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Showing posts from July, 2025

सनातन धर्म और हम

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आर्यावर्त में जितने मन्दिरों को मुगलों ने क्षतिग्रस्त और ध्वस्त किया है उनके भग्नावशेषों को देख नेत्र सजल हो जाते हैं। यह भग्नावशेष श्री रुद्र महालय मन्दिर का है। इस मन्दिर का निर्माण पश्चिमी चालुक्य साम्राज्य के नरेश मूलराज ने ९४३ ई. में आरम्भ करवाया था और यह जयसिम्ह सिद्धराज के शासन काल में ११४० ई. में सम्पूर्ण हुआ। किन्तु मुगलों ने अपनी सनातन धर्म के प्रति शत्रुता में इस भव्य  मन्दिर को छिन्न भिन्न कर ध्वस्त कर दिया। इस मन्दिर को रुद्रमाल मन्दिर भी कहा जाता है। यह मन्दिर भग्नावशेष सिद्धपुर, पाटण जनपद, गुजरात में स्थित है। Zoom करके देखें.!! इस अविश्वसनीय शिल्पकला को देख सनातनी शिल्पकारों के लिए आप भी धन्य धन्य कह उठेंगे। वैभवशाली सनातन धरोहर के भग्नावशेष....!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म और हम

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श्री सहस्रबाहु मन्दिर भगवान श्री हरि विष्णु जी को समर्पित है। यह मन्दिर नागदा, राजस्थान में है। विधर्मी मुगलों ने अपने हीनभावना के कारण मन्दिर को क्षत-विक्षत कर दिया है। परन्तु इस मन्दिर के भग्नावशेष भी अकल्पनीय प्रतिमूर्ति हैं। जिस काल में पश्चिमी फिरंगियों ने "कला" शब्द का उच्चारण और लेखन भी नहीं सीखा था उस काल में सनातनी शिल्पकारों ने पाषाण पर त्रिआयामी मूर्तियों को गढ़ कर भव्य मन्दिरों का निर्माण किए। (चित्र - साभार) किन्तु दुर्भाग्य!! रेगिस्तानी पशुओं के कुकर्मों के कारण ये आज खण्डहर हैं.! Zoom करके देखें.!!! आश्चर्य से दाँतों तले उँगली दबा लेंगे.! वैभवशाली सनातन धरोहर के भग्नावशेष...!! जय सनातन धर्म 🙏🚩 जय श्रीमन्नारायण🙏🌺 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म और हम

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श्री लिङ्गराज मन्दिर देवाधिदेव महादेव को समर्पित है। श्री लिङ्गराज मन्दिर में एक वृहताकार शिवलिङ्ग स्थपित हैं (परिधि में)। अब इतना प्राचीन होने पर शिवलिङ्ग पर कुछ आंस (Nick) बन गया है। यह मन्दिर सातवीं शताब्दी का बना हुआ है। श्री लिङ्गराज मन्दिर भुवनेश्वर, ओडिशा में स्थित हैं। यह मन्दिर कला निपुणता, सम्पूर्णता और समरूपता का आदर्श प्रतिमूर्ति है। Zoom करके देखें...!! दोनों ओर बने कलाकृतियों, लघु मूर्तियों में कोई अंतर नहीं ढूंढ पाएँगे। अब अपने मस्तिष्क पर थोड़ा जोर लगाकर सोचें कि जब उस समय SI मापन प्रणाली विकसित नहीं हुई थी तो कैसे इतना सटीक माप किया गया है जिससे दोनों ही ओर के संरचनाओं में एक जरा सा भी अंतर नहीं है.?? क्या इससे यह प्रमाणित नहीं होता कि हमारा वैदिक ज्योतिष शास्त्र का मापन और गणना प्रणाली किसी भी अन्य कथित विकसित प्रणालियों से श्रेष्ठ रहा है.?? बस आवश्यकता है कि हम हर बात में पाश्चात्य देशों के प्रमाणपत्र को ढूंढना छोड़ दें.!! अतुलनीय सनातन धरोहर..!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म और हम

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शिवालय के अन्दर तो शिवलिङ्ग सभी स्थानों पर मिलते हैं। परन्तु यदि सम्पूर्ण शिवालय ही शिवलिङ्गाकृति में हो तो कितना मनमोहक दृश्य हो.!! और यह विलक्षण शिव मन्दिर शिवलिङ्ग की आकृति में ही निर्मित हैं। यह मन्दिर रामगढ़, झारखंड के निर्जन वन में स्थित हैं। (चित्र-साभार) मन्दिर के स्थापत्य में लिङ्गाकृति और जल लहरी (अरघा) का स्वरूप स्पष्टता से दृष्टिगोचर होता है। इस मन्दिर के देखभाल और पुनर्निर्माण/सौंदर्यीकरण की अत्यंत आवश्यकता है अन्यथा हम इस अद्भुत विशिष्टतापूर्ण मन्दिर को खो देंगे। इसके निर्माण का वास्तविक समय तो ज्ञात नहीं है। इसे निर्माण करवाने वाले सनातनी पूर्वजों को नमन। वैभवशाली सनातन धरोहर...!! ॐ नमः परम् शिवाय 🚩 जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म और हम

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एक अतुलनीय मन्दिर जिसके निर्माण का श्रेय पूर्व गङ्ग साम्राज्य के नरेश नरसिंहदेव प्रथम को जाता है। इन्होंने तेरहवीं शताब्दी (१२६० ई.) में कोणार्क के भव्य सूर्य मन्दिर का निर्माण करवाया। यह सूर्य मन्दिर पुरी से लगभग २२ मील उत्तरपूर्व में समुद्र तट पर स्थापित है। कोणार्क सूर्य मन्दिर, कोणार्क, पुरी जनपद, ओडिशा। यह मन्दिर मुख्यतः तीन भागों में बना है, १. प्रवेश द्वार, २. नृत्य मण्डप, ३. मुख्य मन्दिर (गर्भगृह)। यह मन्दिर सूर्य के रथ की आकृति में निर्मित है जिसे सात अश्व खींचते प्रतीत होते हैं (समुद्र की ओर चार अश्व व दूसरी ओर तीन अश्व)। इस रथ के पहिये पर सौर-घड़ी निर्मित है। मुख्य मन्दिर के बाहरी दीवारों पर संभोग मुद्राओं में लघु भित्ति चित्रों की सम्पूर्ण सृंखला उकीर्ण है। वामपंथियों व अ-सनातनी लोगों को इसपर आपत्ति हो सकता है। वास्तव में यह मन्दिर ध्यान साधना के उच्चतम स्थल रहे हैं। ये मूर्तियाँ कहती हैं कि....  यदि आपमें इस चित्रों को देखकर लेशमात्र भी वासना का विचार उत्पन्न होता है तो अभी साधना के लिए आपकी तैयारी पूर्ण नहीं हुई है। अभी और तैयारी करें। अभी आपके लिए उपयुक्त समय नहीं आया...

