लभतम विशिष्टता अपने में समेटे हुए हैं। यह सम्पूर्ण शिव मन्दिर विस्मयकारी रूप से मात्र "पाषाण" से निर्मित है। इस अद्भुत मन्दिर के निर्माण में एक कण भी लौह तत्व का उपयोग नहीं किया गया है। यह शिव मन्दिर ज्योतिर्लिङ्ग श्री सोमनाथ मन्दिर के उपरांत आर्यावर्त से बाहर द्वितीय विराट शिवालय हैं। इस शिव मन्दिर का निर्माण युगाण्डा में बसे "गुजराती" लोगों के सौजन्य से सम्पन्न हुआ है। अद्वितीय विश्व सनातन धरोहर...!! ॐ नमः परम् शिवाय 🚩 जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म और हम

Image
हमारे सनातनी पूर्वजों ने सघन अनुसंधान के पश्चात शिखा (चोटी) रखने का प्रावधान किया था। यह एक अमूल्य निधि का कोष हमें सौंपा गया था परन्तु आधुनिकता व पाश्चात्य अन्धानुकरण में हमने उस कोष की महत्ता को भुला दिया है। चोटी जिस स्थान पर रखा जाता है वह "बिन्दु चक्र" के स्थान पर है। "बिन्दु चक्र" आज्ञा चक्र और सहस्रार चक्र के मध्य होता है। पशुओं के लिए मूलाधार चक्र ही सर्वोच्च चक्र होता है अतः पशु मात्र तीन वस्तुओं का अभिलाषी होता है, भोजन, निद्रा और काम (सेक्स)। किन्तु मानव में मूलाधार चक्र प्रारम्भिक है ततपश्चात स्वाधिस्ठानचक्र, मणिपुरचक्र, अनाहत चक्र, विशुद्धि चक्र, आज्ञा चक्र और सहस्रार चक्र सर्वोच्च है। (आरोहण में) योगी अपने योग में पूर्णता प्राप्त करने हेतु आरोहण और अवरोहण दोनों को ही समग्र रूप से करते हैं तो ही प्रज्ञा प्राप्ति होती है। इसके कारण ही मनुष्य में मन, बुद्धि, अहंकार होते हैं। परिकल्पना है कि बिन्दु चक्र में चन्द्र व मणिपुर चक्र में सूर्य होते हैं। बिन्दु चक्र के चन्द्र से अमृत झरता है जिसका भक्षण मणिपुर चक्र के सूर्य द्वारा किया जाता है। बिन्दु चक्र के अमृ...

सनातन धर्म और हम

Image
देवाधिदेव महादेव, सर्वशक्तिमान, सर्वग्राही, सर्वज्ञ, सर्वव्यापी हैं। यह चराचर जगत उन्हीं के अनुकम्पा से चलायमान है। वे जब तक नहीं चाहेंगे तब तक किसी भी वस्तु का विनाश सम्भव ही नहीं है। हिमाचल प्रदेश का यह अतिप्राचीन शिव मन्दिर इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। जब सबों ने इसे छोड़ दिया तो प्रकृति स्वयं इसे अपने अंक में भरकर इसे संरक्षित कर दिया है। अब तो इस वृक्ष के जड़ ही इस शिवालय के भीत और छत हैं। अनुपम शिवलिङ्ग मन्दिर में स्थापित है और अपना आशीर्वाद सबों पर बरसा रहे हैं। दुर्लभतम सनातन धरोहर....!! ॐ नमः परम् शिवाय 🚩 जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म और हम

