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Showing posts from July, 2023

सनातन धर्म

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श्री सहस्रबाहु मन्दिर भगवान श्री हरि विष्णु जी को समर्पित है। यह मन्दिर नागदा, राजस्थान में है। विधर्मी मुगलों ने अपने हीनभावना के कारण मन्दिर को क्षत-विक्षत कर दिया है। परन्तु इस मन्दिर के भग्नावशेष भी अकल्पनीय प्रतिमूर्ति हैं। जिस काल में पश्चिमी फिरंगियों ने "कला" शब्द का उच्चारण और लेखन भी नहीं सीखा था उस काल में सनातनी शिल्पकारों ने पाषाण पर त्रिआयामी मूर्तियों को गढ़ कर भव्य मन्दिरों का निर्माण किए। (चित्र - साभार) किन्तु दुर्भाग्य!! रेगिस्तानी पशुओं के कुकर्मों के कारण ये आज खण्डहर हैं.! Zoom करके देखें.!!! आश्चर्य से दाँतों तले उँगली दबा लेंगे.! वैभवशाली सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म 🙏🚩 जय श्रीमन्नारायण🙏🌺 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म

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आर्यावर्त में जितने मन्दिरों को मुगलों ने क्षतिग्रस्त और ध्वस्त किया है उनके भग्नावशेषों को देख नेत्र सजल हो जाते हैं। यह भग्नावशेष श्री रुद्र महालय मन्दिर का है। इस मन्दिर का निर्माण पश्चिमी चालुक्य साम्राज्य के नरेश मूलराज ने ९४३ ई. में आरम्भ करवाया था और यह जयसिम्ह सिद्धराज के शासन काल में ११४० ई. में सम्पूर्ण हुआ। किन्तु मुगलों ने अपनी सनातन धर्म के प्रति शत्रुता में इस भव्य  मन्दिर को ध्वस्त कर दिया। (चित्र - साभार) इस मन्दिर को रुद्रमाल मन्दिर भी कहा जाता है। यह मन्दिर भग्नावशेष सिद्धपुर, पाटण जनपद, गुजरात मे स्थित है। Zoom करके देखें.!! इस अविश्वसनीय शिल्पकला को देख सनातनी शिल्पकारों के लिए आप भी धन्य धन्य कह उठेंगे। अतुलनीय सनातन धरोहर....!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म

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श्री लिङ्गराज मन्दिर देवाधिदेव महादेव को समर्पित है। श्री लिङ्गराज मन्दिर में एक वृहताकार शिवलिङ्ग स्थपित हैं (परिधि में)। अब इतना प्राचीन होने पर शिवलिङ्ग पर कुछ आंस बन गया है। यह मन्दिर सातवी शताब्दी का बना हुआ है। श्री लिङ्गराज मन्दिर भुवनेश्वर, ओडिशा में स्थित हैं। यह मन्दिर कला निपुणता, सम्पूर्णता और समरूपता का आदर्श प्रतिमूर्ति है। Zoom करके देखें...!! दोनों ओर बने कलाकृतियों, लघु मूर्तियों में कोई अंतर नहीं ढूंढ पाएँगे। अब अपने मस्तिष्क पर थोड़ा जोर लगाकर सोचें कि जब उस समय SI मापन प्रणाली विकसित नहीं हुई थी तो कैसे इतना सटीक माप किया गया है जिससे दोनों ही ओर के संरचनाओं में एक जरा सा भी अंतर नहीं है.?? क्या इससे यह प्रमाणित नहीं होता कि हमारा वैदिक ज्योतिष शास्त्र का मापन और गणना प्रणाली किसी भी अन्य कथित विकसित प्रणालियों से श्रेष्ठ रहा है.?? बस आवश्यकता है कि हम हर बात में पाश्चात्य देशों के प्रमाणपत्र को ढूंढना छोड़ दें.!! अतुलनीय सनातन धरोहर..!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म