सनातन धर्म और हम

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सनातन संस्कृति की अनेकों विलक्षणताएँ जो आपके चमत्कृत कर देंगे.!! विस्मयकारी प्रतीत होंगे.!! कौतूहल उत्पन्न करेंगे.!! यह दिव्य पवित्र आम का वृक्ष श्री एकम्बरेश्वर शिव मन्दिर परिसर में स्थित है। श्री एकम्बरेश्वर शिव मन्दिर परम् पिता देवाधिदेव महादेव को समर्पित है। ऐसा माना जाता है कि यह वृक्ष साढ़े तीन सहस्र वर्षों से भी अधिक प्राचीन है। इस वृक्ष में एक अद्वितीय विशिष्टता है। ऐसी मान्यता है कि सनातन धर्म को निर्देशित करने वाले आदि ग्रँथ का इस वृक्ष से अटूट सम्बंध है। इस वृक्ष की चार शाखाएँ चारों वेद ऋगवेद, सामवेद, यजुर्वेद, व अथर्ववेद के प्रतिनिधित्व करते हैं। अब चारो वेद के सार भिन्न-भिन्न हैं तो आश्चर्यजनक रूप से इन चारों शाखाओं के फलों के स्वाद भी अलग-अलग होते हैं। जब वृक्ष एक ही तो फलों के स्वाद में यह भिन्नता क्यों.? इसका समुचित उत्तर किसी के पास नहीं है। कहीं यह प्रभाव इस मन्दिर से उत्पन्न दिव्य ऊर्जा के कारण ही तो नहीं.?? रहस्यपूर्ण सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म और हम

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भगवान शिव के रूद्रावतार आञ्जनेय महावीर स्वामी जी हैं। सभी मन्दिरों में भगवान महावीर जी की प्रतिमा पाँव पर खड़ी मिलती हैं। (कुछ अपवाद हैं जहाँ बजरंगबली शयन मुद्रा में भी हैं।) किन्तु एक अनूठा दुर्लभ मन्दिर जहाँ भगवान महावीर जी सिर के बल उल्टे खड़े हैं। सम्भवतः यह सम्पूर्ण विश्व का एकमात्र मन्दिर है जिसमें भगवान बजरंगबली का विग्रह सिर के बल उल्टा खड़े हैं। यह अद्वितीय प्राचीन महावीर मन्दिर साँवेर गाँव, मध्यप्रदेश में स्थित है जो इंदौर से लगभग २५ मील की दूरी पर है। उल्टे महावीर स्वामी जी के बारे में एक पौराणिक कथा है कि.. जब त्रेतायुग में प्रभु श्री राम जी का युद्ध दशानन रावण से हो रहा था तो अहिरावण ने अपना वेश बदलकर श्री राम की सेना में मिल गया। यह उसकी एक चाल थी। उसने अपने षड्यंत्र के अनुसार जब श्री राम और भ्राता लक्ष्मण सो रहे थे तो उन्हें मूर्छित कर उनका अपहरण कर लिया। अहिरावण उन दोनों को अपने साथ पाताल लोक में ले गया। प्रातः काल उन दोनों को शिविर में अनुपस्थित देख समस्त वानर सेना में हाहाकार मच गया। अन्ततः बजरंगबली ने पाताल लोक में श्री राम और लक्ष्मण का पता लगाकर अपने पुत्र मकरध्वज की ...

सनातन धर्म और हम

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ये अद्वितीय, अद्भुत शिवलिङ्गम हैं जो अपने आप में विशिष्टता समेटे हुए हैं। इस शिवलिङ्ग पर एक हंस और एक वराह उकीर्ण हैं। शिखर पर नागछत्र बने हुए हैं। इस अनुपम शिवलिङ्ग को लिङ्गोद्भव के रूप में जाना जाता है। यह शिवलिङ्ग पुराण में एक प्रचलित कथा पर निर्मित हैं। एक बार श्री विष्णु और श्री ब्रह्मदेव में "श्रेष्ठता" को लेकर विवाद उत्तपन हो गया। उसी समय एक दिव्य ज्योतिर्मय स्तम्भ प्रकट हुए जिनसे सतत अग्नि उत्पन्न हो रहे थे। उन दोनों देव को यह आदेश प्राप्ति हुई कि जो भी इस दिव्य ज्योति स्तम्भ के "आदि" या "अंत" को ज्ञात कर लेंगे वे ही सर्वश्रेष्ठ घोषित होंगे। श्री ब्रह्मदेव हंस के रूप में आकाश की ओर और श्री विष्णु वराह के रूप में पाताल की ओर प्रस्थान किये। परन्तु दोनों ही इस दिव्य ज्योति स्तम्भ के आदि-अंत का पता नहीं कर पाए। और अन्ततः दोनों ही हारकर देवाधिदेव महादेव के समक्ष नतमस्तक हो गए। देवाधिदेव महादेव दोनों को ही अपने-अपने क्षेत्र में समान रूप से श्रेष्ठ घोषित किए और विवाद का इतिश्री हुआ। यह लिङ्गोद्भव शिव विग्रह श्री त्रिशुण्ड गणपति मन्दिर में स्थापित हैं। श्र...

सनातन धर्म और हम

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श्री राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे। सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने॥ कण कण में राम समाया...... जब इ^लाम का जन्म भी नहीं हुआ था, और यह धरा सनातन संस्कृति से पुष्पित पल्लवित थी। इंडोनेशिया के बाली द्वीप पर अयुंग नदी के तट पर कंदराओं में राम कथा (रामायण) सनातनी पूर्वजों के हाथों से अपनी पूर्ण सजीवता से उकीर्ण है। इस सम्पूर्ण रामायण को उकेरने में लगे श्रम व समय का अनुमान लगाएँ...!! बस इतना ही विचार कीजिए कि उन सनातनी पूर्वजों में सनातन धर्म के प्रति जो आस्था व समर्पण भाव था क्या उतना आज हम सभी अपने जीवन में उतार पाए हैं.?? सदा ध्यान रखें "धर्म ही समृद्धि का मूल है"..!! धर्म नहीं तो हम नहीं.!! धर्म विहीन देश का महत्व, सार्थकता, उपयोगिता ही क्या.!! पुनः अखण्ड धर्मनिष्ठ होना ही सभी समस्याओं का अचूक औषधि है, निदान है, निराकरण है। लौटें सनातन धर्म/संस्कृति की ओर.!! गौरवान्वित सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय श्री राम🙏🌺 जय महाकाल 🙏🌺🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म और हम