Image
महर्षि विश्वामित्र जिनसे मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम ने शिक्षा प्राप्त किए, उन्हें ब्रह्मर्षि कहलाने की अतीव अभिलाषा थी। किन्तु ब्रह्मर्षि वशिष्ठ उन्हें सदैव राजर्षि ही कहते थे। क्रोध से वशीभूत होकर महर्षि विश्वामित्र ने ब्रह्मर्षि वशिष्ठ की हत्या के लिए एक कटार लेकर ब्रह्मर्षि वशिष्ठ के आश्रम के एक पेड़ पर चढ़ बैठे और उचित समय की प्रतीक्षा करने लगे कि महर्षि वशिष्ठ शिष्यों को विदा कर एकान्त में हों और वे उनकी हत्या कर पाएँ। वह शरद पूर्णिमा की रात थी और चंद्रमा अपने सोलहों कलाओं से परिपूर्ण हो अपनी छटा बिखरे रहे थे। शिष्यों ने कहा :- गुरुवर, आज चन्द्रमा कितना सुन्दर दिखाई दे रहा है। महर्षि वशिष्ठ ने कहा : सौंदर्य देखना हो तो महर्षि विश्वामित्र के मुखमण्डल को देखो जो चन्द्रमा से भी अधिक सौंदर्य पूर्ण हैं। परन्तु उनके क्रोध ने इस सुंदरता पर ग्रहण लगा दिया है।  यह सुनकर महर्षि विश्वामित्र अवाक रह गए और पेड़ से उतर कर महर्षि वशिष्ठ के चरणों में गिर पड़े। महर्षि वशिष्ठ ने उन्हें पकड़ कर कहा :- "ब्रह्मर्षि विश्वामित्र, उठिये। महर्षि विश्वामित्र ने कहा ब्रह्मर्षि वशिष्ठ मैं तो आपकी हत्या...

सनातन धर्म और हम

Image
सनातन संस्कृति की गौरवगाथा जितने जीवन्त रूप में "छेनी-हथौड़ी" से पत्थरों पर हमारे सनातनी पूर्वजों ने लिखा है उसका अन्य उदाहरण सम्पूर्ण विश्व में मिलना दुर्लभ ही है। इस मन्दिर के वस्तुशिल्प के समक्ष तो विश्व के सभी आश्चर्य बौने प्रतीत होते हैं। श्री अरुलमिगु अरुणाचलेश्वर मन्दिर, तमिलनाडु। (चित्र-साभार) बस.!! इन्हें अपने आँखों से निहारते रहें और स्वयं को भुलाकर अपने आराध्य देव में खो जाएँ.!! नमन है सनातनी पूर्वजों को जिन्होंने सम्पूर्ण निपुणता से इसका सृजन किया है। अतुलनीय सनातन धरोहर...!! ॐ नमः परम् शिवाय 🚩 जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म और हम

Image
सम्पूर्ण आर्यावर्त में यह अनूठा और सम्भवतः इकलौता मन्दिर है जो स्वर्ण से निर्मित है। श्री महालक्ष्मी मन्दिर, वेल्लोर नगर, तमिलनाडु, के मलईकोड़ी पहाड़ों पर स्थित है। श्री महालक्ष्मी मन्दिर १५००० कि.ग्रा. स्वर्ण से निर्मित है। श्री महालक्ष्मी मन्दिर सौ एकड़ से अधिक विस्तृत भू भाग पर बना हुआ है। इस मन्दिर की एक-एक कलाकृति सनातनी शिल्पकार के हाथों से बना है। प्रतिदिन लाखों की संख्या में भक्तगण पूजन, आराधना के लिए आते हैं। माता महालक्ष्मी का आशीर्वाद सभी भक्तजनों को प्राप्त होता है। भक्तों के मध्य यह मन्दिर आकर्षण का केंद्र है। वैभवशाली भव्य सनातन धरोहर...!! जय माँ महालक्ष्मी🙏🌺 जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🌺🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म और हम

Image
इस धरा पर यदि कुछ अलौकिक, स्वर्गीय, व दिव्य है तो वह सनातन संस्कृति के दुर्लभ मन्दिर हैं जिन्हें देखकर भी प्यास नहीं मिटती, दृष्टि नहीं हटती.!! श्री थानुमालयन मन्दिर, तमिलनाडु। (चित्र-साभार) अपने अद्भुत वास्तुशिल्प से भक्तों, दर्शनकर्ताओं के मन को मोहित कर लेते हैं। वैभवपूर्ण सनातन धरोहर...!! ॐ नमः परम् शिवाय 🚩 जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म और हम