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जहाँ से शैव परम्परा का आरम्भ हुआ, जहाँ महर्षि कश्यप और आदिशंकराचार्य ने तपश्चर्या किए उसी कश्मीर में आज यह शिव मन्दिर उपेक्षित हैं क्योंकि इनके देख-रेख के लिए अब कोई सनातनी जीवित हैं ही नहीं। ये हैं श्री शिव मन्दिर ल्वदुव गाँव, पाम्पोर प्रखंड, पुलवामा जनपद, कश्मीर में..!!! इस मन्दिर को जीवनाथ मन्दिर के नाम से जाना जाता है जो भगवान शिव को समर्पित है। ल्वदुव गाँव के सभी सनातनी या तो धर्म परिवर्तन को प्राप्त हुए या मृत्यु को। यह शिव मन्दिर आठवीं शताब्दी का माना जाता है जो एक झरने के मध्य एक प्राकृतिक तलैया में स्थापित है तथा इसे "सन्यासर नाग" के नाम से जाना जाता है। कदाचित अब यह मन्दिर अधिकांश कश्मीरी लोगों को भी ज्ञात नहीं है। (चित्र - साभार) वर्ष के अधिकांश समय में यह जल में रहता है। मन्दिर के भग्नावशेषों में कुछ टूटे -फूटे भीत बचे हुए हैं और कभी सूखे ऋतु में भगवान शिव की प्रतिमा भी दृष्टिगत होते हैं। श्री जीवनाथ शिव मन्दिर विधर्मियों और रेगिस्तानी पशुओं के अत्याचार की दुःखद लोमहर्षक गाथा आज भी सुना रहे हैं। आज भी यह यक्ष प्रश्न है कि क्या इस मन्दिर में कभी पञ्चाक्षरी मंत्र गू...

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जीवन के दैनिक व्यस्तता और आपाधापी में में कभी कुछ समय मिले तो इन चित्रों को ज़ूम करके ध्यानपूर्वक देखें.! ये सभी सूक्ष्म कलाकृतियाँ और जाली काष्ठ पर नहीं अपितु पत्थरों पर निर्मित किए गए हैं। एक बार विचार करें कि यदि कहीं हथौड़ी का आघात कुछ अधिक हो जाता तो क्या सम्पूर्ण अंश ही नहीं नष्ट हो जाता.? कितनी एकाग्रता और निपुणता की आवश्यकता होती होगी इस अद्भुत सृजन में यह सोचकर ही रोमांच होता है.! ऐसा प्रतीत होता है कि जिन्होंने विश्व के धरोहरों को सूची में केवल सात आश्चर्य (अजूबों/WONDERS) बनाया है उन्होंने सम्पूर्ण भारतवर्ष के भवनों का भ्रमण ही नहीं किया है अन्यथा यह मूढ़तापूर्ण निर्णय नहीं किया होता। ये हैं भारतवर्ष के विभिन्न राज-प्रासादों के झरोखे जिनके अतुलनीय सूक्ष्म कलाकृतियों को देख कर ही अचंभित हो जायेंगे। (सभी चित्र - साभार) और हाँ.!! यह कृति बिना किसी कंप्यूटर ग्राफिक्स या लेज़र गाइडेड टेक्नोलॉजी के मध्यकालीन राजप्रासादों में शिल्पकारों ने अपने हाथों से निर्मित किया गया है। समकालीन रेगिस्तानी झुंडों द्वारा निर्मित कोई भी, वामी/कामी/लिब्रांड इस स्तर का वास्तु और स्थापत्य कला का एक भी उद...

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जिस पवित्र भूमि पर महर्षि याज्ञवल्क्य ने जन्म लिया और हमें शतपथ ब्राह्मण तथा बृहदारण्यक उपनिषद् जैसी अनमोल रचनाओं की भेंट दिए.!! जिस पवित्र भूमि पर भक्त कवि शिरोमणि विद्यापति ने जन्म लिया और जिनकी भक्ति भाव में बंध कर स्वयं महादेव ही चाकर बन गए.!! जिस पवित्र भूमि पर संस्कृत साहित्य के प्रकांड विद्वान कवि कालिदास जन्म लिए.!! उसी पवित्र पावन मिथिला क्षेत्र में एक ऐसा दुर्लभतम अप्रतिम मन्दिर जहाँ देवाधिदेव महादेव के ग्यारह शिवलिङ्गम एक ही वेदी पर स्थापित हैं। श्री एकादश रुद्र महादेव मन्दिर.!!! यह मन्दिर मंगरौनी गाँव, राजनगर प्रखंड, मधुबनी जनपद, बिहार में स्थित हैं। यह मन्दिर सम्पूर्ण मधुबनी निवासियों के लिए महत्वपूर्ण मन्दिर हैं। इस मन्दिर में लगभग आठ फीट लम्बे और पाँच फीट चौड़ाई में बनी वेदी पर ही सभी एकादश शिवलिङ्गम स्थापित हैं। भक्तों की ऐसी आस्था है कि इन एकादश रुद्र महादेव के पूजन अर्चन से उन्हें गयारह गुणा अधिक फल की प्राप्ति होती है। इस प्रकार का यह अपने आप में अनूठा शिवालय है। श्रावण मास में यहाँ काँवड़ यात्रा की भी प्रथा रही है। शिव भक्त काँवड़िये बाबा भोलेनाथ के अखण्ड आस्था से काँव...