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क्या वास्तव में "रेगिस्तानी पशुओं के झुण्ड" के आर्यावर्त में प्रवेश से पूर्व यहाँ "वास्तुशिल्प" या"सूई" भी नहीं बनता था.??? आईये देखते हैं.!! कितना दुर्लभतम भव्यतापूर्ण यह मन्दिर है जिसे सनातनी पूर्वजों ने अपने हाथों से सम्पूर्ण पहाड़ को ही काटकर ही बना डाले हैं। यह निर्माण कार्य "रेगिस्तानी पशु" के आने से पूर्व का है। यह अतुलनीय श्री नेमिनाथ मन्दिर, ग्वालियर किला, ग्वालियर, मध्यप्रदेश में स्थित है। मन्दिर के विशालकाय पाषण कक्ष में श्री नेमिनाथ ध्यान साधना में पद्मासन की मुद्रा में विराजमान हैं। श्री नेमिनाथ के मस्तक पर अतिसौन्दर्यपूर्ण पाषाण छत्र बना हुआ है। कक्ष के छत पर पूर्ण पुष्पित कमल निर्मित है जो सनातन संस्कृति का पवित्र चिह्न है (अष्टदल कमल सनातन धर्म में पवित्र हैं)। आश्चर्यजनक रूप से यह सभी निर्माण एक ही अखण्ड पाषाण शिला को काटकर निर्मित किया गया है। कक्ष के बाहरी निर्माण को मन्दिर के रूप में गढ़ा गया है। मन्दिर के ऊपर और निचले तले के बाँयीं ओर के भीत पर ध्यान दें। ऐसा प्रतीत होता है कि किसी मिट्टी के भीत को धारदार छुरी से काट कर यह बनाय...

सनातन धर्म और हम

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परमपिता परमेश्वर भगवान शिव विग्रह सामान्यतः पूर्वाभिमुखी व देवी माँ पार्वती का पश्चिमाभिमुख होते हैं। किन्तु एक मनोहारी शिव विग्रह जो दक्षिणाभिमुख हैं...!! श्री दक्षिणामूर्ति महादेव, श्री काँची कैलासनाथर मन्दिर, पिल्लैयारपलायम, कांचीपुरम, तमिलनाडु। श्री दक्षिणामूर्ति शिव का कैलासनाथर मन्दिर सातवीं शताब्दी का बना आकर्षक मन्दिर हैं। अपने दुर्लभतम कलाकृतियों और वास्तुशिल्प के कारण मन्दिर दर्शकों को मन्त्रमुग्ध कर देता है। दक्षिणामूर्ति के रूप में भगवान शिव गुरुश्रेष्ठ परम् ब्रह्म हैं और अपने आशीर्वाद से विश्व का कल्याण कर रहे हैं। मन्दिर में निर्मित लघु मूर्तियाँ, गज व सिंह की मूर्तियाँ अपने निर्माणकर्ता के निपुणता और प्रवीणता को सुस्पष्ट रेखांकित करते हैं। भगवान शिव का विग्रह भक्तों को अपने अनुपम रूप से सम्मोहित करते हैं। अतुलनीय सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म और हम

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समस्त विश्व में शैव परम्परा में भगवान शिव के भक्तों ने अपने आराध्य देव के लिए जो भी मन्दिर निर्माण किए हैं वे अतुलनीय हैं। इसका एक अद्वितीय अकल्पनीय उदाहरण श्री दुलादेव मन्दिर हैं। श्री दुलादेव मन्दिर, खजुराहो, मध्यप्रदेश में स्थित है। श्री दुलादेव मन्दिर को दूल्हादेव मन्दिर के नाम से भी जाना जाता। (चित्र - साभार) श्री दुलादेव मन्दिर देवाधिदेव महादेव को समर्पित है और सनातन संस्कृति का एक महत्वपूर्ण मन्दिर है। Zoom करके ध्यान से देखें...!! इसमें बने हुए लघु मूर्तियों को देखें...! देव, देवियों, नर्तक नर्तकियों के सुस्पष्ट भाव-भंगिमाओं में गढ़ी गई मूर्तियाँ कितनी जीवन्त प्रतीत होती हैं। इसमें किए गए सूक्ष्म कलाकृतियों, पुष्प, बेल-बूटों के निर्माण में कितना परिश्रम और समय लगा होगा, क्या कोई अनुमान लगा सकता है.? किन यंत्रों से इन्हें गढ़ा गया होगा, सोच कर ही रोमांच होता है, क्योंकि उस समय तो आधुनिक तकनीक का लेजर कटर और इलेक्ट्रिक ड्रिलर भी नहीं था। यह सनातनी पूर्वजों के वास्तुशिल्प का अप्रतिम प्रमाण है। क्या ताजमहल इसकी तुलना में श्रेष्ठ है.?? सोचने पर सनातनी पूर्वजों के सम्मान में मस्तक नत ...

सनातन धर्म और हम

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क्या आपको भान भी है कि जिस काल में विश्व की अधिकांश जनसंख्या अपनी नग्नता को चर्म और पत्तों से ढँकती थी। और अपने रहने के लिए किसी आवास नहीं, प्राकृतिक कंदराओं में शरण ढूँढती थी। उसी काल में हमारे सनातनी पूर्वजों ने सम्पूर्ण पहाड़ों को काटकर अपने हाथों से अकल्पनीय गुफाओं का निर्माण कर डाला था। यह सत्यता वामजीवीयों ने आपसे छुपाए रखा। यह निर्माण आज से दो सहस्र वर्ष पूर्व दूसरी शताब्दी में सनातनी शिल्पकारों द्वारा रचा गया है। इस अद्भुत गुफाओं का निर्माण सनातनी शिल्पकारों ने अजंता गाँव से तीन किमी दूर सघन वनों में पहाड़ों को काटकर बिना आधुनिक तकनीक और आधुनिक यंत्रों के किया है। इस निर्माण की तुलना भी विश्व के किसी अन्य निर्माणों से करना इनके वास्तुशिल्प का अपमान ही प्रतीत होता है। क्योंकि ये निर्माण अतुलनीय हैं। ये चमत्कृत करने वाले नयनाभिरामी गुफाएँ (अजंता-एलोरा), अजंता गाँव, सम्भाजी नगर जनपद, महाराष्ट्र में स्थित है। यह अपने अनमोल कलाकृतियों के कारण वर्तमान में एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल और शोध कर्ताओं के लिए दर्शनीय स्थल है। इसे देखिए और गौरवशाली अतीत के कल्पनाओं में खो जाइए। सनातनी पूर्वजों...