Image
खड़े स्तम्भों पर बने हुए लघु मूर्तियों, ज्यामितीय आकृतियों, पुष्प-पत्तों को देखिए। सहस्रों वर्ष पूर्व आधुनिक तकनीक रहित इन निर्माण में कितना परिश्रम और समय लगा होगा.??  सोचकर देखिए.!! सोचकर ही रोमांच होता है ना.!! किन्तु सनातनी शिल्पकारों ने अपनी शिल्पकुशलता से इस श्रमसाध्य कार्य को अतुलनीय निर्माण में परिवर्तित कर समस्त विश्व के लिए रख छोड़े हैं कि आइए देखिए और इसमें खो जाइए.!! बग्गा रामलिंगेश्वर स्वामी मन्दिर, तादिपत्री, अनन्तपुर जनपद, आन्ध्रप्रदेश। (चित्र-साभार) बग्गा रामलिंगेश्वर स्वामी मन्दिर भगवान शिव को समर्पित एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। शिव भक्तों के लिए यह आराधना, उपासना का प्रमुख केंद्र है। वैभवशाली सनातन धरोहर...!! ॐ नमः परम् शिवाय 🚩 जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म और हम

Image
भगवान श्री हरि विष्णु शेषशायी हैं। वे हरिशयन एकादशी के उपरांत चार मास तक शयन करते हैं और पुनः देवोत्थान एकादशी को अपने बैकुण्ठ से सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के कार्य संचालन हेतु निद्रा का त्याग करते हैं। जब जब धर्म की हानि होती है श्री हरि नारायण अवतरित हो कर सद रक्षण और खल निग्रह करते हैं। समस्त ब्रह्माण्ड में सभी जीवों के आनंद के मूल वही सच्चिदानंद हैं। भगवान अनन्त का एक दुर्लभतम प्रतिमा जिसमें श्रीमन्नारायण शेषनाग के कुण्डली पर शयन कर रहे हैं।(चित्र-साभार) सभी देव, ऋषि आदि स्वस्तिवाचन कर रहे हैं। यह दक्षिण भारत का चौदहवीं शताब्दी का निर्माण माना जाता है। वतर्मान में यह अद्भुत प्रतिमा राष्ट्रीय संग्रहालय, स्कॉटलैंड, एडिनबर्ग, यूनाईटेड किंगडम में रखा है। अमूल्य सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म 🙏🚩 ॐ नमो नारायणाय 🚩 जय श्रीमन्नारायण 🙏🌺 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म और हम

Image
आपने अखण्ड पाषाण शिला से निर्मित प्रतिमाएँ, मूर्तियाँ, क्रीड़ा सामग्री इत्यादि बहुतायत में देखे होंगे किन्तु क्या पाषाण के एक ही चट्टान से निर्मित सम्पूर्ण जोड़-रहित अखण्ड मन्दिर देखा है.?? तो सोचने को विवश हो जाएँगे। परन्तु सनातनी शिल्पकार पूर्वजों ने इस असम्भव को भी सम्भव कर दिखाया और वो भी आज से सहस्रों वर्ष पूर्व ही। श्री पाएर (पाएच) शिव मन्दिर वह अकल्पनीय दुर्लभ मन्दिर है जो अखण्ड पाषाण शिला से निर्मित है। (चित्र-साभार) श्री पाएर शिव मन्दिर, पुलवामा, कश्मीर में है। इस मन्दिर में कहीं भी जोड़ नहीं है। मन्दिर में अनुपम शिवलिङ्ग स्थापित हैं। मन्दिर में सुन्दर आकृतियों को उकीर्ण किया गया है। देवशिल्पी विश्वकर्मा के आशीर्वाद से ही सनातनी वास्तुशिल्पकारों द्वारा इस मन्दिर का निर्माण सम्भव हुआ होगा। इस मन्दिर को लगभग १५०० वर्ष प्राचीन माना जाता है। कभी इस मन्दिर में भी रुद्राष्टकम का पाठ किया जाता था। कभी यहाँ भी शिव-भक्त आस्था से अविभूत हो रूद्राभिषेक करते थे। किन्तु रेगिस्तानी जाहिलों के वर्णसंकरों के रक्तपात से यह स्थान सनातनी विहीन हो गया। आज यह मन्दिर निर्जन और सौंदर्य विहीन सा हो गया ...