सनातन धर्म

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सत्यम शिवम सुंदरम..!!!  यह ब्रह्म वाक्य सभी सनातनी वैसे ही नहीं दुहराते हैं। सनातन धर्म के चमत्कार रहस्यमय, अद्भुत और अवर्णनीय होते हैं। इसके व्याख्या विवेचना में आपके तर्क चुक जाएँगे। एक अनुपम आदर्श उदाहरण देखिए.... क्या कभी आपने सुगंधित शिवलिङ्गों के बारे में सुना है.??? भारतवर्ष में ऐसे अद्वितीय दो सुगंधित शिवलिङ्गम मिले हैं। कुछ वर्षों पूर्व सिरपुर के पास, छत्तीसगढ़ में उत्खनन में ऐसे दो शिवलिङ्गम पाए गए हैं। (चित्र - साभार) ऐसा माना जाता है कि ये लगभग दो सहस्र वर्ष प्राचीन शिवलिङ्गम हैं। इनमें से एक शिवलिङ्गम तुलसी की सुगंध से सुवासित हैं और दूसरे चमेली की सुगंध से सुवासित हैं। जब आप इसे कुछ क्षण के लिए स्पर्श करते हैं तो इनमें से स्वतः एक दिव्य सुगंध आने लगती है। यह भी सत्य है कि जब कोई साधक अपने घोरतम तपस्या को पूर्ण कर लेते हैं तो उनके देह से दिव्य सुगंध आने लगता है। वैसे तो सामान्यतः पत्थर में कोई सुगंध नहीं होता है। परंतु यह सुगंध इन शिवलिङ्गों में इनके साधक की कठोर साधना का ही प्रतिफलन हो सकता है। पर किसी अनुसंधान के परिणाम आने तक तो यह रहस्य ही बना रहेगा। अकल्पनीय रहस्य...

सनातन धर्म

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किसी की आँखों को अपने हथेलियों से ढाँप लेना आज भी एक सामान्य क्रीड़ा है। ऐसी कथा है कि........ एक बार जगतमाता पार्वती ने परिहास में ही परमपिता देवाधिदेव भगवान महादेव के आँखों को अपने हथेलियों से ढाँप लिए। भगवान महादेव के आँखों के बन्द होते ही सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में अन्धकार व्याप्त हो गया। सृष्टि विनष्ट होने लगी। सम्पूर्ण ब्रह्मांड में सभी चराचर जगत में कोलाहल सुनाई देने लगा। सारी सृष्टि में हाहाकार मच गया। तब सृष्टि की रक्षा हेतु सभी देवताओं ने मिलकर देवाधिदेव महादेव की स्तुति वाचन किया.!!  प्रार्थना किए.!! प्रभु कृपानिधान उनके स्तुति से प्रसन्न हो अपने नेत्रों को खोल सृष्टि की रक्षा किए। इस कथा को सनातनी शिल्पकारों ने अत्यंत सौन्दर्यपूर्ण रूप में पत्थरों में गढ़ा है। एकाम्बरेश्वरर मन्दिर, काँचीपुरम, तमिलनाडु। (चित्र - साभार) इस मूर्ति में भगवान महादेव के आँखों पर देवी माँ पार्वती अपनी हथेली ढांप रखी हुई है। नन्दी महाराज जी और वासुकी नागनाथ की जीवंत मूर्ति निर्मित है। सभी देव ऋषि प्रार्थना की मुद्रा में हैं। मुकुट, आभूषणों, वस्त्रों, अंग - विन्यासों, पुष्प - पत्तियों के निर्माण प्रक...

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महर्षि कश्यप की तपोभूमि, कर्मभूमि...! शैव परम्परा का उद्गम क्षेत्र.....! धरती का स्वर्ग.....! यहीं स्थित हैं एक अकल्पनीय, अविश्वसनीय मन्दिर...!!! श्री पन्द्रेथन मन्दिर, इसे स्थानीय लोगों के द्वारा "पानी मन्दिर" कहा जाता है। "पानी मन्दिर" परमपिता देवाधिदेव महादेव को समर्पित है। यह मन्दिर श्रीनगर सिटी से पांच कि. मी. की दूरी पर बादामी बाग कैंट, जम्मू कश्मीर में स्थित है। घाटी में यह एक अद्भुत दर्शनीय स्थल है। पानी मन्दिर का निर्माण कश्मीर नरेश पार्थ (९२१ - ९३१ ई. में शासन) के मंत्री मेरु वर्धन के द्वारा करवाया गया था। "पानी मन्दिर" झेलम नदी के उत्तर में एक वर्गाकार जल-कुण्ड में स्थित है। यह मन्दिर वर्ष के अधिकांश समय में जल में ही रहता है। (इसीलिए इसे पानी मन्दिर कहा जाता है)। "पानी मन्दिर अपने विशिष्ट 'symmetrical design and geometry' के कारण अनूठा है। (चित्र - साभार) यह कश्मीरी वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण है। वर्ष के अधिकांश समय जल के अन्दर रहने पर भी इस मन्दिर के सौंदर्य और दृढ़ता में कोई कमी नहीं है। इसे देखकर एक ही विचार मष्तिष्क में कौंध आता...