सनातन धर्म और हम

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बौद्ध उपासना पद्धति में तीन स्थलों का महत्वपूर्ण स्थान होते हैं... १. स्तूप - जहाँ बुद्ध के अवशेष रखे होते हैं और इसे एक विशालकाय पिंड की संरचना में निर्माण किया जाता है। २. चैत्य - विशाल रिक्त भवन जहाँ बौद्ध भिक्षु सामुहिक ध्यान करते हैं। ३. विहार - यह कोठरी नुमा संरचना जो अनेक की संख्या में हो सकता है और जहाँ बौद्ध भिक्षु निवास करते हैं। एक प्राचीन चैत्य जिसे देखकर उस समय में लोगों के वास्तु तकनीकी के उत्कृष्टता का सहज अनुमान हो जाता है। ये चैत्य गृह भज गाँव के कन्दराओं में लोनावाला के निकट पुणे, महाराष्ट्र में स्थित है। इस चैत्य गृह का निर्माण पाषाण खण्डों से नहीं बल्कि सम्पूर्ण पहाड़ों को ही काटकर निर्माण किया गया है। Zoom करके देखें...!! जिस विशालकाय संरचना को कंक्रीट से भी बनाना दुःसह और असम्भव प्रतीत होता है उसे सनातनी पूर्वजों ने किस सहजता से पहाड़ों को काटकर बना दिए हैं। अकल्पनीय, अद्वितीय वास्तुशिल्प का अतुलनीय उदाहरण है यह चैत्य गृह.!! सूक्ष्म और दुर्लभ कलाकृति अचंभित करते हैं। यह चैत्य गृह बौद्ध धर्म के हीनयान शाखा से सम्बद्ध है। अब तो यह अप्रतिम स्थल केवल दर्शन के लिए ही उपल...

सनातन धर्म और हम

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जब पाषण भी हमारे सनातनी पूर्वजों के धर्मपरायणता, अपने आराध्य देव के प्रति अखण्ड समर्पण और अपने धर्म के प्रति निष्काम कर्म की दृढ़प्रतिज्ञता की महान गाथा आज भी दर्शकों को सुना रहे हों......... श्री पुष्पगिरी मन्दिर, आंध्रप्रदेश, आर्यावर्त। (चित्र - साभार) यह मन्दिर ७वीं शताब्दी का बना हुआ है। लगभग १५०० वर्षों के गौरवशाली अतीत के साथ आज भी ये प्राचीन मन्दिर अपने सनातनी निर्माणकर्ताओं के कुशल शिल्पकला के सौंदर्य की किरणें चहुँ ओर बिखेर रहे हैं। नमन है सनातनी पूर्वजों के कला, प्रवीणता और निपुणता को जो अपनी कृतियों के रूप में गर्व से मस्तक ऊँचा किए समग्र विश्व के समक्ष खड़े हैं। अद्वितीय सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म और हम

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समस्त विश्व के शिल्पकला का उच्चतम सीमा जहाँ समाप्त हो जाता है, वहाँ से वैदिक सनातन संस्कृति का शिल्पकला आरम्भ होता है। सनातन संस्कृति के पाषण शिल्पकला का एक दुर्लभतम उदाहरण.... Zoom करके देखें...!! यह अतुलनीय कृति लकड़ियों तक पर उकीर्ण करना असंभव है किन्तु सनातनी पूर्वजों ने इसे ग्रेनाइट पर उकीर्ण कर दिए हैं। नर्तक नर्तकियों के लघु मूर्तियाँ उनके वाद्ययंत्रों से सुशोभित हैं। जाल, बेलबूटों को विशेष रूप से देखें.!! इतना जीवन्त निर्माण समकालीन किसी अन्य देशों में क्या कोई दिखा सकते हैं.??? यह मत भूलें ये निर्माण सहस्रों वर्ष पूर्व किए गए हैं। इसके उपरांत भी "लहरू-गैंग" के लिए आर्यावर्त सपेरों का देश रहा है। श्री चेन्नाकेशवा मन्दिर, कर्नाटक। (चित्र - साभार) चेन्नाकेशवा मन्दिर भगवान श्री हरि नारायण विष्णु जी को समर्पित हैं। अतुलनीय सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय श्रीमन्नारायण 🙏🌺 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म और हम

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आज पश्चिमी राज्य गोवा में सनातन संस्कृति परंपरा लुप्तप्राय अवस्था में ही है। पुर्तगालियों द्वारा आक्रमण करने और पुनः स्वतंत्र होने के मध्य लगा लम्बा समय सनातन संस्कृति परंपरा को ही लील लिया। परंतु, कहते हैं ना कि "आशा की ज्योति कभी नहीं बुझती"...!! उसी आशा की ज्योति के समतुल्य ही कुछ सनातनी मन्दिर हैं जो आज भी धर्मध्वज को सगर्व लहरा रहे हैं। यह प्राकृतिक सौंदर्य किसी को सम्मोहित कर मन्त्रमुग्ध कर सकता है। इस वैभवशाली भव्य मन्दिर का निर्माण दर्शकों को अचम्भित करने के लिए पर्याप्त है। श्री मारुति मन्दिर, पणजी, गोवा। (चित्र - साभार) श्री आञ्जनेय महावीर हनुमान जी के मन्दिर का सौन्दर्य दूर से ही किसी को भी अपने सम्मोहन से वशीभूत करने में सक्षम है। लाल और श्वेत रंग का संयोजन अद्भुत दृश्य उत्पन्न करता है। वैभवपूर्ण सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म 🚩 जय आञ्जनेय महावीर हनुमान स्वामी 🙏🚩 जय मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जी 🙏🌺 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

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आधुनिक उन्नत लेज़र तकनीक से सुसज्जित समग्र विश्व के शिल्पकारों को एक चुनौती है कि..... "क्या वे इन आभूषणों की अनुकृति निर्माण कर सकते हैं.??" ध्यान रहे.!! ये सम्पूर्ण निर्माण एक ही शिला खण्ड से किया गया है। ऐसा निर्माण सदैव उच्च स्तरीय निपुणता, समर्पण, सहनशीलता, और अपने आराध्य देव के लिए अनन्य आस्था व भक्ति से ही सम्भव है। ऐसा प्रतीत होता है कि पत्थरों को काटकर नहीं अपितु पिघला कर इन आभूषणों को गढ़ा गया है। Zoom करके सूक्ष्मतर कलाकृतियों को देखें..!! इस द्वारपालक के मुखाकृति और आँखों के भाव को देखें.!! कितना जीवन्त चित्रण किया गया है। आह्लादित.!! अविभूत.!! उन सनातनी शिल्पकार व वास्तुकार के सम्मान में मस्तक स्वमेव नत हो जाता है। होयसलेश्व मन्दिर, हलेबीदु, कर्नाटक। (चित्र - साभार) इसे निहारिए और रोमांच में खो जाइए.....!!! अकल्पनीय सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल🙏🔱🚩 #प्रेमझा