सनातन धर्म और हम

Image
सम्पूर्ण विश्व में भाँति-भाँति के रँग-रूप, आकर-प्रकार के शिवलिङ्ग प्राप्य हैं। किन्तु, यह दुर्लभतम शिवलिङ्ग अपने आप में अनूठा और अप्रतिम हैं। (चित्र-साभार) इस अद्भुत शिवलिङ्ग में नन्दी महाराज व कूर्म (कच्छप/कछुआ) संयुक्त रूप में निर्मित हैं। यह अतिप्राचीन भगवान देवाधिदेव महादेव को समर्पित श्री गङ्गेश्वर महादेव मन्दिर में स्थापित हैं। श्री गङ्गेश्वर महादेव मन्दिर,  गङ्गवा ग्राम, दांता तालुका, बनासकांठा जनपद गुजरात में स्थित हैं। शिवलिङ्ग में स्पष्ट रूप में नन्दी महाराज व कूर्म दृश्यमान हैं। मन्दिर भग्न स्थिति में ही है। मन्दिर के शिखर भी खण्डित हैं। मात्र गर्भगृह सुरक्षित है जहाँ यह अनुपम शिवलिङ्ग स्थापित हैं। इस मन्दिर की भव्यता का गर्भगृह को देखकर कोई भी अनुमान लगा सकता है कि अपने गौरवपूर्ण अतीत में यह मन्दिर कितना भव्य रहा होगा.!! इस मन्दिर के गर्भगृह के एक भीत पर श्रीमन्नारायण के दशावतार उकीर्ण हैं। इनमें मत्स्यावतार, कूर्मावतार, वाराहावतार, नरसिंहावतार, वामनावतार, श्री परशुराम अवतार, श्री राम अवतार, श्री बलभद्र अवतार तथा श्री कृष्ण अवतार हैं। आश्चर्यजनक रूप से इनमें श्री कल्कि ...

सनातन धर्म और हम

Image
जिसे चमत्कार भी नमस्कार करते हैं वही अकल्पनीय सनातन शिल्पकला है। माँ नारायणी की इस प्रतिमा में सनातनी पूर्वजों की शिल्पकुशलता अपने उत्कृष्ट रूप में शोभायमान है। तो भी वामपंथियों और लहरू गैंग के चरण-चाटूकारों को सनातन संस्कृति का वास्तुशिल्प प्रभवित नहीं कर पाए। यह दुर्भाग्य सनातन संस्कृति के शिल्प कला का नहीं अपितु उन वामपंथियों और लहरू चमचों का रहा है, जिसके भाग्य में ही इनका आंनद लेना नहीं लिखा है। अन्यथा सम्पूर्ण विश्व इसे चमत्कार ही मानेंगे और जानेंगे क्योंकि आधुनिक युग के तकनीकों से भी इस प्रतिमा की अनुकृति पुनर्निर्माण असम्भव ही प्रतीत होता है। यह माँ महिषासुरमर्दिनि का दुर्लभतम प्रतिमा हलेबिदू मन्दिर, कर्नाटक में स्थित है। (चित्र-साभार) इस प्रतिमा को zoom करके देखें और उस वैभवशाली अतीत की कल्पनाओं को मग्न हो जाएँ। वैभवपूर्ण सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म 🚩 जय जय माँ जगदम्बे 🙏🌺 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म और हम