सनातन धर्म

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सनातनी पूर्वजों के द्वारा अपने आराध्य देव की आराधना, पूजन, ध्यान के लिए अकल्पनीय, अविश्वसनीय स्थलों का निर्माण किया गया है। ये स्थल एक से बढ़कर एक हैं और स्थापत्य व वास्तुकला के अद्वितीय थाती हैं। इन सभी मन्दिरों में सनातनी पूर्वजों के समर्पण, अथक परिश्रम और कला निपुणता अपने उत्कृष्ट रूप में दृष्टिगोचर होता है। बादामी कन्दराओं (BADAMI CAVES), कर्नाटक में निर्मित इन मन्दिरों को देखकर दाँतों तले अंगुली दबा लेंगे। मन्त्रमुग्ध हो देखते रह जाएँगे। श्री महा विष्णु कन्दरा मन्दिर (cave - 3) में मनोहारी श्री हरि विष्णु का विग्रह स्थापित है। यह कन्दरा मन्दिर समुच्चय चालुक्य नरेशों (चालुक्य साम्राज्य, चालुक्य वंश) के द्वारा ५२८ ई. में बनवाया गया है। इन कन्दराओं में  कन्दरा - १ (cave - 1) भगवान शिव को समर्पित है। कन्दरा - २ और ३ ( cave - 2 & 3) भगवान श्री विष्णु को समर्पित है। कन्दरा - ४ ( cave - ४) भगवान महावीर स्वामी को समर्पित है। (चित्र - साभार) इन कन्दरा मन्दिरों में पत्थर के चट्टानों को आश्चर्यजनक रूप से काटकर मन्दिरों को भव्यता प्रदान किया गया है। छत और स्तम्भों पर गढ़े मूर्तियों और उ...

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अमरकंटक में ३५०० फीट की ऊँचाई पर मैकाल, सतपुड़ा और विंध्य पर्वत माला के मध्य एक वैभवपूर्ण भव्य मन्दिर का निर्माण किया गया है। श्रीयन्त्र महामेरू मन्दिर का प्रवेशद्वार आश्चर्यजनक, लुभावना और जटिल वास्तुशिल्प से निर्मित किया गया है। मन्दिर के प्रवेशद्वार पर चार मुखाकृति वाली एक विशाल मूर्ति है। जिनमे देवी काली, देवी लक्ष्मी, देवी सरस्वती, व देवी भुवनेश्वरी की मुखाकृति बनाई गई हैं। उनके ठीक नीचे ६४ योगिनियों (देवी की सहयोगियों) की छोटी आकर्षक मूर्तियाँ गढ़ी गई हैं। ये पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण चारों ओर १६ - १६ लघु मूर्तियाँ लगी हैं। (चित्र - साभार) उसके नीचे देवियों, नर्तकियों की आकर्षक मूर्तियों का निर्माण किया गया है अस्त्र-शस्त्र व वाद्ययंत्रों से सुसज्जित हैं। इस मन्दिर का निर्माण ज्योतिष के अनुसार गुरु पुष्प नक्षत्र में १९९१ ई. में आरम्भ किया गया था क्योंकि निर्माण के लिए यह नक्षत्र सबसे शुभ माना गया था। इनमें एक अलौकिक आकर्षण शक्ति है जो दर्शनार्थियों को मन्त्रमुग्ध कर देते हैं, सम्मोहित कर देते हैं। सौन्दर्यपूर्ण सनातन धरोहर....!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा ...