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पर्वतराज हिमालय को गिरिराज की संज्ञा से सम्बोधित किया जाता है। इसीलिए उनकी पुत्री देवी माता पार्वती को "गिरिजा" नामकरण पड़ा। और देवी माता पार्वती ने घनघोर तपस्या करके भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त किया। इन्हीं गिरिजा देवी को समर्पित "गिरिजा देवी मन्दिर" उत्तराखण्ड के सुंदरखाल गाँव में स्थित है, जो माता पार्वती के प्रमुख मन्दिरों में से एक है। यह मन्दिर, भक्ति, श्रद्धा एवं विश्वास का अद्भुत उदाहरण है। उत्तराखण्ड का यह प्रसिद्ध मन्दिर रामनगर से लगभग १५ कि. मी. की दूरी पर स्थित है। यह मन्दिर छोटी पहाड़ी के ऊपर बना हुआ है, जहाँ का प्राकृतिक सौन्दर्यपूर्ण वातावरण शांति एवं रमणीयता का अलौकिक अनुभूति कराता है। देवी के प्रसिद्ध मन्दिरों में गिरिजा देवी (गर्जिया देवी) का स्थान अद्वितीय है। (चित्र - साभार) अद्भुत सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय माँ गिरिजा भवानी 🙏🌺 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

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सनातनी मन्दिरों में काष्ठ शिल्प का अद्भुत प्रयोग देखना हो तो अपने निकट के एकमात्र हिन्दू राष्ट्र जो अब सिकुलर है वहाँ देखें.!! एक ओर अपने प्राकृतिक पर्वतीय सौंदर्य से भरपूर है तो दूसरी ओर छोटे-बड़े मन्दिरों से परिपूर्ण है। ये हैं श्री ज्ञानेश्वर महादेव मन्दिर, काठमांडू, नेपाल। नेपाल की राजधानी काठमांडू में स्थित यह परमपिता महादेव का प्रमुख मन्दिर शिव भक्तों में अत्यंत लोकप्रिय है। भोर से ही यहाँ शिव भक्तों की भीड़ को देखा जा सकता है। हर हर महादेव और ॐ नमः शिवाय के स्वर लहरियों की गूँज सुना जा सकता है। यह मन्दिर अपने काष्ठ कला के लिए भी महत्वपूर्ण है। इस मन्दिर के काष्ठ शिल्प कला की निपुणता ओर कौशलता को देखकर अचंभित रह जाएंगे, पुलकित हो जाएंगे। (चित्र - साभार) ॐ नमः परम् शिवाय।। वैभवशाली सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल🙏🔱🚩 #प्रेमझा

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आर्यावर्त के पश्चिमी घाट पर स्थित प्राकृतिक सौंदर्य का राज्य "गोवा" जो कभी शैव परम्परा का मुख्य केंद्र रहा था। कभी सोचा है कि यह राज्य अचानक कैसे "सफेदा चलन" में धर्मान्तरित हो गया.??? पुर्तगालियों द्वारा गोवा पर आक्रमण के पश्चात सनातनियों का जमकर नरसंहार किया गया। असंख्य सनातनियों को जीवित ही जला दिया गया। सनातनियों के मन्दिरों, धर्मस्थलों को विध्वंस, भ्रष्ट - ध्वस्त किया गया। किन्तु, सनातन धर्म के प्रमाणों को आजतक न तो कोई समाप्त कर पाया है ना ही कर पाएगा। इसीलिए सघन वन के मध्य आज भी गोवा के सबसे प्राचीन श्री महादेव मन्दिर अपने सम्पूर्ण भव्यता के साथ गर्व से खड़ा है। (चित्र - साभार) श्री महादेव मन्दिर, तांबड़ी सुरला, गोवा का एकमात्र "कदम्ब-यादव" वास्तुशिल्प का कल्पनातीत, कालातीत आदर्श उदाहरण है जो बेसाल्ट चट्टानों से निर्मित है और आजतक संरक्षित है। दक्कन के पठारों में बेसाल्ट चट्टान बहुतायत में उपलब्ध है उन्हीं चट्टानों को यहाँ लाकर शिल्पकारों ने कदम्ब शैली में इस भव्य मन्दिर का निर्माण किया है। पश्चिमी घाट के सुदूर घने जंगलों में छुपे होने के कारण ही पुर्...

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चातुर्मास चल रहा है। श्री हरि नारायण विष्णु संपूर्ण सृष्टि संचालन के कार्य को भगवान शिव परिवार को सौंप क्षीर सागर में योगनिद्रालीन हैं। सृष्टि का संचालन देवोत्थान एकादशी तक प्रभु महादेव परिवार ही सभी संचालन करेंगे। शिव भक्ति में आईए एक अद्वितीय, अद्भुत शिवलिङ्गम के दर्शन लाभ प्राप्त करें। (इन्हें ज़ूम कर के देखें) यह पञ्चमुख दर्शन स्थल, अरुणाचलम तिरुवन्नामलाई, तमिलनाडु में स्थापित हैं। (चित्र - साभार) इस दुर्लभतम शिवलिङ्गम का जल-लहरी (अरघा) ऐसा है जैसे कोई पद्मासन लगाकर बैठा हो। ये पद्मासन वाले पाँव किसी देवी के हैं (पुरुष के नहीं हैं)। सनातनी शिल्पकार ने आराध्य देव के प्रेरणा से इसे इस प्रकार निर्मित किया है जैसे कोई देवी (जया) अपने भीतर शिव को प्राप्त कर पद्मासन लगाकर साधना में लीन हो। या फिर उस तपस्विनी देवी से ही उनकी त्पश्चर्या के प्रभाव से शिवलिङ्गम प्रकट हो रहे हैं। दोनों पाँवों का निर्माण अत्यंत ही कलात्मक और सौंद्रयपूर्ण ढंग से किया गया है। इस अद्वितीय शिवलिङ्गम का दिव्य ऊर्जा समस्त जगत को आनंदित कर रहा है। अनमोल सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल🙏🔱🚩 #प्रेमझा ...

सनातन धर्म और हम

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भगवान श्री जगन्नाथ महाप्रभु का पुरी, ओडिशा का मन्दिर विश्वविख्यात है। (संलग्न चित्र ३) किन्तु क्या आप जानते हैं कि.................. एक और मन्दिर है जो इतना ही विशिष्ट, भव्य और सौन्दर्यपूर्ण है...!! यह है श्री जगन्नाथ मन्दिर, बोकारो, झारखंड। (संलग्न चित्र १ और २) श्री जगन्नाथ मन्दिर, बोकारो, झारखंड इस्पात नगर के मध्य में स्थित है। भक्तों के लिए आस्था और भक्ति का अद्भुत केंद्र है। यह जगन्नाथ मन्दिर बोकारो इस्पात संयंत्र के प्रबंधन के द्वारा बनवाया गया है। आश्चर्यजनक रूप से यह मन्दिर श्री जगन्नाथ मन्दिर की दुर्लभ और आदर्श अनुकृति है। (सभी चित्र - साभार) यह जगन्नाथ मन्दिर भक्ति और शान्ति का अनुपम संगम है। वैष्णव भक्त श्री जगन्नाथ मन्दिर में अपने आराध्य देव का दर्शन कर भावविभोर हो जाते हैं। एक दर्शनीय सनातन धरोहर....!! जय सनातन धर्म 🙏🚩 जय जगन्नाथ महाप्रभु🙏🌺 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