Image
यह चित्र उस पवित्र स्थल का है जो सनातन संस्कृति में देवियों के सर्वोच्च मानदण्ड को स्थापित किया है जिन्हें पढ़कर नेत्र सजल, हृदय गर्व से ऊँचा था मस्तक नमन करने स्वमेव झुक जाता है। यह वीरांगना महारानी और सोलह सहस्र देवियों का "जौहर कुण्ड", चितौड़गढ़, राजस्थान है। (चित्र-साभार) जिसके अत्याचार और पाशविकता को जानकर नेत्रों में लहू उतर आता है और क्रोध से सर्वाङ्ग आक्रोशित हो जाता है। वह दुर्दान्त हत्यारा और कोई नहीं विधर्मी म्लेच्छ अल्लाउद्दीन खिलजी था। जिसे महिमामण्डित करने में वामपंथियों और लहरू गैंग के चरण-चाटूकारों ने इतिहास में कोई कमी नहीं छोड़ा है। यही वो दुर्दान्त हत्यारा था जिसके कारण सोलह सहस्र (१६०००) हिन्दू वीरांगनाओं को जौहर करने को विवश होना पड़ा था। और उन वीरांगनाओं ने अपने नारी सम्मान की रक्षा हेतु सोलह सिंगार कर सहर्ष जौहर कर मृत्यु का आलिंगन कर लिया था। आज भी इन वीरांगनाओं के गौरवगाथा को पढ़ एक ओर नेत्र सजल होते हैं तो दूसरी ओर मस्तक गर्व से ऊँचा हो नमन करने इनके श्री चरणों में झुक जाता है। कभी प्रख्यात इतिहासविद श्री अतुल रावत की पुस्तक पढ़ें, जिसमें उन्होंने लिखा है क...

सनातन धर्म और हम

Image
परमपिता एवं जगतमाता उमामहेश्वर के समस्त परिवार का विग्रह अनेक शिवालयों में सुलभ ही दर्शन हो जाते हैं। परन्तु गणाध्यक्ष, विघ्नहर्ता, पार्वतीनन्दन श्री गणपति भैय्या के समस्त परिवार का एक साथ दर्शन सम्भवतः इसी एकमात्र देवालय में होते हैं। (किसी अन्य मंदिरों में है तो बता कर ज्ञानवर्धन करें।) यह दुर्लभ दृश्य श्री विद्या धाम मन्दिर, इंदौर, मध्यप्रदेश में है। इस देवालय में श्री गणेश भैय्या अपनी अर्धांगिनियों, पुत्रों, पुत्री, पुत्रवधुओं और पौत्रों संग विराजमान हैं। यहाँ श्री गणेश भैय्या अपनी भार्या प्रजापति विश्वकर्मा की पुत्रियों रिद्धि एवं सिद्धि के संग हैं। उनके संग सिद्धि से पुत्र क्षेम एवं रिद्धि से पुत्र लाभ विराजमान हैं। क्षेम को ही शुभ के नाम से जाना जाता है। सम्पदा प्राप्ति हेतु इन्हीं शुभ-लाभ का नाम अंकित किया जाता है। उनके संग उनकी पुत्रवधुएँ तुष्टि एवं पुष्टि विराजमान हैं। उनके संग पौत्र द्वय आमोद एवं प्रमोद विराजमान हैं। साथ में उनकी पुत्री व क्षेम लाभ की अनुजा संतोषी माता भी विराजमान हैं। यह एक अनुपम दिव्य आनन्ददायक दृश्य है। बुद्धिदाता विनायक गणपति सभी सनातनी स्नेहीजनों को आशी...

सनातन धर्म और हम

Image
सम्पूर्ण सृष्टि में पुरुष तत्व static हैं और प्रकृति तत्व kinetic. यह सम्पूर्ण सृष्टि आदिशक्ति से ही चलायमान है। माँ आदिशक्ति के एक रूप "माँ पाताल भैरवी" का यह दुर्लभतम विग्रह छत्तीसगढ़ में हैं। (चित्र-साभार) माँ पाताल भैरवी का यह विग्रह भूतल से सोलह फीट नीचे स्थापित हैं। माँ पाताल भैरवी का यह विग्रह पन्द्रह फीट ऊँची और ग्यारह टन वजनी हैं। यह भव्य माँ पाताल भैरवी विग्रह, बर्फानी धाम, राजनंदगांव, छत्तीसगढ़ में स्थित हैं। भक्तों में इनके दिव्य रूप का अखण्ड आकर्षक है। भक्त नकारात्मकप्रभावों से मुक्ति के लिए माँ के शरण में आते हैं और माँ से परम् आनन्द का प्रसाद पाते हैं। अद्भुत सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म 🙏🚩 जय माँ भुवनेश्वरी🙏🌺 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म और हम