सनातन धर्म

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उत्तर भारत की तुलना में दक्षिण भारत में आततायी मुगलों का वर्चस्व कम रहा इसलिए उत्तर भारत में जहाँ अधिकांश मन्दिर मुगलों द्वारा जीर्ण शीर्ण व ध्वस्त कर दिया गया किन्तु दक्षिण भारत के मन्दिर तुलनात्मक रूप से सुरक्षित हैं। ऐसा ही एक मन्दिर श्रीकांतेश्वर मन्दिर, नांजनगुड मैसूर, कर्नाटक हैं। श्रीकांतेश्वर मन्दिर देवाधिदेव महादेव को समर्पित हैं। इस मन्दिर को वामपंथियों और कथित लिबरल इतिहासकारों को देखना चाहिए जिससे उनके ज्ञानचक्षु पर पड़े सनातन द्रोह का आवरण हटे और वे नीच भी देख सकें कि मुगलों और अंग्रेजों के भारत लूटने के पूर्व भी भारत में अकल्पनीय और अविश्वसनीय मन्दिरों, भवनों, राज-प्रासादों का निर्माण होता था। (Zoom करके देखें) नांजनगुड तीर्थ क्षेत्र अति प्राचीन है। यह कावेरी नदी के एक सहायक नदी काबिनी के तट पर स्थित है। नांजनगुड दसवीं/ ग्यारहवीं शताब्दी में गंग और चोल साम्राज्यों के समय से ही प्रसिद्ध रहा है। देवाधिदेव महादेव को यहाँ श्रीकांतेश्वर के नाम से पूजे जाते हैं। द्रविड़ शैली में बना श्रीकांतेश्वर मन्दिर १४७ स्तम्भों पर बना हुआ है। मन्दिर के बाहर भगवान शिव का एक विशाल प्रतिमा है।...

सनातन धर्म

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अहा!!! क्या अनुपम दृश्य है.!! इस ग्रेनाइट स्तम्भ को ज़ूम करके देखें.!! इसमें आप पाएँगे कि सतयुग कालीन घटना को कितने निपुणता से उकीर्ण किया गया है। इस कलाकृतियों में यह दर्शाया गया है कि जब महर्षि दुर्वासा के श्राप से देवराज इंद्र श्री हीन हो गए और उनका राज्य भी चला गया तो श्री नारायण के सुझाव पर उन्होंने दैत्यराज बलि से समझौता कर समुद्र मंथन किया गया था। इसमें पर्वतराज मंदराचल को मथानी, नागराज वासुकी को नेति (डोरी) और श्री विष्णु के कूर्म अवतार को आधार बनाकर समुद्र मंथन किया गया। नागराज वासुकी के मुख की ओर दैत्यराज बलि के नेतृत्व में दैत्य समूह और पूँछ की ओर देवराज इंद्र के नेतृत्व में देव समूह ने मिलकर समुद्र मंथन किया। इस निर्माण में सनातनी शिल्पकारों के द्वारा दिया गया श्रम, समय और समर्पण सोचकर ही सम्मान में मस्तक नत हो जाता है। श्री रुद्रेश्वर मन्दिर, पालमपेट, तेलंगाना। (चित्र - साभार) श्री रुद्रेश्वर मन्दिर को रामप्पा मन्दिर भी कहा जाता है। अद्वितीय सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल🙏🔱🙏 #प्रेमझा

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समस्त स्वर परमपिता परमेश्वर शिव से ही उत्पन्न हैं। स्वर ही ईश्वर हैं। और स्वर नाद के ही पर्याय हैं। नाद देवाधिदेव महादेव के डमरू से उत्पन्न हैं। प्रकृति के सभी स्पंदन भगवान शिव के नृत्य से ही संचालित/नियंत्रित हैं। भगवान शिव का एक अद्भुत, अद्वितीय नृत्य प्रतिमा...!!! यह शिव प्रतिमा बादामी गुफा (cave - 1) कर्नाटक के प्रवेश द्वार पर ही निर्मित हैं। (चित्र - साभार) यह भगवान शिव का अतिभङ्ग मुद्रा अष्टादश भुजी हैं। भगवान शिव के सभी अष्टादश भुजाएँ अस्त्र, शस्त्र, वाद्य यंत्रों से सुसज्जित हैं। भगवान शिव के हाथों में त्रिशूल, पाश, डमरू, मृदंगम, नाग इत्यादि शोभायमान हैं। भगवान शिव अपने अनुपम नृत्य मुद्रा में दिव्य अलौकिक ऊर्जा बिखेर रहे हैं जिनसे ये सम्पूर्ण जगत चलायमान है। यहाँ भगवान शिव का मुखमंडल परम् शान्ति लिए हुए हैं। नन्दी महाराज और श्री गणपति भईया इस दुर्लभ दृश्य के आनन्द का रसपान कर रहे हैं। शिव गण वाद्य यंत्रों पर थाप दे रहे हैं। एक अद्वितीय "आदियोगी" के रूप में परमपिता देवाधिदेव महादेव का यह रूप भक्तों को आकर्षित कर रहे हैं। दुर्लभतम सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय म...