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मन्दिर को zoom करके इसके एक एक मूर्तियों, कलाकृतियों, ज्यामितीय संरचनाओं को ध्यानपूर्वक देखें और इसे एक रेखाचित्र के रूप में कागज पर उकीर्ण करने का प्रयास करें..!! क्या आप इसे उकेर पाए.???? है न असम्भव.!!! अब यह विचारणीय प्रश्न है कि जिस मन्दिर की संरचना को हम कागज पर उकेर नहीं पा रहे हैं उसे सनातनी शिल्पकारों, वास्तुकारों ने सहस्रों वर्षों पूर्व बने प्राचीन काल में बिना आधुनिक तकनीक के किस विधि से निर्मित किए होंगे.??? और यह भी ध्यान रखें कि यह मन्दिर सबसे कठोर बेसाल्ट चट्टानों को काटकर निर्मित किया गया है। जिस बेसाल्ट चट्टानों को आधुनिक लेज़र तकनीक से काटने में इतनी कठिनाई होती है तो प्राचीन काल में किस प्रकार चट्टानों पर मूर्तियों, कलाकृतियों को गढ़ा गया होगा.?? यह मन्दिर आज से लगभग एक सहस्र वर्ष पूर्व बारहवीं शताब्दी में बनवाया गया है। श्री कोपेश्वर मन्दिर, खिद्रपुर, कोल्हापुर जनपद, महाराष्ट्र। (चित्र - साभार) मन्दिर निर्माण में लगे परिश्रम और कलाकारों के निपुणता, प्रवीणता अचंभित करते हैं और सनातनी पूर्वजों के सम्मान में मस्तक नत हो जाता है। वैभवशाली सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏...

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एक ऐसा भव्य मन्दिर जहाँ प्रवेश करते ही दिव्यलोक में विचरण की अनुभूति होती है....!!! जो बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक हैं.....!!! ये हैं श्री रामनाथस्वामी मन्दिर.!!! भगवान शिव को समर्पित यह मन्दिर रामेश्वरम टापू पर स्थित है। (चित्र - साभार) रामनाथपुरम जनपद, तमिलनाडु। यह मन्दिर पाण्ड्य सम्राटों द्वारा बनवाया गया था। श्री रामनाथस्वामी मन्दिर में भगवान रामेश्वर (शिव) व देवी रामेश्वरी (पार्वती) स्थापित हैं। यह मन्दिर द्रविड़ स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण है। इस मन्दिर का गलियारा वर्तमान समय के मन्दिरों में सबसे लंबा गलियारा है। देखकर ही दर्शक मन्त्रमुग्ध हो जाते हैं। अपने उत्कृष्ट वास्तुशिल्प और रङ्गविन्यास के कारण दिव्यता का आभास कराता है। वैभवशाली सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल🙏🔱🚩 #प्रेमझा

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समस्त विश्व में सनातन संस्कृति की जड़ें कितनी गहरी हैं इसका यह जीवन्त उदाहरण है...!!!!! श्री अरुण मन्दिर, बैंकॉक, थाईलैंड। वैसे तो यह देश बौद्ध धर्म से संचालित है किन्तु यहाँ इस सनातन मन्दिर की अपनी विशिष्ट पहचान है। यह अद्भुत मन्दिर सूर्यदेव और उनके सारथी अरुण के आस्था, श्रद्धा, सम्मान में बनाया गया है। (चित्र - साभार) अरुण को प्रथम रश्मि का द्योतक माना जाता है। अरुण श्री विष्णु के वाहन गरुड़ के अग्रज व महर्षि कश्यप एवं विनता के ज्येष्ठ पुत्र हैं। इस मन्दिर के सदृश्य शिल्पकला व वास्तुकला विश्व में अन्यत्र कहीं देखने को नहीं मिलता है। इनका वास्तुशिल्प अत्यंत दुर्लभ है और यह स्वप्नलोक के भवन सा प्रतीत होता है। सनातन धर्म का दुर्लभतम विश्व धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

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बर्बर, असभ्य, लुटेरे रेगिस्तानी बद्दूओं ने अपने सनातन धर्म के प्रति घृणा, शत्रुता और हीनभावना में किस प्रकार हमारे सनातन विरासत को नष्ट-भ्रष्ट किया उसका ज्वलंत उदाहरण यह मन्दिर है। विश्व के अद्वितीय मन्दिरों में से एक श्री सहस्रबाहु मन्दिर, उदयपुर, राजस्थान में है। सहस्रबाहु अर्थात जिनके एक सहस्र बाहु हों, ये भगवान श्री हरि विष्णु ही का पर्याय है। सहस्रबाहु मन्दिर नागदा गाँव में स्थित, उदयपुर से २३ की. मी. दूरी पर है। इस मन्दिर का समस्त दीवार रामायण के कथाओं से अलंकृत हैं। रामायण की सम्पूर्ण गाथा मूर्तियों में गढ़ कर इस मन्दिर को आभूषित किया गया है। इस मन्दिर का कोई भी एक फीट स्थान मूर्तियों, कलाकृतियों से रहित नहीं ढूंढ पाएँगे। दुर्भाग्यवश, इस मन्दिर को विधर्मियों, आक्रांताओं ने ध्वस्त कर दिया है। आज जो कुछ हमें दृश्य है वह जीर्ण शीर्ण अवस्था में ही है। कल्पना करें कि जब जीर्ण शीर्ण अवस्था में यह मन्दिर इतना आकर्षक है तो अपने सम्पूर्णता में यह कितना भव्य और वैभवपूर्ण रहा होगा.?? क्या इस पाप के लिए रेगिस्तानी बद्दूओं को कभी क्षमा किया जा सकता है.?? सनातनी शिल्पकारों के कृतियों को देख मस...