Image
गर्व करें कि हमारे सनातनी शिल्पकारों को सम्भवतः पाषाण को भी गला कर मूर्ति गढ़ने की कला ज्ञात थी। अन्यथा जो कलाकृतियाँ मिट्टी या धातु से भी बनाया जाना असम्भव ही है, उन मूर्तियों/प्रतिमाओं/संरचनाओं को भी वे पाषाण से गढ़ कर हमें सौंप गए हैं और जो आज विश्व भर को अपने अनूठे अकल्पनीय निर्माण से चमत्कृत करता रहता है। मन्दिरों और देव विग्रहों की उत्कृष्टता को छोड़ दें और इन आभूषणों को ध्यान से देखें.!! क्या आधुनिक शिल्पकला से इसकी प्रतिकृति को धातु या मृदा से भी बनाना सम्भव है.??? ध्यान रहे.!! यह अखण्ड पाषाण शिला के एक ही चट्टान से निर्मित है। आपका उत्तर "नहीं" में ही होगा। गौरवान्वित होइए अपने सनातनी पूर्वजों के शिल्प कुशलता पर की उन्होंने इन आभूषणों को पत्थर से गढ़ कर असम्भव को भी सम्भव बना दिए। यह अतुलनीय आभूषण द्वारपालक मूर्ति का है जो श्री होयसलेश्वर मन्दिर, हलेबिदू, कर्नाटक में है। (चित्र-साभार) जब मन्दिर की बाह्य सज्जा ऐसा उत्कृष्ट है तो अपने सम्पूर्ण वैभवशाली काल में यह कितना अकल्पनीय रहा होगा.?? कोटि कोटि नमन है उन अनाम सनातनी पूर्वजों को जिन्होंने सहस्रों वर्ष पूर्व इन्हें निर्...

सनातन धर्म और हम

Image
यह सर्वज्ञात है कि वामपंथियों और लहरू के चरण-चाटूकारों ने आर्यावर्त के महान संस्कृति को अपमानित करने के लिए सम्पूर्ण विश्व को 'चिल्ला-चिल्ला' कर बताया कि "इस देश में विदेशी लुटेरे के आक्रमण से पूर्व एक सूई का भी निर्माण नहीं किया जाता था"। किन्तु यह प्रश्न अनुत्तरित है कि यदि इस देश में एक सूई निर्माण का भी सामर्थ्य और सम्पदा नहीं था तो सबसे पहले विधर्मी म्लेच्छ, पुनः विधर्मी पुर्तगाल, फ्रांसीसी, अंग्रेज लूटेरे इस देश में क्या "मराने व खोदवाने" बारम्बार आता था.??? इस देश के गौरवशाली अतीत के भग्नावशेष भी आजतक लोगों को सम्मोहित कर रहे हैं। इस अतिदुर्लभ श्री योग लक्ष्मी-नरसिंह स्वामी जी की प्रतिमा को ही देखें, यह प्रतिमा एक ही अखण्ड पाषाण शिला से निर्मित है।(चित्र-साभार) इस प्रतिमा में प्रयुक्त शिल्प विधा कितना उत्कृष्ठ रहा है की आज सहस्रों वर्ष पश्चात भी यह सनातनी शिल्पकुशलता दर्शनकर्ता को रोमांचित/आह्लादित करता है। यह अतुलनीय प्रतिमा हम्पी, कर्नाटक में है। इस प्रतिमा को विधर्मी रेगिस्तानी पशुओं ने सनातन धर्म से अपने जन्मप्रदत्त शत्रुता के कारण १५६५ ई. में क्ष...