सनातन धर्म

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रानी की बाव या रानी की बावड़ी एक विश्व विख्यात अद्भुत धरोहर है। इसे विश्व धरोहर में भी सम्मिलित किया गया है। रानी की बाव पाटण, गुजरात में स्थित है। रानी की बाव का निर्माण सोलंकी वंश के शासक भीम प्रथम की पटरानी तथा सौराष्ट्र के खेंगारा की पुत्री उदयमती के द्वारा ११ वीं शताब्दी में करवाया गया था। रानी की बाव एक दुर्लभतम अकल्पनीय संरचना है। इसी बाव की भित्ति पर माँ महिषासुरमर्दिनी की एक अप्रतिम सौंदर्यपूर्ण प्रतिमा निर्मित हैं। माँ महिषासुरमर्दिनी अष्टदशभुजी हैं और इनके सभी हाथों में अस्त्र शस्त्र सुसज्जित हैं। महिषासुर का उद्भव महिष-(भैंसे) से हो रहा है जिसका वध माँ अम्बे अपने त्रिशूल से कर रही हैं। माँ महिषासुरमर्दिनी का वाहन सिंह महिषासुर पर आक्रमण किए हुए है। सूक्ष्म से सूक्ष्म कलाकृति और आभूषण भी पूर्ण स्पष्टता से उकीर्ण किया गया है और प्रतिमा जीवन्त प्रतीत होता है। (चित्र-साभार) अद्वितीय सनातन धरोहर....!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय माँ भगवती महिषासुरर्दिनी 🙏🌺 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

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देवाधिदेव महादेव के भक्तों ने इनके शिवलिङ्ग को जल-थल सभी स्थानों पर स्थापित कर अपने आराध्य देव का पूजन अर्चन किए हैं। एक ऐसा ही शिवलिङ्ग जो समुद्र के मध्य स्थापित हैं और वरूण देव इनका सतत जलाभिषेक करते रहते हैं। श्री बाणगंगा शिवलिङ्ग, प्रभास पाटण, सौराष्ट्र, गुजरात। (चित्र - साभार) यह अप्रतिम अद्भुत दुर्लभ शिवलिङ्ग सोमनाथ मन्दिर से कूछ दूरी पर समुद्र में स्थापित हैं। एक दिव्य स्थल जहाँ शिवलिङ्ग पर समुद्र अनवरत अपने जल को लहरों से समर्पित करते रहते हैं। समुद्र (अरब सागर) की लहरें चौबीसों घंटे निरंतर इस शिवलिङ्ग का अभिषेक करती रहती हैं। अद्भुत सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल🙏🔱🚩 #प्रेमझा

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एक अतुलनीय मन्दिर जिसके निर्माण का श्रेय पूर्व गङ्ग साम्राज्य के नरेश नरसिंहदेव प्रथम को जाता है। इन्होंने १३ वीं शताब्दी (१२६० ई.) में कोणार्क के भव्य सूर्य मन्दिर का निर्माण करवाया। यह सूर्य मन्दिर पुरी से लगभग २२ मील उत्तरपूर्व में समुद्र तट पर स्थापित है। कोणार्क सूर्य मन्दिर, कोणार्क, पुरी जनपद, ओडिशा। यह मन्दिर मुख्यतः तीन भागों में बना है, १. प्रवेश द्वार, २. नृत्य मण्डप, ३. मुख्य मन्दिर (गर्भगृह)। यह मन्दिर सूर्य के रथ की आकृति में निर्मित है जिसे सात अश्व खींचते प्रतीत होते हैं (समुद्र की ओर चार अश्व व दूसरी ओर तीन अश्व)। इस रथ के पहिये पर सौर-घड़ी निर्मित है। मुख्य मन्दिर के बाहरी दीवारों पर संभोग मुद्राओं में लघु भित्ति चित्रों की सम्पूर्ण सृंखला उकीर्ण है। वामपंथियों व अ-सनातनी लोगों को इसपर आपत्ति हो सकता है। वास्तव में यह मन्दिर ध्यान साधना के उच्चतम स्थल रहे हैं। ये मूर्तियाँ कहती हैं कि....  यदि आपमें इस चित्रों को देखकर लेशमात्र भी वासना का विचार उत्पन्न होता है तो अभी साधना के लिए आपकी तैयारी पूर्ण नहीं हुई है। अभी और तैयारी करें। अभी आपके लिए उपयुक्त समय नहीं आया ...