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गुजरात के ज्योतिर्लिंग सोमनाथ महादेव की ख्याति विश्व प्रसिद्ध है। किन्तु गुजरात में ही एक अन्य मन्दिर अपने भव्यता और सौंदर्य के लिए अद्वितीय है। यह श्री हठीसिंह जैन मन्दिर, अहमदाबाद, गुजरात में स्थित है। श्री हठीसिंह जैन मन्दिर पन्द्रहवें जैन तीर्थंकर भगवान धर्मनाथ को समर्पित है। श्री हठीसिंह जैन मन्दिर का निर्माण सेठ हठीसिंह केसरसिंह ने १८४८ ई. में आरम्भ करवाया था। उनका अपने आराध्य देव के लिए एक भव्य मन्दिर निर्माण की योजना थी। दुर्भाग्यवश, जैन मन्दिर का निर्माण पूर्ण होने के पूर्व ही उनकी असामयिक मृत्यु हो गई, और मन्दिर निर्माण बाधित हो गया। तदोपरांत उनकी पत्नी ने आगे बढ़कर अपने पति के इस स्वप्न को साकार किया और मन्दिर निर्माण पूर्ण हुआ। यह एक अद्भुत मन्दिर है जो उत्कृष्ट वास्तुशिल्प का उदाहरण है। वैभवशाली सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

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जैसे खजुराहो मन्दिर अपने भव्यता और सौंदर्य के लिए विश्व प्रसिद्ध है वैसा ही भव्य और सौंदर्यपूर्ण मन्दिर राजस्थान में भी देख सकते हैं। इसे "मेवाड़ का खजुराहो" कहा जाता है। श्री अम्बिका माता मन्दिर, जगत, राजस्थान। अम्बिका माँ महिषासुरमर्दिनी दुर्गा का ही एक रूप है। माँ अम्बिका देवी की का एक मनमोहक अनूठा विग्रह मन्दिर में स्थापित है। मन्दिर की दीवारों पर अनेक शिलालेख उकीर्ण हैं। मन्दिर के चारों ओर देवियों, नर्तकियों की जीवंत मूर्तियाँ गढ़ी गई है जो अत्यंत आकर्षक हैं। मन्दिर की सूक्ष्म शिल्प निर्माण व कलाकृति आश्चर्यजनक हैं।(zoom करके देखें) श्री अम्बिका माता मन्दिर का निर्माण १०वीं शताब्दी में किया गया था। यह मन्दिर उदयपुर से ५० की. मी. दक्षिण में जगत गाँव में स्थित हैं। अद्वितीय सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म 🙏🚩 जय माँ अम्बे 🙏🌺 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

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भारतीय इतिहास के पुस्तकों में वामपंथी इतिहासकार ने बर्बर मुग़ल आक्रांताओं के पाप को छुपाने के लिए उसका बहुत बड़ाई लिखा है, किन्तु........ सनातनी पराक्रमी महावीर विद्याधर चंदेल ने विधर्मी महमूद गजनवी को पराजित कर उसका नाक भूमि पर रगड़वाया था, यह शौर्य गाथा लिखने में स्याही कम पड़ गया था। देवाधिदेव महादेव का एक नाम "कंदर्पी" भी है। सम्राट विद्याधर चंदेल भगवान शिव के उपासक थे। अतः उन्होंने महमूद गजनवी को पराजित करने के उपरांत अपने शौर्य की गौरव गाथा को लिखने के लिए एक भव्य मन्दिर का निर्माण करवाया।  इस मन्दिर को भगवान शिव के"कंदर्पी" नाम पर ही कंदरिया महादेव मन्दिर रखा गया। श्री कंदरिया महादेव मन्दिर भगवान शिव को समर्पित है। यह आर्यावर्त का पहला मन्दिर है जो आक्रांता मुगलों को पराजित कर विजय के उल्लास में बनाया गया है। श्री कंदरिया महादेव मन्दिर का निर्माण लगभग १००० ई. में किया गया है। यह मन्दिर १०९ फीट लम्बा, ६० फीट चौड़ा और ११६ फीट ऊँचा है। श्री कंदरिया महादेव मन्दिर आर्यावर्त के प्रमुख भव्य मन्दिरों में से एक है। श्रेष्ठ वास्तुकला से निर्मित यह मन्दिर प्राचीन वैदिक सनातन...

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भक्त और भगवान का सम्बंध अटूट होता है। यही वो सम्बंध है जो श्रद्धा और आस्था के नींव पर खड़ा किया होता है। जहाँ कहीं भी भगवान के मूरत दृश्यमान होते हैं, मस्तक श्रद्धा से स्वमेव नत हो जाता है। क्योंकि श्रद्धा भगवान शिव पर है। दुर्लभतम सनातन धरोहर श्री परशुरामेश्वर मन्दिर। यह प्राचीन सनातन शिव मन्दिर बिन्दु सागर तालाब के निकट, केदार गौरी विहार, पुराना नगर, भुवनेश्वर, ओडिशा में स्थित हैं। (चित्र - साभार) श्री परशुरामेश्वर मन्दिर, ६५० ई. में निर्मित माना जाता है। श्री परशुरामेश्वर मन्दिर नागर शैली में बना भगवान शिव को समर्पित अद्भुत मन्दिर है। १५०० वर्षों से अधिक पुरातन होने के पश्चात भी यह मन्दिर दर्शनार्थियों को आकर्षित करता है और उनके मन को मोहित कर लेता है। इस मन्दिर की सुक्ष्म कलाकृतियों और संरचनाओं को देख कर दर्शक अचंभित हो दाँतों तले उँगली दबा लेते हैं। वैभवशाली सनातन धरोहर....!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल🙏🔱🚩 #प्रेमझा

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वेल्लोर किला में राजसी सौंदर्य से परिपूर्ण अद्भुत शिव मन्दिर है। मुख्य गर्भगृह में अनुपम शिवलिङ्ग का पूजन अर्चन होता है। मुख्य मन्दिर के अतिरिक्त अनेक लघु मन्दिर भी हैं जो अपने विशिष्ट वास्तुकला से प्रभावित करते हैं। यहाँ शिव मन्दिर में देवाधिदेव महादेव का एक नयनाभिरामी विग्रह स्थापित हैं। वेल्लोर किला, बालाजी नगर, वेल्लोर जनपद, तमिलनाडु। भव्यतापूर्ण सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

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श्री कोदण्ड रामास्वामी मन्दिर, पूर्वी गोदावरी, आंध्रप्रदेश.!!! श्री कोदण्ड रामास्वामी मन्दिर का निर्माण द्वारमपुड़ी सुब्बी रेड्डी और रामा रेड्डी द्वारा १८८९ ई. में किया गया है। श्री कोदण्ड रामास्वामी मन्दिर में भगवान श्री राम, देवी सीता और भ्राता लक्ष्मण की आकर्षण मूर्तियाँ लगे हैं। श्री कोदण्ड रामास्वामी मन्दिर दक्षिण भारत का एक विख्यात मन्दिर है। यह मन्दिर सम्पूर्ण आन्ध्रप्रदेश राज्य में लोकप्रिय है। श्री कोदण्ड रामास्वामी मन्दिर में विशाल गोपुरम हैं। पूर्वी गोपुरम की ऊँचाई १७० फीट और पश्चिमी गोपुरम की ऊँचाई २०० फीट हैं। गोपुरम को देखने से ऐसा प्रतीत होता है जैसे नौवां तल आकाश से मिलकर अटखेलियाँ कर रहा है।  श्री कोदण्ड रामास्वामी मन्दिर १६ एकड़ के विस्तृत क्षेत्र में स्थित है। गोपुरम के प्रत्येक तल पर श्री रामायण की पौराणिक कथाएँ नयनाभिरामी मूर्तियों से गढ़ी गई हैं। श्री कोदण्ड रामास्वामी मन्दिर "गोल्ला मामी दादा" गाँव में स्थित है अतः यह गुलमलामीदादा राम मन्दिर के नाम से भी जाना जाता है। (चित्र -  साभार) यह एक अतुलनीय, अद्वितीय मन्दिर है जो अपने अपूर्व सौंदर्य से भक्तों को मो...