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सनातन संस्कृति की अनेकों विलक्षणताएँ जो आपके चमत्कृत कर देंगे.!! विस्मयकारी प्रतीत होंगे.!! कौतूहल उत्पन्न करेंगे.!! यह दिव्य पवित्र आम का वृक्ष श्री एकम्बरेश्वर शिव मन्दिर परिसर में स्थित है। श्री एकम्बरेश्वर शिव मन्दिर परम् पिता देवाधिदेव महादेव को समर्पित है। ऐसा माना जाता है कि यह वृक्ष साढ़े तीन सहस्र वर्षों से भी अधिक प्राचीन है। इस वृक्ष में एक अद्वितीय विशिष्टता है। ऐसी मान्यता है कि सनातन धर्म को निर्देशित करने वाले आदि ग्रँथ का इस वृक्ष से अटूट सम्बंध है। इस वृक्ष की चार शाखाएँ चारों वेद ऋगवेद, सामवेद, यजुर्वेद, व अथर्ववेद के प्रतिनिधित्व करते हैं। अब चारो वेद के सार भिन्न-भिन्न हैं तो आश्चर्यजनक रूप से इन चारों शाखाओं के फलों के स्वाद भी अलग-अलग होते हैं। जब वृक्ष एक ही तो फलों के स्वाद में यह भिन्नता क्यों.? इसका समुचित उत्तर किसी के पास नहीं है। कहीं यह प्रभाव इस मन्दिर से उत्पन्न दिव्य ऊर्जा के कारण ही तो नहीं.?? रहस्यपूर्ण सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल🙏🔱🚩 #प्रेमझा

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आज आधुनिक विज्ञान को अपने मापन प्रणालियों (S.I. Units) पर घमंड है। परन्तु जब इस मापन प्रणाली को स्थापित नहीं किया गया था या कहें जन्म भी नहीं हुआ था तब हमारे सनातनी पूर्वजों ने समरूपता और सम्पूर्णता का अद्वितीय कीर्तिमान स्थापित किया था। यह चतुर्भुज मन्दिर भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित है। श्री चतुर्भुज मन्दिर, ओरछा, मध्यप्रदेश में स्थित है। (चित्र - साभार) इस मन्दिर के निर्माण के समय शिल्पकला और वास्तुकला किस उच्चतम स्तर का होगा इसका अनुमान इसे देखकर ही लगाया जा सकता है। इसके निर्माण प्रक्रिया में जिस प्राचीन वैदिक ज्योतिष गणना और मापन प्रणाली का उपयोग किया गया है उसी का परिणाम है कि यह संपूर्ण निर्माण त्रुटि रहित है। नमन है सनातनी शिल्पकारों/वास्तुकारों को जिन्होंने इसकी परिकल्पना कर उसे साकार रूप में गढ़ा। और साधुवाद है उन नरेशों को जिन्होंने इस कला को संरक्षण दिया और यह अद्वितीय निर्माण करवाया। वैभवशाली सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म 🙏🚩 जय श्रीमन्नारायण🙏🌺 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

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देवाधिदेव भगवान शिव सर्वव्यापी हैं। जिनके भक्तों द्वारा निर्मित शिवालय सनातन धर्म के अमिट छाप व गौरवपूर्ण अतीत के हस्ताक्षर हैं। क्रूर काल के झंझावातों में भी इनके धर्मध्वज लहराते हुए समस्त संसार में देखा जा सकता है। मणिकगढ़ किला के चहारदीवारी और मन्दिर के अवशेष जो घेरकिला, मणिकगढ़, महाराष्ट्र में है, यह भी उन्हीं जीवंत प्रमाणों में एक है। (चित्र - साभार) मणिकगढ़ किला को प्राचीन काल में व्यावसायिक मार्ग पर दृष्टि रखने के लिए बनाया गया था जो मावल (पुणे) से तटीय बन्दरगाह तक जाता था। मणिकगढ़ अब पैदल अवरोहण का पर्यटन स्थल है। अब वर्तनान समय में किला के केवल भग्नावशेष ही बचे हैं। यहीं एक विशाल पत्थर को काटकर बनाए गए कुण्ड में यह अनुपम शिवलिङ्गम स्थापित हैं। शिवलिङ्गम के निकट ही नन्दी महाराज अपने चिरप्रतिक्षा की मुद्रा में बैठे अपने प्रभु को निहार रहे हैं। शिवलिङ्गम की संरचना अनोखी और निराली है। जिस पाषण कुण्ड में शिवलिङ्गम स्थापित हैं उसे "दरया टेक" कहा जाता है। इस अनुपम शिवलिङ्गम, नन्दी महाराज और कुछ पत्थरों के यत्र तत्र बिखरे चट्टानों के अतिरिक्त अब कुछ भी शेष नहीं बचा है। शिव भक्त ...

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विधर्मी रेगिस्तानी पशुओं का अत्याचार, असभ्यता और सनातन धर्म के प्रति शत्रुता का ज्वलंत उदाहरण प्रस्तुत है इन भग्नावशेषों के रूप में। ये भग्नावशेष श्री मार्कण्ड देव मन्दिर, चमोर्शी, महाराष्ट्र का है। (चित्र - साभार) श्री मार्कण्ड देव मन्दिर ८वीं शताब्दी में निर्मित किया गया था जिनमें २४ मन्दिरों का समुच्चय था। परन्तु विधर्मियों के अत्याचार और मन्दिर विध्वंस के कारण वर्तमान समय में अधिकांश मन्दिर जीर्ण शीर्ण अवस्था में ही हैं। श्री मार्कण्ड देव मन्दिर भगवान शिव को समर्पित था। अन्य मन्दिरों में भिन्न भिन्न सनातन देवों का पूजन अर्चन किया जाता था। इसके वास्तुशैली को ध्यान से देखें तो खजुराहो मन्दिर के वास्तुकला, मूर्तिकला व भव्यता में समानता दिखाई देता है। जब भग्नावशेष इतना अद्भुत है तो अपने सम्पूर्ण सौंदर्य में यह मन्दिर कितना भव्य और दर्शनीय रहा होगा यह सोचकर गर्व और पीड़ा दोनों ही की अनुभूति साथ साथ होती है। वैभवशाली सनातन धरोहर के भग्नावशेष...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म

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यह देश विश्व का एक मात्र आधिकारिक हिन्दू-राष्ट्र रहा है.!! अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए यह पर्वतीय देश पर्यटन हेतु विश्व विख्यात है.!! इस देश की राजधानी से १७५ कि. मी. दूर एक देव लोक सदृश्य अनुपम क्षेत्र है जिसे "पोखरा" कहते हैं। पोखरा में "महेंद्र-पुल" का सौंदर्य अद्भुत है। जाड़ो में इसके जल घनीभूत हो हिम में परिणत हो जाता है। यहाँ से पर्वतराज गौरीशंकर जिसे सागरमाथा कहा जाता है स्पष्ट दिखाई देता है। इसी पोखरा में लीलाधर श्री कृष्ण को समर्पित राधाकृष्ण मन्दिर भक्ति और आस्था का महत्वपूर्ण स्थान है। श्री राधाकृष्ण मन्दिर, पोखरा, नेपाल। इस मन्दिर में अलंकृत काष्ठ शिल्प का काम जिसे स्थानीय लोग "साँचा" कहते हैं, मनमोहक है। वैभवशाली सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म 🙏🚩 जय मुरलीधर श्री कृष्ण कन्हाई🙏🌺 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म

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अलंकृत पाषण शिल्प का उत्कृष्ट प्रदर्शन सनातनी पूर्वजों के हाथों किया गया है। श्री कल्लेश्व मन्दिर, हीरे हदगली, बेल्लारी जनपद, कर्नाटक। इस अद्भुत मन्दिर के निर्माण का श्रेय पश्चिमी (कल्याणी) चालुक्य सम्राट सोमेश्वर प्रथम को जाता है। इस मन्दिर का निर्माण १०५७ ई. में करवाया गया था। आज सहस्र वर्ष व्यतीत होने के पश्चात भी इस मन्दिर का अप्रतिम सौंदर्य अक्षुण्ण है। अतुलनीय सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म

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भगवान शिव के रूद्रावतार आञ्जनेय महावीर स्वामी जी हैं। सभी मन्दिरों में भगवान महावीर जी की प्रतिमा पाँव पर खड़ी मिलती हैं। (कुछ अपवाद हैं जहाँ बजरंगबली शयन मुद्रा में भी हैं।) किन्तु एक अनूठा दुर्लभ मन्दिर जहाँ भगवान महावीर जी सिर के बल उल्टे खड़े हैं। यह सम्पूर्ण विश्व का एकमात्र मन्दिर है जिसमें भगवान बजरंगबली का विग्रह सिर के बल उल्टा खड़े हैं। यह अद्वितीय प्राचीन महावीर मन्दिर साँवेर गाँव, मध्यप्रदेश में स्थित है जो इंदौर से लगभग २५ मील की दूरी पर है। उल्टे महावीर स्वामी जी के बारे में एक पौराणिक कथा है कि.. जब त्रेतायुग में प्रभु श्री राम जी का युद्ध दशानन रावण से हो रहा था तो अहिरावण ने अपना वेश बदलकर श्री राम की सेना में मिल गया। यह उसकी एक चाल थी। उसने अपने षड्यंत्र के अनुसार, जब श्री राम और भ्राता लक्ष्मण सो रहे थे तो उन्हें मूर्छित कर उनका अपहरण कर लिया। अहिरावण उन दोनों को अपने साथ पाताल लोक में ले गया। प्रातः काल उन दोनों को शिविर में अनुपस्थित देख समस्त वानर सेना में हाहाकार मच गया। अन्ततः बजरंगबली ने पाताल लोक में श्री राम और भ्राता लक्ष्मण का पता लगाकर अपने पुत्र मकरध्वज की ...