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कुरु कुमारों के गुरु आचार्य द्रोण ने जिस कन्दरा में रहकर भगवान शिव का आराधना, पूजन, तपश्चर्या किए थे उस कन्दरा को "द्रोण गुफा" के नाम से जाना जाता है (महाभारत)। इसी कन्दरा में अतिप्राचीन स्वयम्भू शिवलिङ्गम हैं .!!! यह शिवलिङ्गम श्री टपकेश्वर महादेव के नाम से सुविख्यात हैं। यह कन्दरा भी प्राकृतिक रूप से निर्मित है। श्री टपकेश्वर महादेव आसन नदी (मौसमी नदी) के तट पर देहरादून के पास स्थित हैं। श्री टपकेश्वर महादेव का अभिषेक प्रकृति स्वयं करती हैं। इस कन्दरा के छत से जल की बूंदें सतत शिवलिङ्गम पर गिरती रहती हैं। जल की बूंदों के अनवरत टपकने से इस शिवलिङ्गम  का अभिषेक होने के कारण इसे श्री टपकेश्वर महादेव कहा जाता है। (चित्र - साभार) यह आराध्य देव का एक दर्शनीय पवित्र शिवालय है। रोमांचकारी सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय महाकाल🙏🔱🚩 #प्रेमझा

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समस्त स्वर परमपिता परमेश्वर शिव से ही उत्पन्न हैं। स्वर ही ईश्वर हैं। और स्वर नाद के ही पर्याय हैं। नाद देवाधिदेव महादेव के डमरू से उत्पन्न हैं। प्रकृति के सभी स्पंदन भगवान शिव के नृत्य से ही संचालित/नियंत्रित हैं। भगवान शिव का एक अद्भुत, अद्वितीय नृत्य प्रतिमा...!!! यह शिव प्रतिमा बादामी गुफा (cave - 1) कर्नाटक के प्रवेश द्वार पर ही निर्मित हैं। (चित्र - साभार) यह भगवान शिव का अतिभङ्ग मुद्रा अष्टादश भुजी हैं। भगवान शिव के सभी अष्टादश भुजाएँ अस्त्र, शस्त्र, वाद्य यंत्रों से सुसज्जित हैं। भगवान शिव के हाथों में त्रिशूल, पाश, डमरू, मृदंगम, नाग इत्यादि शोभायमान हैं। भगवान शिव अपने अनुपम नृत्य मुद्रा में दिव्य अलौकिक ऊर्जा बिखेर रहे हैं जिनसे ये सम्पूर्ण जगत चलायमान है। यहाँ भगवान शिव का मुखमंडल परम् शान्ति लिए हुए हैं। नन्दी महाराज और श्री गणपति भईया इस दुर्लभ दृश्य के आनन्द का रसपान कर रहे हैं। शिव गण वाद्य यंत्रों पर थाप दे रहे हैं। एक अद्वितीय "आदियोगी" के रूप में परमपिता देवाधिदेव महादेव का यह रूप भक्तों को आकर्षित कर रहे हैं। दुर्लभतम सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म🙏🚩 जय म...

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आज आधुनिक विज्ञान को अपने मापन प्रणालियों (S.I. Units) पर घमंड है। परन्तु जब इस मापन प्रणाली को स्थापित नहीं किया गया था या कहें जन्म भी नहीं हुआ था तब हमारे सनातनी पूर्वजों ने समरूपता और सम्पूर्णता का अद्वितीय कीर्तिमान स्थापित किया था। यह चतुर्भुज मन्दिर भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित है। श्री चतुर्भुज मन्दिर, ओरछा, मध्यप्रदेश में स्थित है। (चित्र - साभार) इस मन्दिर के निर्माण के समय शिल्पकला और वास्तुकला किस उच्चतम स्तर का होगा इसका अनुमान इसे देखकर ही लगाया जा सकता है। इसके निर्माण प्रक्रिया में जिस प्राचीन वैदिक ज्योतिष गणना और मापन प्रणाली का उपयोग किया गया है उसी का परिणाम है कि यह संपूर्ण निर्माण त्रुटि रहित है। नमन है सनातनी शिल्पकारों/वास्तुकारों को जिन्होंने इसकी परिकल्पना कर उसे साकार रूप में गढ़ा। और साधुवाद है उन नरेशों को जिन्होंने इस कला को संरक्षण दिया और यह अद्वितीय निर्माण करवाया। वैभवशाली सनातन धरोहर...!! जय सनातन धर्म 🙏🚩 जय श्रीमन्नारायण🙏🌺 जय महाकाल 🙏🔱🚩 #प्रेमझा

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ऐसा अविश्वसनीय, अकल्पनीय, अद्वितीय भव्य मन्दिर जिसे देखकर दर्शकों के मन में आश्चर्य और कौतूहल से एक ही प्रश्न उठता है, - "कैसे.. कैसे... कैसे.... यह निर्माण सम्भव हुआ.???" इस मन्दिर का निर्माण चोल सम्राट राजराजा चोल प्रथम ने करवाया था इसीलिए इस मन्दिर को राजराजेश्वर मन्दिर भी कहा जाता है। ये हैं भगवान शिव को समर्पित श्री बृहदेश्वर मन्दिर, तंजावूर, तमिलनाडु। इस मन्दिर का विशिष्टता :- यह मन्दिर नींव रहित निर्माण है। इस मन्दिर निर्माण में सीमेंट या कोई जोड़ने वाले सामग्री का उपयोग नहीं किया गया है। इस मन्दिर का निर्माण ९९५ ई. में आज से १०३० वर्ष पूर्व में हुआ है। इस समय तक विश्व के अनेक देशों में एक विद्यालय तक नहीं था। इस मन्दिर का सम्पूर्ण निर्माण "पहेली-विधि" (interloking system) के आधार पर हुए हैं। इस मन्दिर की ऊँचाई (नींव रहित) २१६' फीट है। इस मन्दिर का विमान ८१ टन भार का है जो एक ही पाषण शिला (ग्रेनाइट) से बना हुआ है। इस मन्दिर में सम्पूर्ण निर्माण में कुल १३०,००० टन ग्रेनाइट पत्थरों का उपयोग हुआ है। इस मन्दिर में एक ही ग्रेनाइट शिला खण्ड से आभूषणों से सुसज्जि...